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CJI Suryakant ने झारखंड के 'प्रोजेक्ट शिशु' को सराहा, देशभर में लागू करने की अपील

Published: Mon, 02 Nov 2026 10:40 PM (IST)

CJI Suryakant: भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने देवघर में राज्यस्तरीय विधिक सेवा शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने झालसा ...और पढ़ें

देवघर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर का उद्घाटन करते भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं अन्य अतिथि। (फोटो जागरण)

देवघर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर का उद्घाटन करते भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत एवं अन्य अतिथि। (फोटो जागरण)

संवाददाता, देवघर। झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकार (झालसा), रांची और जिला प्रशासन, देवघर के संयुक्त तत्वावधान में सिविल कोर्ट परिसर में आयोजित राज्यस्तरीय विधिक सेवा सह सशक्तीकरण शिविर का उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने किया।

इस मौके पर झारखंड में झालसा की ओर से शुरू किए गए 'प्रोजेक्ट शिशु' की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह सामाजिक बदलाव की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक है।

उन्होंने कहा कि जिन बच्चों के हालात ऐसे रहे कि वे शिक्षा ग्रहण नहीं कर सके और जिन्हें मजबूरी में बचपन में ही अपनी भूख मिटाने, जीवनयापन करने और रोजी-रोटी के लिए काम करना पड़ा, ऐसे बच्चों को शिक्षा के माध्यम से जागरूक नागरिक बनाना, उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना और समाज का अहम हिस्सा बनाना देश के लिए बहुत बड़ा योगदान है।

इसके लिए झारखंड की विधिक सेवा प्राधिकार बधाई की पात्र है। इस योजना को झारखंड में लागू करने के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान न्यायाधीश न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की विशेष रूप से चर्चा की।

उन्होंने कहा कि वह राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण से इस विशेष योजना को देश के उन अन्य राज्यों में भी लागू करने की अपील करेंगे, जहां अभी तक इसे शुरू नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की भी खुशी है कि लीगल एड के छोटे-छोटे क्लीनिक कानूनी अधिकारों के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। ऐसे क्लीनिक दूर-दराज के क्षेत्रों में खोले गए हैं। इनकी संख्या और बढ़ाने की जरूरत है। लोगों तक पहुंचने की दिशा में यह एक ठोस कदम है। जरूरी है कि झालसा ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन करती रहे।

उन्होंने कहा कि दूर-दराज के गांवों और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में, जहां आवागमन के साधन उपलब्ध नहीं हैं और शिक्षा का अभाव है, वहां शिक्षा की रोशनी पहुंचने से पहले लीगल वालंटियर पहुंचें। वे लोगों को उनके कानूनी अधिकारों से अवगत कराएं।

अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए उन्हें जागरूक करने में लीगल वालंटियर की बहुत बड़ी भूमिका है। वे जरूरतमंद, गरीब और मजबूर लोगों को न्याय दिलाने में एक सूत्रधार की भूमिका निभाते हैं।

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