एक स्मार्टफोन ने बदल दी चतरा की पुनीता की जिंदगी, खुद ग्रेजुएट बनीं और 300 महिलाओं को भी सिखाया हुनर
पुनीता देवी ने स्मार्टफोन सीखकर 300 महिलाओं को डिजिटल साक्षर बनाया। उन्होंने इंटरनेट से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और धान कूटने की मशीन से स्वरोजगार शुरू किया।

चतरा की पुनीता देवी ने स्मार्टफोन से बदली अपनी जिंदगी। जागरण
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चतरा की पुनीता देवी ने स्मार्टफोन से बदली अपनी जिंदगी।
छह महीने में 300 महिलाओं और लड़कियों को बनाया डिजिटल साक्षर।
इंटरनेट की मदद से पूरी की ग्रेजुएशन, खरीदी धान कूटने की मशीन।
जुलकर नैन, चतरा। हुनर सीखने की ललक, कुछ नया करने का जज्बा और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प हो, तो सीमित संसाधन भी सफलता की राह नहीं रोक सकते। इसकी मिसाल हैं लावालौंग प्रखंड की कटिया पंचायत अंतर्गत रुगुद गांव की रहनेवाली पुनीता देवी। कभी स्मार्ट फोन चलाना भी उनके लिए नई बात थी, लेकिन आज वही डिजिटल तकनीक उनके लिए शिक्षा, स्वरोजगार और आत्मसम्मान का माध्यम बन गई है।
पुनीता की यह कहानी ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों के लिए प्रेरणा बन रही है। पुनीता देवी वर्ष 2018 में ग्रामोदय चेतना केंद्र से जुड़ीं। यहां डिजिटल साक्षरता कार्यक्रम के माध्यम से उन्होंने स्मार्ट फोन चलाना सीखा। इंटरनेट के उपयोग की जानकारी मिली, तो उनके सामने संभावनाओं की एक नई दुनिया खुल गई।
उन्होंने इस ज्ञान को केवल अपने तक सीमित नहीं रखा, बल्कि दूसरी महिलाओं और लड़कियों को भी डिजिटल तकनीक से जोड़ने का संकल्प लिया। इसका परिणाम यह हुआ कि महज छह महीने के भीतर उन्होंने 300 ग्रामीण महिलाओं और लड़कियों को स्मार्ट फोन चलाना सिखाकर डिजिटल साक्षर बनाया। गांव की महिलाओं को तकनीक से जोड़ने की उनकी यह पहल आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
उस समय पुनीता केवल मैट्रिक पास थीं। आगे पढ़ने की इच्छा थी, लेकिन उच्च शिक्षा के अवसरों की जानकारी जुटाना आसान नहीं था। डिजिटल साक्षरता ने उनकी इस राह को आसान बनाया। इंटरनेट के माध्यम से उन्होंने दूरस्थ शिक्षा के बारे में जानकारी प्राप्त की और अपनी पढ़ाई जारी रखी। दृढ़ इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर उन्होंने स्नातक की शिक्षा पूरी की।
इस तरह स्मार्ट फोन उनके लिए केवल बातचीत का साधन नहीं रहा, बल्कि शिक्षा के नए अवसरों तक पहुंचने का माध्यम बन गया। पुनीता ने साबित किया कि सही जानकारी और तकनीक का इस्तेमाल ग्रामीण परिवेश में भी आगे बढ़ने के रास्ते खोल सकता है।
डिजिटल तकनीक का उपयोग आर्थिक स्वावलंबन के लिए भी किया। इंटरनेट के माध्यम से धान कूटने की एक छोटी मशीन खरीदी और उसे अपनी आमदनी का साधन बनाया। इससे उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिला। आज वह अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आगे बढ़ रही हैं।

गांव में बदलाव की वाहक बनी
ग्रामोदय चेतना केंद्र की सचिव सविता बनर्जी कहती हैं कि पुनीता बदलाव की वाहक बनी हैं। कंप्यूटर के क्षेत्र में भी उन्होंने कौशल हासिल किया है और अब अपने ज्ञान को रोजगार में बदलने की तैयारी कर रही हैं।उसका सपना केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने तक सीमित नहीं है।
वह गांव में अपना कंप्यूटर आधारित व्यवसाय शुरू करना चाहती हैं, ताकि ग्रामीण लड़कियों को कंप्यूटर शिक्षा और डिजिटल कौशल से जोड़ा जा सके। उनका मानना है कि तकनीक का ज्ञान लड़कियों के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खोल सकता है। कभी स्मार्ट फोन चलाना सीखने से शुरू हुआ उनका सफर आज दूसरों को हुनरमंद बनाने के संकल्प तक पहुंच चुका है।
पुनीता देवी की कहानी बताती है कि डिजिटल साक्षरता केवल तकनीक सीखना नहीं, बल्कि अपने पैरों पर खड़े होने और दूसरों के जीवन में बदलाव लाने का सशक्त माध्यम भी है।
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