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पितरों के मार्गदर्शन के लिए बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर जला आकाशदीप, एक महीने तक चलेगा अनुष्ठान

Published: Thu, 05 Nov 2026 03:43 PM (IST)

बाबा बैद्यनाथ मंदिर में कार्तिक मास के दौरान सदियों पुरानी आकाशदीप जलाने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। ...और पढ़ें

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर जला आकाशदीप

बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर पर जला आकाशदीप

HighLights

  1. बाबा बैद्यनाथ मंदिर में आकाशदीप जलाने की परंपरा जारी।

  2. कार्तिक मास में पितरों के मार्गदर्शन हेतु यह अनुष्ठान।

  3. एक लाख दीपदान के बराबर पुण्य फल मिलता है।

संवाद सूत्र, देवघर। बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के अनुसार कार्तिक मास में एक माह तक आकाशदीप जलाने की परंपरा का निर्वहन किया जा रहा है। इस परंपरा के तहत बाबा मंदिर के शिखर पर और मंदिर प्रांगण स्थित तुलसी चौरा के समीप प्रतिदिन सूर्यास्त के बाद आकाशदीप प्रज्वलित किया जाता है।

इस प्राचीन परंपरा का निर्वहन बाबा मंदिर के शिखर पर भंडारी परिवार द्वारा किया जाता है, जबकि तुलसी चौरा के समीप आकाशदीप जलाने की जिम्मेदारी सिकदार परिवार निभाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास में आकाशदीप दान का विशेष महत्व है।

परंपरा लगातार एक महीने तक चलेगी 

स्टेट पुरोहित श्रीनाथ महाराज ने बताया कि बीते 18 अक्टूबर रविवार को दिन के 10:24 बजे सूर्यदेव तुला राशि में प्रवेश हुआ है। इस अवसर पर संक्रमण का पुण्यकाल सूर्यास्त तक रहेगा। 

कार्तिक मास की संध्या बेला में बाबा बैद्यनाथ मंदिर के शिखर एवं मंदिर प्रांगण स्थित तुलसी चौरा पर आकाशदीप दान का शुभारंभ किया जा रहा है । यह धार्मिक परंपरा लगातार एक महीने तक चलेगी और 16 नवंबर को संपन्न होगी।

एक लाख दीपदान के बराबर पुण्य

उन्होंने बताया कि आकाशदीप दान के दौरान विशेष मंत्र का जाप किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कार्तिक मास में आकाशदीप दान करने से एक लाख दीपदान के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है तथा व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है। 

इसी आस्था और परंपरा के साथ बाबा मंदिर में आज भी यह प्राचीन धार्मिक अनुष्ठान पूरी श्रद्धा से निभाया जा रहा है। पुराण और ग्रंथ में इसका जिक्र है की पितृ पक्ष में आए हुए पितरों को मार्ग दिखाने के लिए भी आकाशदीप जलाया जाता है। क्योंकि पितृ पक्ष में धरती पर आए हुए पितृ दीपावली के दिन अपने लोक लौट जाते हैं।

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