सपना था वर्दी पहन देशसेवा का, UPSC CAPF पास कर ऋषभ ने बढ़ाया धनबाद का मान; अब BSF में संभालेंगे मोर्चा
Central Armed Police Forces: धनबाद के सुदामडीह निवासी ऋषभ कुमार ने 24 साल की उम्र में यूपीएससी सीएपीएफ परीक्षा पास कर बीएसएफ में सहायक कमांडेंट का पद हासिल किया है।

सुदामडीह रिवर साइड निवासी ऋषभ कुमार। (फाइल फोटो)
HighLights
ऋषभ कुमार ने 24 साल में यूपीएससी सीएपीएफ पास की।
बीएसएफ में सहायक कमांडेंट के पद पर चयन हुआ।
इंजीनियरिंग छोड़कर देशसेवा का सपना पूरा किया।
संवाद सूत्र, चासनाला (धनबाद)। कभी देश की वर्दी पहनकर सीमा की हिफाजत करने का सपना देखने वाले झारखंड के धनबाद जिले के सुदामडीह रिवर साइड के ऋषभ कुमार ने उस सपने की ओर पहला बड़ा कदम बढ़ा दिया है। महज 24 साल की उम्र में अपनी मेहनत, लगन और देशसेवा के जुनून के दम पर ऋषभ ने यूपीएससी की केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) परीक्षा-2024 Central Armed Police Forces (CAPF) में सफलता हासिल की है।
अब उनका चयन सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में सहायक कमांडेंट के पद पर हुआ है। आगामी 21 सितंबर को ग्वालियर के टेकनपुर में उन्हें योगदान देना है। ऋषभ की इस उपलब्धि से न सिर्फ उनका परिवार, बल्कि पूरा सुदामडीह गर्व और खुशी से झूम उठा है।
इंजीनियरिंग का रास्ता छोड़ चुनी वर्दी
ऋषभ ने वर्ष 2018 में डिनोबली स्कूल डिगवाडीह से मैट्रिक की परीक्षा 88.9 प्रतिशत अंक के साथ उत्तीर्ण की। वर्ष 2020 में सरस्वती विद्या मंदिर सिंदरी से विज्ञान संकाय में इंटर की परीक्षा में 94.8 प्रतिशत अंक के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया।
इसी दौरान जेईई मेन में बेहतर परसेंटाइल हासिल किया। जिससे उनके लिए इंजीनियरिंग का रास्ता खुल गया था। लेकिन वर्दी पहनने का जुनून व देशसेवा की चाहत ने उन्हें इंजीनियरिंग की राह छोड़ने के लिए प्रेरित किया। 2023 में पीके राय कालेज धनबाद से राजनीतिक विज्ञान में स्नातक में प्रथम स्थान प्राप्त किया।
वर्ष 2024 में उन्होंने यूपीएससी की सीएपीएफ व सीडीएस दोनों परीक्षाएं दी और दोनों में सफलता हासिल की। सीडीएस का परिणाम 10 दिसंबर 2024 को आया। जिसमें उन्हें भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में लेफ्टिनेंट पद का आफर भी मिला था।
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ऋषभ के पिता विश्वनाथ ठाकुर बीसीसीएल सुदामडीह कोल वाशरी में फोरमैन के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। मां मंजू ठाकुर गृहिणी हैं। परिवार में चार बड़ी बहनें राजलक्ष्मी, राजप्रिया, राजदुलारी, आस्था है। पैतृक गांव बिहार के दरभंगा जिले के हनुमान नगर, थाना सिंहवारा में है।
परिवार को दिया सफलता का श्रेय
ऋषभ ने अपनी सफलता का श्रेय पिता समेत पूरे परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि पिता ने हर कदम पर उनका साथ दिया। परिवार के सहयोग से ही वह अपने लक्ष्य तक पहुंच सके। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि अगर आपको पता है कि अपना लक्ष्य क्यों पाना है, तो फिर लक्ष्य कैसे पाना है यह रास्ता आप खुद खोज लेंगे।
