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गंगा से राजमहल की पहाड़ियों तक प्रकृति की विरासत का होगा अध्ययन, अनछुए वैज्ञानिक रहस्यों से उठेगा पर्दा

Published: Mon, 24 Aug 2026 02:45 PM (IST)

Rajmahal Hills Geo diversity Project: झारखंड सरकार ने राजमहल पहाड़ियों और गंगा नदी प्रणाली की भू-विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन के लिए 'जियो-राजमहल' परियोजना को मंजूरी दी है।

राजमहल की पहाड़ियों और गंगा नदी तंत्र का होगा वैज्ञानिक अध्ययन। (प्रतीकात्मक फोटो)

राजमहल की पहाड़ियों और गंगा नदी तंत्र का होगा वैज्ञानिक अध्ययन। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. झारखंड सरकार ने 'जियो-राजमहल' परियोजना को दी मंजूरी।

  2. राजमहल पहाड़ियों और गंगा नदी प्रणाली का होगा वैज्ञानिक अध्ययन।

  3. आईआईटी धनबाद और साहिबगंज कॉलेज मिलकर करेंगे शोध कार्य।

जागरण संवाददाता, साहिबगंज। Rajmahal Hills Geo diversity Project:  झारखंड सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तहत झारखंड विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार परिषद ने राजमहल पहाड़ियों और गंगा नदी प्रणाली से जुड़े पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र की भू-विविधता के वैज्ञानिक अध्ययन एवं मूल्यांकन के लिए जियो-राजमहल नामक शोध परियोजना को मंजूरी प्रदान की है।

36 महीने चलेगी जियो-राजमहल परियोजना

यह परियोजना राजमहल की पहाड़ियों, गंगा नदी प्रणाली, जैव विविधता, जीवाश्म संपदा तथा पुरातात्विक विरासत के विभिन्न पहलुओं का व्यवस्थित एवं वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण करेगी। परियोजना को 36 महीनों की अवधि में चरणबद्ध रूप से क्रियान्वित किया जाएगा।

IIT (ISM) धनबाद के प्रो. दीपक झा करेंगे नेतृत्व

परियोजना के प्रधान अन्वेषक आइआइटी (आइएसएम) धनबाद के अनुप्रयुक्त भूविज्ञान विभाग के प्रो. दीपक कुमार झा जबकि सह-प्रधान अन्वेषक साहिबगंज कालेज के प्राचार्य डा. रणजीत कुमार सिंह हैं। परियोजना में भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण रांची की वरिष्ठ भूवैज्ञानिक श्रेया श्रेय का भी महत्वपूर्ण सहयोग शामिल हैं।

वह आइआइटी (आइएसएम) धनबाद में प्रो. झा के मार्गदर्शन में अंशकालिक पीएचडी शोधार्थी भी हैं। डा. रंजीत सिंह लंबे समय से राजमहल पहाड़ियों की भूगर्भीय विरासत, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता तथा स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण एवं वैज्ञानिक अध्ययन के क्षेत्र में सक्रिय रहे हैं।

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उन्होंने राजमहल क्षेत्र की भू-विरासत और पर्यावरणीय महत्व से संबंधित विषयों पर अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों का लेखन किया है, जिनमें से कई शोध पत्र प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं तथा अन्य शोध प्रकाशनाधीन हैं। उनका यह शोध एवं वैज्ञानिक अनुभव ‘जियो-राजमहल’ परियोजना के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने दी है मान्यता

साहिबगंज जिले के मंडरो प्रखंड में जीवाश्मों की विविधता और संख्या को देखते हुए भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने वर्ष 2014 में मंडरो को भू-विरासत स्थल के रूप में मान्यता दी थी। इन दुर्लभ जीवाश्मों के संरक्षण के उद्देश्य से झारखंड सरकार के वन विभाग द्वारा वर्ष 2022 में मंडरो में फासिल्स पार्क का निर्माण भी कराया गया।

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