धनबाद में दुर्गा पूजा की धूम: कहीं 1 लाख पौधों से बना इको-फ्रेंडली पंडाल तो कहीं दिखेगा 'गुपचुप का संसार'
धनबाद में दुर्गोत्सव के लिए आकर्षक पूजा पंडाल तैयार हैं, जो कला, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं।

एक लाख पौधों से सजा धनसार का पंडाल। (जागरण)
HighLights
सरायढेला में तीन विशाल मोर और आदिवासी जीवनशैली की झलक।
झारखंड मैदान में अंडमान-निकोबार के आदिवासी शीश महल की थीम।
धनसार में एक लाख पौधों से बना इको-फ्रेंडली दुर्गा पंडाल।
राकेश कुमार महतो, धनबाद। दुर्गोत्सव को लेकर धनबाद में आकर्षक पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए तैयार हैं। इस बार पंडालों में विविध थीम के जरिए कला, संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया जा रहा है।
सरायढेला स्टील गेट में तीन विशाल मोर के साथ आदिवासी जीवनशैली की झलक दिखेगी। झारखंड मैदान में अंडमान-निकोबार के आदिवासी शीश महल की थीम आकर्षण का केंद्र है।
न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी में आदिवासी संस्कृति और गुपचुप की अनूठी थीम देखने को मिलेगी। वहीं, धनसार में एक लाख पौधों से इको फ्रेंडली पंडाल तैयार किया गया है। भूली डी ब्लाक में कालचक्र थीम पर भव्य पंडाल बनाया गया है। कलात्मक सजावट और अनूठी परिकल्पनाओं से सजे ये पंडाल दुर्गोत्सव की रौनक बढ़ा रहे हैं।
शहर के पांच प्रमुख पंडाल
तीन आकर्षक मोरों से सजा सरायढेला का पूजा पंडाल:

सरायढेला स्टील गेट स्थित श्रीश्री दुर्गा पूजा कमेटी, सरायढेला कोला-कुसमा ग्राम पंचायत का पूजा पंडाल इस वर्ष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
मोर थीम पर आधारित पंडाल के बाहरी हिस्से में तीन विशाल और आकर्षक मोर बनाए गए हैं। वहीं, अंदर आदिवासी समाज की पारंपरिक जीवनशैली, संस्कृति और रहन-सहन को दर्शाया गया है।
समिति के संयुक्त सचिव मथुरा प्रसाद महतो ने बताया कि यहां वर्ष 1989 से दुर्गापूजा का आयोजन हो रहा है। इस बार मेदिनीपुर के कारीगरों ने बांस को बारीकी से छीलकर मोर की आकृतियां तैयार की हैं। पंडाल निर्माण पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
आदिवासी शीश महल की थीम पर सजा सत्यम शिवम सुंदरम का पंडाल:

हीरापुर स्थित झारखंड मैदान में सत्यम शिवम सुंदरम दुर्गा पूजा समिति की ओर से इस वर्ष अंडमान-निकोबार के आदिवासी शीश महल की थीम पर आकर्षक पंडाल बनाया गया है।
पंडाल के अंदर और बाहर झारखंडी आदिवासी संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी। इसके निर्माण में हुगला पत्ता, बांस की पट्टी, ताड़ पत्ता, चटाई, जूट और नारियल की माला जैसी प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग किया गया है।
पंडाल में आदिवासी घर, प्रमुख त्योहार, पारंपरिक लोकनृत्य और जीवनशैली को दर्शाया गया है। समिति की मीडिया प्रभारी विकास साव ने बताया कि पंडाल निर्माण पर करीब 14 लाख रुपये खर्च किए गए हैं।
बाहर आदिवासी संस्कृति, अंदर दिखेगा गुपचुप का संसार:

न्यू स्टेशन रेलवे कॉलोनी स्थित श्रीश्री दुर्गा पूजा समिति की ओर से इस वर्ष टू-इन-वन थीम पर आकर्षक पूजा पंडाल तैयार किया जा रहा है।
पंडाल के बाहरी हिस्से में आदिवासी संस्कृति की झलक दिखेगी, जबकि अंदर गुपचुप की थीम श्रद्धालुओं को आकर्षित करेगी।
समिति के महासचिव मुनेश्वर सिंह उर्फ मुन्ना ने बताया कि पंडाल को अनोखा और आकर्षक बनाने के लिए विशेष सजावट की जा रही है। बंगाल के कारीगर पंडाल का निर्माण कर रहे हैं। इस पर करीब साढ़े सात लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
एक लाख पौधों से सजा धनसार का दुर्गा पूजा पंडाल:

धनसार स्थित लक्ष्मी नारायण विद्या मंदिर परिसर में इस वर्ष पर्यावरण संरक्षण की थीम पर इको फ्रेंडली दुर्गा पूजा पंडाल बनाया गया है।
करीब एक लाख पौधों से सजे पंडाल में एरेका पाम, तुलसी, मनी प्लांट, स्नेक प्लांट और स्पाइडर प्लांट लगाए गए हैं। 50 फीट ऊंचे पंडाल के बाहरी हिस्से में भगवान जगन्नाथ की आकृति बनाई गई है, जिसके निर्माण में 40 हजार बांस के टुकड़ों का उपयोग होगा।
पंडाल में प्लास्टिक और कपड़े का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। लल्लू मालाकार पंडाल और दुलाल पाल मां दुर्गा की प्रतिमा बना रहे हैं। इस वर्ष पूजा का बजट करीब 17 लाख रुपये है।
कालचक्र थीम पर सजा भूली डी ब्लॉक का दुर्गा पूजा पंडाल:

भूली डी ब्लॉक स्थित अस्पताल ग्राउंड में इस वर्ष कालचक्र थीम पर भव्य दुर्गा पूजा पंडाल बनाया गया है। 55 फीट चौड़े और 45 फीट ऊंचे पंडाल का निर्माण बांस और लोहे की राड से किया गया है।
फोम, फाइबर और प्लाईवुड पर नक्काशीदार कलाकृतियों से इसे आकर्षक रूप दिया गया है। पंडाल के दोनों ओर दो विशाल उल्लू और बीच में हाथ फैलाए परी की आकृति श्रद्धालुओं का स्वागत करती नजर आ रही है।
यहां दुर्गापूजा की शुरुआत 1978 में हुई थी। समिति के अनुसार, इस वर्ष पूजा का कुल बजट करीब 5.50 लाख रुपये है।
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