IIT (ISM) की पहल: सूखे पत्ते अब बनेंगे जैविक खाद, पर्यावरण और खेती को मिलेगा लाभ
IIT-ISM Dhanbad और संसार ग्रीन मिलकर सूखे पत्तों को पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदलेंगे। यह पहल पर्यावरण ...और पढ़ें

IIT(ISM) Dhanbad में सूखे पत्तों से बनेगी जैविक खाद। (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, धनबाद। पर्यावरण संरक्षण और सस्टेनेबल वेस्ट मैनेजमेंट की दिशा में आईआईटी आईएसएम ने एक अहम पहल शुरू की है। संस्थान अपने इनक्यूबेटेड स्टार्टअप संसार ग्रीन के साथ मिलकर पेड़ों से गिरने वाले सूखे और बेकार पत्तों को न्यूट्रिएंट-रिच ऑर्गेनिक खाद में बदलने की तैयारी कर रहा है।
इस पहल का मकसद पत्तों को जलाने या बेकार फेंकने के बजाय उन्हें उपयोगी बनाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और ऑर्गेनिक फार्मिंग को बढ़ावा देना है। प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर हुई स्ट्रैटेजिक चर्चा में प्रो. आलोक कुमार दास, डीन, इनोवेशन एंड कॉरपोरेट रिलेशंस, आईआईटी आईएसएम, संसार ग्रीन के डायरेक्टर राजीव सिंह; धनबाद की जिला कृषि पदाधिकारी अंजना और आईआईटी आईएसएम के सहायक कुलसचिव मृण्त्युंजय शर्मा शामिल हुए।
इंस्टीट्यूशनल कैंपस और सार्वजनिक स्थल पर बड़ी मात्रा में सूखे पत्ते निकलते हैं। इन्हें जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है। जबकि गलत तरीके से फेंकने पर पत्तों में मौजूद ऑर्गेनिक मैटर भी बेकार चला जाता है। परियोजना के तहत इन पत्तों को वैज्ञानिक तरीके से डीकंपोज किया जाएगा और उनमें जरूरी ऑर्गेनिक न्यूट्रिएंट्स और बेनिफिशियल माइक्रोऑर्गेनिज्म मिलाए जाएंगे।
प्रो. आलोक कुमार दास ने कहा कि आईआईटी आईएसएम हमेशा पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं के इनोवेटिव समाधान को बढ़ावा देता रहा है। सूखे पत्ते कचरा नहीं, बल्कि ऑर्गेनिक मैटर का एक अच्छा सोर्स हैं। हमारा प्रयास इन्हें उपयोगी खाद में बदलकर वेस्ट मैनेजमेंट और सॉयल हेल्थ, दोनों को बेहतर करना है।
तैयार खाद का इस्तेमाल कैंपस गार्डन, नर्सरी, प्लांटेशन, लैंडस्केपिंग, ऑर्गेनिक खेती और सॉयल रेस्टोरेशन में किया जा सकेगा। इसे किसानों, गार्डनर्स, नर्सरी संचालकों और आम लोगों को भी उपलब्ध कराने की योजना है।
प्रो. दास ने कहा कि हम ऐसा मॉडल तैयार करना चाहते हैं जिसे विश्वविद्यालय, सरकारी संस्थान, उद्योग, हाउसिंग सोसाइटी और म्यूनिसिपल बॉडी भी अपनाकर बायोडिग्रेडेबल वेस्ट का बेहतर इस्तेमाल कर सकें। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत मशीनरी, उपकरण, मानव संसाधन, उत्पादन और दूसरे ऑपरेशनल खर्च संसार ग्रीन उठाएगा।
जबकि आईआईटी आईएसएम खाद के उत्पादन और भंडारण के लिए जरूरी जगह उपलब्ध कराएगा। पहल से कैंपस को ज्यादा हरियाली लाने के साथ ऑर्गेनिक फार्मिंग, रिसोर्स रिकवरी और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
