SNMMCH Dhanbad: न दवा मिली, न इलाज, अस्पताल से भागा संदिग्ध जापानी इंसेफेलाइटिस मरीज
धनबाद के एसएनएमएमसीएच में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) के संदिग्ध मरीज को इलाज न मिलने पर परिजन अस्पताल से ले गए, ...और पढ़ें

तेलमच्चो में प्रभावित क्षेत्र के लोगों से बातचीत करती स्वास्थ्य विभाग की टीम। (फोटो जागरण)
HighLights
संदिग्ध जेई मरीज को एसएनएमएमसीएच से बिना इलाज ले गए परिजन।
एक बच्चे की जेई से मौत, अस्पताल में इलाज और रिपोर्ट में देरी।
स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद 20 बच्चों को जेई टीका नहीं।
जागरण संवाददाता, धनबाद। स्वास्थ्य विभाग जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की इलाज और निगरानी का दावा करता है तो दूसरी ओर पीड़ित मरीज मिलने के बाद उदासीन बन जाता है। ऐसा ही मामला मंगलवार को एसएनएमएमसीएच में देखने मिला।
यहां जापानी इंसेफेलाइटिस के संदिग्ध मरीज आठ वर्षीय लखी कुमारी को उनके घर वाले अस्पताल से बिना बताए लेकर चले गए। सोमवार को ही बाघमारा स्वास्थ्य केंद्र के डाक्टरों ने बच्ची को इलाज के लिए एसएनएमएमसीएच भेजा था।
सुबह में जब एसएनएमएमसीएच स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची, तो पता चला बच्ची को लेकर उसके घर वाले चले गए हैं। इसके बाद सिविल सर्जन के निर्देश पर एक टीम तेलमच्चों जाकर बच्ची के घर से उसका रक्त का नमूना लिया। अब बुधवार को बच्ची के रक्त नमूने की जांच के बाद जापानी इंसेफेलाइटिस की रिपोर्ट आएगी।
इधर, मंगलवार को स्टेट सर्विलांस की टीम तेलमच्चो पहुंचकर मृतक कन्हाई तुरी के बारे में उनके स्वजनों ने जानकारी ली। आसपास गंदगी, सुअर व मुर्गी पालन के स्थान को भी देखा। इसकी रिपोर्ट मुख्यालय की दी जाएगी। साथ में जिला वीबीडी सलाहकार रमेश कुमार सिंह थे।
अभिभावक ने कहा, कोई देखने वाला नहीं था अस्पताल में
लखी कुमारी के पिता रंजीत तुरी ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बाद बच्ची को देखने के लिए ना कोई
डाक्टर पहुंचा, ना ही कोई कर्मचारी। अस्पताल में दवा भी उपलब्ध नहीं था।
ऐसे में बच्ची को अस्पताल में रखना परेशानी हो रही था। मजबूरी में बच्ची को उठाकर सभी लोग घर लेकर चले आए। रंजीत ने स्वास्थ्य विभाग की टीम को कहा कि जब इलाज की व्यवस्था ठीक नहीं है, तो आखिर अस्पताल में क्यों भर्ती कराया गया।
मौत के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की उदासीन रवैया
पिथले दिनों बस्ती के रहने वाले 12 वर्षीय कन्हाई तुरी बच्चे की मौत जेई से हो गई थी। चार दिनों तक एसएनएमएमसीएच में भर्ती रहने के बाद बच्चे की जान चली गई थी।
लापरवाही की हद इतनी की बच्चे की जेई रिपोर्ट मौत के एक दिन बाद आई। अब तेमच्चों में लगभग 20 बच्चों को चिन्हित किया गया है, जिन्हें जेई का टीका नहीं लगा है। उसके बाद भी विभाग का रवैया उदासीन बना हुआ है।
एक तरफ 100 प्रतिशत टीकाकरण, दूसरे तरफ खुल रही पोल
स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि जापानी इंसेफेलाइटिस समेत अन्य टीकाकरण जिले में लगभग 100 प्रतिशत हो रहा है। तो दूसरी और स्वास्थ्य विभाग की टीम जब धरातल पर पहुंची तो पता चला कि दिल माचो गांव में रहने वाले दर्जनों बच्चों को जापानी इंसेफेलाइटिस का टीका लगा ही नहीं है। ऐसे में विभाग के कार्य पर भी सवाल उठ रहे हैं।
बच्ची की निगरानी के लिए टीम भेजी गई है। जिन बच्चों को जेई का टीका नहीं लगा है, उन्हें लगाने का निर्देश दिया गया है। एसएनएमएमसीएच को भी निगरानी करने को कहा गया है।
डा. आलोक विश्वकर्मा, सीएस, धनबाद
