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पर्यावरण संरक्षण सरकार के बूते संभव नहीं, समाज की भागीदारी जरूरी; राज्यपाल ने IIT (ISM) में दिया संदेश

Published: Sun, 20 Sep 2026 09:53 PM (IST)

Jharkhand Governor Santosh Gangwar ने आईआईटी आईएसएम धनबाद में राष्ट्रीय कार्यशाला में पर्यावरण संरक्षण, जल-संरक्षण और कचरा प्रबंधन पर जोर दिया।

कार्यशाला में स्मारिका का विमोचन करते राज्यपाल संतोष गंगवार और अन्य। (फोटो साैजन्य)

कार्यशाला में स्मारिका का विमोचन करते राज्यपाल संतोष गंगवार और अन्य। (फोटो साैजन्य)

जागरण संवाददाता, धनबाद। पर्यावरण संरक्षण किसी अकेले तंत्र या सरकार के बूते संभव नहीं है। इसके लिए समाज, शिक्षण संस्थानों, वैज्ञानिकों, उद्योगों और प्रत्येक नागरिक को अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी। उक्त बातें झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने रविवार को आइआइटी आइएसएम के गोल्डन जुबली हॉल में आयोजित राष्ट्रीय पर्यावरण कार्यशाला के दौरान कहीं।

आरोग्य भारती और संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने पेड़, पानी, प्लास्टिक और स्वच्छता जैसे गंभीर विषयों पर देश का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण प्रदूषण का सीधा असर मानव स्वास्थ्य पर पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और जैव विविधता का संरक्षण आज बड़ी चुनौतियां हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति में प्रकृति के प्रति सम्मान की परंपरा रही है, इसलिए प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की जरूरत है।

विकास ऐसा हो, जो आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित रखे

राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण और घटती जैव-विविधता वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। झारखंड के समृद्ध जंगल और जलस्रोत इस राज्य की असली संपत्ति हैं। उन्होंने मिशन लाइफ का संदर्भ देते हुए आम जनता से पानी-ऊर्जा बचाने और प्लास्टिक का उपयोग न्यूनतम करने की अपील की।

राज्यपाल ने कहा कि विकास की अंधी दौड़ के बजाय हमें ऐसा सतत माडल अपनाना होगा, जो वर्तमान की जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ हमारी भावी पीढ़ियों के भविष्य को भी सुरक्षित रखे।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मिशन लाइफ का उल्लेख करते हुए पानी और ऊर्जा बचाने, प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने योग, संतुलित पोषण, स्वस्थ जीवनशैली और स्वच्छ वातावरण को स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण बताया।

तकनीक और पर्यावरण में संतुलन जरूरी

आइआइटी आइएसएम के निदेशक प्रो. सुकुमार मिश्रा ने तकनीकी दृष्टिकोण साझा करते हुए कहा कि आज चुनौती पर्यावरण या विकास में से किसी एक को चुनने की नहीं है, बल्कि दोनों के बीच संतुलन बनाने की है।

उन्होंने संसाधन दक्षता, चक्रीय अर्थव्यवस्था, स्वच्छ तकनीक, नवीकरणीय ऊर्जा और जिम्मेदार माइनिंग (खनन) पर विशेष जोर दिया। प्रो. मिश्रा के अनुसार, वैज्ञानिक रास्तों से ही विकास को टिकाऊ बनाया जा सकता है।

बदलाव की शुरुआत व्यक्ति और परिवार से हो

आरोग्य भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव अशोक कुमार वर्षने ने पर्यावरण और स्वास्थ्य के सीधे संबंध को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बदलाव की शुरुआत हर व्यक्ति को अपने घर से करनी होगी। पौधरोपण के साथ-साथ पौधों को जीवित रखना, जल पुनर्चक्रण और पुनर्भरण कुआं बनाना आज समय की मांग है।

इस राष्ट्रीय कार्यशाला में देश भर से आए विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने मंथन किया और इस चर्चा से निकले व्यावहारिक सुझावों को एक ठोस कार्ययोजना में बदलने का संकल्प लिया। कार्यक्रम में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. राकेश पंडित और समाजसेवी विकास रंजन सहित अन्य उपस्थित थे।

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वहीं कार्यशाला के आयोजन को सफल बनाने में प्रांत सचिव जयप्रकाश नारायण सिंह, महिला प्रमुख रमा सिन्हा, प्रांत पर्यावरण संयोजक अरुण राय , जिला अध्यक्ष डा विकाश रमण, कार्याध्यक्ष डीएस चौबे, सचिव विकास ओझा, बीपीपी सिन्हा, विक्रम हिमालय, ममता सिंह, डा धीरज कुमार एवं अन्य समर्पित कार्यकर्ताओं ने सहयोग किया।

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