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सेल-बीसीसीएल समझौते से घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन में होगी वृद्धि, दो ब्लॉकों का होगा संयुक्त विकास

Published: Sat, 26 Sep 2026 02:44 PM (IST)

भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए ...और पढ़ें

MOU के मौके पर उपस्थित सेल और बीसीसीएल के अधिकारी। (फोटो सौजन्य)

MOU के मौके पर उपस्थित सेल और बीसीसीएल के अधिकारी। (फोटो सौजन्य)

HighLights

  1. बीसीसीएल और सेल ने कोकिंग कोयला उत्पादन हेतु एमओयू किया।

  2. पश्चिम बंगाल में दो कोयला ब्लॉकों का संयुक्त विकास होगा।

  3. इससे इस्पात उद्योग को घरेलू कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ेगी।

जागरण संवाददाता, धनबाद। देश में घरेलू कोकिंग कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (‍BCCL) और स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने महत्वपूर्ण पहल की है।

दोनों कंपनियों ने पश्चिम बंगाल स्थित दो कोयला ब्लॉकों के संयुक्त विकास और संचालन के लिए शुक्रवार को समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इस पहल से कोकिंग कोयले के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलने के साथ भारतीय इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल की उपलब्धता मजबूत होने की उम्मीद है।

एमओयू के तहत सेल के इंडिकट्टा रामनगोर कोयला ब्लॉक और बीसीसीएल के ईस्ट ऑफ दामागोरिया (कल्याणेश्वरी) कोयला ब्लॉक का संयुक्त रूप से विकास और संचालन किया जाएगा।

दोनों ब्लॉकों की संयुक्त पीक रेटेड क्षमता (पीआरसी) चार मिलियन टन प्रतिवर्ष है। पहले चरण में करीब 79 मिलियन टन निष्कर्षणीय कोयला भंडार होने का अनुमान है।

एकीकृत खनन व्यवस्था से होगा संसाधनों का बेहतर उपयोग

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दोनों ब्लॉकों में खनन और ओवरबर्डन प्रबंधन को एकीकृत तरीके से संचालित किया जाएगा। पहले चरण में कल्याणेश्वरी ब्लॉक में खनन तथा रामनगोर ब्लॉक में ओवरबर्डन की डंपिंग की जाएगी।

दूसरे चरण में इसके विपरीत व्यवस्था अपनाई जाएगी। इससे उपलब्ध कोयला संसाधनों का समन्वित और बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।

इस्पात उद्योग को घरेलू कोकिंग कोयले की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

सेल और बीसीसीएल के बीच हुआ यह समझौता देश में कोकिंग कोयले के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इससे आयात पर निर्भरता कम करने और भारतीय इस्पात उद्योग के लिए आवश्यक कच्चे माल की घरेलू उपलब्धता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। यह पहल भारत सरकार के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप है।

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