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चारा-पानी को अब नहीं तरसेंगे गोवंश, झारखंड के हर जिले में 20 लाख का कॉर्पस फंड

Published: Sun, 01 Nov 2026 06:01 PM (IST)

झारखंड गौ सेवा आयोग ने राज्य के सभी 24 जिलों में गोवंश के संरक्षण हेतु 20-20 लाख रुपये का कॉर्पस फंड स्थापित किया है।

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर। (जागरण)

HighLights

  1. प्रत्येक जिले को गोवंश संरक्षण हेतु 20 लाख रुपये।

  2. चारा, पानी, चिकित्सा के लिए तत्काल वित्तीय सहायता।

  3. उपायुक्त करेंगे फंड की निगरानी, तस्करी पर रोक।

रविशंकर सिंह, धनबाद। भारतीय सनातन संस्कृति में आस्था की प्रतीक, सेवा, करुणा, संवेदना और समृद्धि की आधार गाय की देखरेख के लिए धनबाद समेत सूबे के सभी जिलों के लिए झारखंड गौ सेवा आयोग ने बढ़िया पहल की है।

अब राज्य के किसी भी जिले में सड़क पर घूमते, दुर्घटनाग्रस्त या तस्करी के दौरान पकड़े गए गोवंश के चारा-पानी और देखभाल के लिए आर्थिक संकट आड़े नहीं आएगा।

आयोग की पहल पर राज्य के सभी 24 जिलों में 20-20 लाख रुपये के कॉर्पस फंड की व्यवस्था की गई है। यानी गोवंश के संरक्षण के लिए प्रत्येक जिले को 20 लाख रुपये उपलब्ध होंगे।

इस फंड की निगरानी संबंधित जिले के उपायुक्त (डीसी) करेंगे। आवश्यकता के अनुसार राशि खर्च कर गोवंश के लिए तत्काल चारा, पानी, चिकित्सा और दूसरी जरूरी सुविधाओं का इंतजाम सुनिश्चित किया जा सकेगा।

अब गोवंश पकड़े जाने के बाद उनके भरण-पोषण के लिए अलग से राशि स्वीकृत होने का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। खासकर धनबाद जैसे जिलों के लिए यह पहल बेहद महत्वपूर्ण है, जहां से गोवंश की तस्करी की घटनाएं सामने आती रहती हैं और बड़ी संख्या में पशुओं को पकड़कर गौशालाओं में रखना पड़ता है।

झारखंड में कुल 23 निबंधित गौशालाएं हैं। इनमें दो धनबाद जिले में संचालित हैं। पहली श्री झरिया धनबाद गोशाला, बास्ताकोला (झरिया) और दूसरी श्री गंगा गोशाला, कतरास (काकोमाथ) है। दोनों जगह अक्सर गोवंश पकड़ाने के बाद लाए जाते हैं।

आपात स्थिति में तत्काल मिलेगी मदद

झारखंड गौ सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष राजीव रंजन प्रसाद ने बताया कि गौ सेवा आयोग की स्थापना करीब 17 वर्ष पूर्व हुई थी।

लगातार प्रयासों के बाद राज्य के सभी 24 जिलों में 20-20 लाख रुपये के कॉर्पस फंड की व्यवस्था कराई गई है। पहले फंड के अभाव में पकड़े गए गोवंश के लिए चारा-पानी और दूसरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में प्रशासन को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब इस व्यवस्था से आपात स्थिति में तत्काल मदद मिल सकेगी।

धनबाद में दो महीने में 200 से अधिक गोवंश पकड़े गए

धनबाद के लिए इस फंड की उपयोगिता इसलिए भी अधिक है, क्योंकि जीटी रोड के रास्ते गोवंश की तस्करी की घटनाएं सामने आती रही हैं।

तस्करी के दौरान पकड़े गए पशुओं को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी गौशालाओं पर आती है। श्री गंगा गोशाला, कतरास के अनुसार, बीते दो महीने में अकेले उनकी गोशाला में 150 से अधिक गोवंश लाए गए।

24 अगस्त को एक कंटेनर से 48 गोवंश पकड़े गए, जिनमें चार मृत मिले। 24 अक्टूबर को 22 गोवंश पकड़े गए, जिन्हें बाद में न्यायालय के आदेश पर छोड़ना पड़ा।

29 अक्टूबर को 38 गोवंश पकड़े गए। इसके अलावा तेतुलमारी और मैथन टोल प्लाजा सहित अन्य स्थानों पर भी कार्रवाई हुई।

मैथन टोल प्लाजा से 23 अक्टूबर को 28 और 28 अक्टूबर को 24 गोवंश पकड़े गए। ऐसे में ऐसे गोवंश के चारा पानी की अब बेहतर ढंग से व्यवस्था हो सकेगी।

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धनबाद में बड़े पैमाने पर गोवंश आने से उनके भरण-पोषण, चारा-पानी और इलाज का खर्च बढ़ जाता है। सरकार से सहायता मिलने की प्रक्रिया भी कई बार कठिन होती है। कारपस फंड से अब गौशालाओं को सहायता मिलने की उम्मीद जगी है।

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महेश अग्रवाल, महासचिव, श्री गंगा गोशाला, कतरास

सभी जिलों में 20 लाख के कारपस फंड की व्यवस्था करा दी गई है। इससे गोवंश की बेहतर ढंग से देखरेख हो सकेगी। तस्करी में पकड़े गए गोवंश के चारा पानी व इलाज के लिए अब परेशानी नहीं होगी।

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राजीव रंजन प्रसाद, पूर्व अध्यक्ष, झारखंड गौ सेवा आयोग

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