Coal India: लगातार घट रही नौकरियां, 51 साल में 7.50 लाख से घटकर 2.08 लाख हुआ श्रमबल
Coal India Workforce:कोल इंडिया में राष्ट्रीयकरण के बाद से कर्मचारियों की संख्या में भारी कमी आई है, जबकि कोयला उत्पादन ...और पढ़ें

कोयला खदान से कोयला निकालते मजदूर। (प्रतीकात्मक फोटो)
HighLights
कोल इंडिया का श्रमबल 7 लाख से घटकर 2.14 लाख हुआ।
उत्पादन बढ़ने के बावजूद स्थायी नियुक्तियों में कमी आई।
आउटसोर्सिंग से ठेका मजदूरों पर निर्भरता बढ़ी, सामाजिक सुरक्षा प्रभावित।
मृत्युंजय पाठक, धनबाद। Coal India Employees Workforce Falls: भारत में रोजगार देने के मामले में कभी सेना (Indian Army) और रेलवे (Indian Railway) के बाद कोल इंडिया (Coal India) तीसरा सबसे बड़ा संस्थान था। सूचीबद्ध सरकारी कंपनियों में तो कोल इंडिया सबसे बड़ी कंपनी है। हालांकि कोल इंडिया में नाौकरियां बहुत तेजी से घट रही हैं।
1975 में कोयला उद्योग के राष्ट्रीयकरण के समय कोल इंडिया में करीब 7.50 लाख कर्मचारी थे। आज यह संख्या घटकर करीब 2.08 लाख रह गई है। यानी राष्ट्रीयकरण के बाद कंपनी के स्थायी श्रमबल में करीब तीन-चौथाई की कमी आई है।
कोल इंडिया की 14 सितंबर 2026 को जारी अगस्त 2026 की श्रमबल सारांश रिपोर्ट के अनुसार, 1 सितंबर तक कंपनी का कुल श्रमबल 2,08,616 रह गया है। वहीं, दूसरी ओर कोल इंडिया का कोयला उत्पादन लगातार बढ़ रहा है।
चालू वित्त वर्ष की शुरुआत में कंपनी के कर्मचारियों की संख्या 2,12,066 थी। इस तरह पांच महीने में ही श्रमबल में 3,450 की कमी आई है। इस दौरान ECL में सबसे अधिक 1,045, SECL में 754 और BCCL में 620 कर्मचारियों की संख्या घटी है।
उत्पादन बढ़ा, कर्मचारियों की संख्या घटी
कोल इंडिया के गठन के समय 1975 में कंपनी का उत्पादन करीब 79 मिलियन टन (एमटी) था और कर्मचारियों की संख्या 7.50 लाख थी। आज कंपनी का उत्पादन लक्ष्य 814 एमटी है, जबकि स्थायी मानवबल घटकर 2.08 लाख रह गया है।
वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 की बात कर करें तो 17 सितंबर 2026 तक Coal India Ltd (CIL) का संचयी कोयला उत्पादन 297.07 मिलियन टन (MT) रहा है। इसका वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 814.85 MT है।
अब कोल इंडिया का उत्पादन ठेकेदारों पर निर्भर
श्रमबल में कमी की प्रमुख वजह नई स्थायी नियुक्तियों में कमी, कर्मचारियों की लगातार सेवानिवृत्ति, मशीनीकरण और ऑटोमेशन के साथ उत्पादन में आउटसोर्सिंग कंपनियों पर बढ़ती निर्भरता को माना जा रहा है।
कोल इंडिया में खनिकों की नई नियुक्तियां सीमित हैं, जबकि बड़ी संख्या में कर्मचारी हर साल सेवानिवृत्त हो रहे हैं। वर्तमान में स्थायी नियुक्तियां मुख्य रूप से डेथ केस, अनुकंपा और जमीन के बदले नौकरी जैसे मामलों तक सीमित हैं।
ठेका मजदूरों की बढ़ रही संख्या
कोल इंडिया उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग कंपनियों की सेवाएं ले रही है। इससे ठेका मजदूरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। श्रमिक संगठनों के अनुसार, इनकी संख्या अघोषित रूप से करीब चार लाख तक पहुंच चुकी है।
स्थायी और ठेका श्रमिकों के वेतन तथा सुविधाओं में बड़ा अंतर है। कोल इंडिया के एक स्थायी कर्मचारी का वेतनमान जहां करीब एक लाख रुपये तक हो सकता है, वहीं समान प्रकृति का काम करने वाले आउटसोर्सिंग श्रमिकों को करीब 25 से 30 हजार रुपये मिलते हैं। श्रमिक संगठनों का आरोप है कि इससे कंपनी को श्रम लागत कम रखने में मदद मिलती है, लेकिन स्थायी रोजगार के अवसर लगातार घट रहे हैं।
स्थानीय रोजगार पर असर
उत्पादन बढ़ने के बावजूद स्थायी रोजगार में लगातार कमी का असर कोयलांचल के स्थानीय रोजगार पर भी पड़ रहा है। कोयला उत्पादन में ठेका श्रमिकों की हिस्सेदारी बढ़ने से स्थायी नौकरी के अवसर कम हो रहे हैं। इससे कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
नई नियुक्तियां न होना चिंताजनक
भारतीय मजदूर संघ के नेता बिंदेश्वरी प्रसाद कहते हैं कि कोल इंडिया में नियमित मजदूरों की नियुक्ति नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि फिलहाल डेथ केस, अनुकंपा और जमीन के बदले नौकरी जैसे मामलों में ही नियुक्तियां हो रही हैं। इससे कर्मचारियों की संख्या लगातार घट रही है।
उनका कहना है कि नई नियुक्तियां नहीं होना चिंता का विषय है। उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रबंधन आउटसोर्सिंग कंपनियों पर अधिक निर्भर हो गया है। इससे कंपनी के खर्च में कमी तो हो सकती है, लेकिन स्थायी रोजगार और श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में कोल इंडिया के स्थायी कर्मचारियों की संख्या और घट सकती है और उत्पादन में ठेका मजदूरों पर निर्भरता बढ़ सकती है।
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