'गांव को पूजना होगा तभी प्रकृति बचेगी', देवघर में बोले पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, गांधी का किया जिक्र
पर्यावरणविद डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने देवघर में कहा कि प्रकृति को बचाने के लिए गांवों को पूजना होगा, क्योंकि हवा, मिट्टी और पानी का स्रोत गांव ही हैं।

जनकपुर से उत्तराखंड तक साइकिल यात्रा पर निकले पद्म भूषण डॉ. अनिल जोशी। (जागरण)
HighLights
गांवों को पूजना प्रकृति संरक्षण के लिए आवश्यक।
गांधी के ग्राम विकास विचारों में पर्यावरणीय समाधान।
ग्लोबल वार्मिंग से मौसम परिवर्तन, नेपाल बाढ़ उदाहरण।
जागरण संवाददाता, देवघर। नेपाल के जनकपुर से उत्तराखंड की साइकिल यात्रा पर निकले पर्यावरणविद पद्मश्री, पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी का देवघर में जोरदार स्वागत हुआ।
सोमवार को देवघर में प्रवाह संस्था के सहयोग से आयोजित बढ़ते पर्यावरणीय संकट और हमारे भविष्य पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते पद्म भूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि गांव को पूजना होगा तभी प्रकृति बचेगी, क्योंकि हवा, मिट्टी, पानी गांव से पनपती है।
'फिर पैदा होंगे गांधी'
उन्होंने कहा कि गांधी एक बार फिर पैदा होंगे क्योंकि उनकी एक ही कल्पना थी कि गांव विकास की एक इकाई होनी चाहिए। जबकि आज शहर का विकास हुआ और गांव सिकुड़ता चला गया।
उन्होंने जोर देकर कहा कि दुख इस बात की है कि लोग आज भी गांधी को नहीं समझ पाए हैं। अभी भी गांधी के विचारों को समझ लें तो सारा कष्ट दूर हो जाएगा।
देवघर की धरा से दुनिया वालों को बताया कि पर्यावरणीय संकट का उत्तर गांव में छिपा हुआ है। इसलिए गांव को जोड़ना होगा उसे छोड़ना नहीं होगा।
डॉ. अनिल ने नेपाल में दूसरी बार आए आपदा की ओर इशारा करते कहा कि अक्टूबर महीने में बाढ़ आना, इस बात का साफ संकेत है कि मौसम बदल गया है। पूरा साल एक समान होगा। कब वर्षा हो जाए किसी को नहीं पता। इसका सबसे बड़ा कारण ग्लोबल वार्मिंग है।
कार्यक्रम के बाद अपने जत्था के साथ बिहार के सिमुलतला के लिए साइकिल से निकल गए।
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