धनबाद के बुजुर्गों का दर्द: ₹40 में तीन वक्त का खाना और महीनों से अटकी पेंशन
International Day of Older Persons 2026: धनबाद में सैकड़ों बुजुर्ग सरकारी योजनाओं की उदासीनता और अपनों की बेरुखी के बीच ...और पढ़ें

धनबाद के साबलपुर स्थित वृद्धा आश्रम में बैठे वृद्धजन। (फोटो जागरण)
HighLights
वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों के भोजन के लिए मात्र 40 रुपये प्रतिदिन।
धनबाद में 66,475 बुजुर्ग पांच महीने से पेंशन का इंतजार कर रहे।
उपायुक्त ने 88 बेड के नए वृद्धाश्रम निर्माण की स्वीकृति ली।
रविशंकर सिंह, धनबाद। International Day of Older Persons उम्र के जिस पड़ाव पर बुजुर्गों को अपनों के सहारे और सुकून की जरूरत होती है, उस समय धनबाद में सैकड़ों बुजुर्ग सरकारी योजनाओं की उदासीनता और अपनों की बेरुखी के बीच जीवन बिताने को विवश हैं।
बुजुर्गों के सम्मान, अधिकार और बेहतर जीवन उपलब्ध कराने के सरकारी दावे धनबाद के ओल्ड एज होम से लेकर हजारों वृद्धों के बीच दम तोड़ रहे हैं।
महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग की ओर से जिले में संचालित हो रहे एकमात्र वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के खान पान से लेकर रहने के इंतजाम भी जैसे हो रहे हैं। सब कुछ जाने के बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे हैं।
तीन वक्त के भोजन के लिए महज 40 रुपये
धनबाद के साबलपुर सेक्टर-3 स्थित महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग से संबद्ध ओल्ड एज होम में वर्तमान में 28 बुजुर्ग रह रहे हैं। देखरेख करने वाले कर्मचारियों समेत यहां कुल 32 लोग हैं।
बुजुर्गों के तीन वक्त के भोजन के लिए सरकार की ओर से महज 40 रुपये प्रतिदिन प्रति व्यक्ति दिए जाते हैं। वहीं संस्था को कर्मचारी और सफाईकर्मी के लिए 1300 रुपये तथा बुजुर्गों के भोजन बनाने के लिए कुक खातिर महज 2600 रुपये प्रतिमाह की राशि का प्रविधान संचालक के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है।
इतनी कम राशि में बुजुर्गों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना संस्था के लिए बड़ी चुनौती है। संचालक के अनुसार लोगों के सहयोग से जन्मदिन, पुण्यतिथि या अन्य अवसर पर मिलने वाली मदद से काम चल रहा है।
अपनों ने छोड़ा, अब यही परिवार
साबलपुर के वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की कहानियां सरकारी आंकड़ों से कहीं ज्यादा मार्मिक हैं। झरिया की रहने वाली विमला देवी पिछले करीब 13 वर्षों से यहां रह रही हैं।
उनके तीन बेटे हैं। दुर्घटना के बाद उन्हें यहां छोड़ दिया गया। समय बीतता गया, लेकिन परिवार से कोई उन्हें वापस लेने नहीं आया। अब विमला देवी ही यहां रहने वाले दूसरे बुजुर्गों का सहारा बनी हुई हैं। वह भजन सुनाती हैं, फिल्मी गीत गाती हैं और साथी बुजुर्गों के बीच जिंदगी जीने का हौसला भरती हैं।
धोबाटांड़ की शांति देवी भी करीब 13 वर्षों से वृद्धाश्रम में हैं। उनकी दो बेटियां हैं, लेकिन अब कोई उन्हें देखने नहीं आता। 90 वर्षीय कमली देवी की भी कुछ ऐसी ही कहानी है। बेटा होने के बावजूद उनका जीवन वृद्धाश्रम में गुजर रहा है।
मां बाप को छोड़कर चले जाते हैं लोग
वर्ष 2006 से लालमणि वृद्धा सेवाश्रम के संचालक नौशाद गद्दी के अनुसार कई बार लोग बुजुर्गों की पहचान छिपाने के लिए उनके आधार कार्ड में बदलाव तक कराकर उन्हें वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं। इसके बाद परिजन दोबारा उनकी सुध नहीं लेते।
कई अपने मां बाप को दाई बताकर वृद्धाश्रम में छोड़ जाते हैं। वहीं, बरवाअड्डा स्थित ओल्ड एज होम में भी बुजुर्गों की कहानियां बेहद मार्मिक हैं। बीसीसीएल के सेवानिवृत्त अधिकारी अजीत चक्रवर्ती और सेवानिवृत्त शिक्षक मनमोहन दास भी इसी वृद्धाश्रम में रह रहे हैं।
अजीत चक्रवर्ती ने अपने जीवन में पत्नी और बेटे को खो दिया। अब बहू भी साथ नहीं है और जीवन का शेष समय वृद्धाश्रम में गुजर रहा है।
66,475 बुजुर्ग पांच महीने से पेंशन के इंतजार में
वृद्धाश्रमों की यह तस्वीर अकेली चिंता नहीं है। धनबाद जिले में 66,475 बुजुर्ग पिछले पांच महीने से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना की राशि का इंतजार कर रहे हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार रांची स्तर पर संबंधित साफ्टवेयर के रखरखाव के कारण भुगतान प्रभावित हुआ है।
नतीजा यह है कि वृद्धावस्था में नियमित आर्थिक सहारे की उम्मीद लगाए बैठे हजारों बुजुर्गों को महीनों से राशि नहीं मिली है। हालांकि, दूसरी ओर राज्य सरकार की मुख्यमंत्री वृद्धजन योजना के तहत दो लाख पांच हजार 65 वृद्धों को नियमित पेंशन मिल रही है।
ओल्ड एज होम में अब रह सकेंगे 88 बुजुर्ग
उपायुक्त आदित्य रंजन ने बताया कि साबलपुर में चल रहे ओल्ड एज होम में फिलहाल 35 बुजुर्गों के ही रहने की क्षमता है। लेकिन उन्होंने राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजकर 88 बेड के ओल्ड एज होम बनाने की स्वीकृति ले ली है।
भवन के लिए करीब दो करोड़ खर्च होंगे। भवन के निर्माण को लेकर टेंडर की प्रक्रिया जारी है।
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केंद्र से बुजुर्गों काे मिलने वाला पेंशन ऊपर से ही लंबित हैं। हमने अपने स्तर पर भुगतान के लिए सरकार को पत्र भेजा है। धनबाद में जल्द ही 88 बेड के ओल्ड एज होम का निर्माण शुरू होगा। वृद्धाश्रम में रहने वालों के लिए खाने के मद में मिलने वाला पैसा सरकार से ही निर्धारित है। हमारी कोशिश है कि ठीक से बुजुर्गों को सुविधा मिले।
