झारखंड में विधवा महिलाओं के पुनर्विवाह के लिए खास योजना, 2 लाख रुपये देने का प्रावधान; फिर भी आवेदन का इंतजार
झारखंड सरकार की विधवा पुनर्विवाह योजना में लाभुकों की कमी के कारण पिछले तीन वर्षों से आवंटन राशि वापस लौट ...और पढ़ें

एआई जेनरेटेड इमेज।
HighLights
विधवा पुनर्विवाह योजना को नहीं मिल रहे पर्याप्त लाभुक।
पिछले तीन वर्षों से आवंटन राशि सरकार को वापस।
चालू वित्तीय वर्ष में जिले को पुनर्विवाह के लिए चार लाभुकों का लक्ष्य मिला।
जुलकर नैन, चतरा। विधवा महिलाओं को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने तथा उन्हें पुनर्विवाह के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा संचालित योजना के लिए लाभुक नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान योजना के लिए प्राप्त आवंटन का उपयोग नहीं हो सका और राशि सरकार को वापस करनी पड़ी।
हालांकि योजना के चौथे वर्ष अर्थात चालू वित्तीय वर्ष में अब तक मात्र एक आवेदन प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार की इस योजना के तहत विधवा महिला के पुनर्विवाह पर दो लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। योजना का उद्देश्य विधवा महिलाओं को दोबारा सामान्य सामाजिक जीवन से जोड़ना और पुनर्विवाह के बाद उन्हें आर्थिक सहारा उपलब्ध कराना है। इसके बावजूद योजना के प्रति अपेक्षित संख्या में आवेदन नहीं आना चिंता का विषय बना हुआ है।
योजना के लिए जिला समाज कल्याण को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में राशि का आवंटन प्राप्त होता है। योजना की शुरूआत वित्तीय वर्ष 2023-24 में हुई है। पहले वित्तीय वर्ष में दो लाभुक का आवंटन मिला था। उसके बाद लाभुकों का लक्ष्य चार कर दिया गया। इस प्रकार प्रत्येक वर्ष आठ लाख रुपये का आवंटन मिलते आया है।
जानकारों का कहना है कि योजना की जानकारी का अभाव, सामाजिक संकोच और पुनर्विवाह को लेकर पारंपरिक सोच इसके पीछे प्रमुख कारण हो सकते हैं। ऐसे में समाज कल्याण द्वारा पंचायत और प्रखंड स्तर पर जागरूकता अभियान चलाकर योजना की जानकारी पात्र महिलाओं तक पहुंचाने की आवश्यकता है, ताकि सरकारी सहायता राशि का समुचित उपयोग हो सके और योजना का उद्देश्य भी पूरा हो।
क्या कहती है महिला समाजसेवी?
दो-तीन प्रमुख कारण हैं। योजना की जानकारी का अभाव है। चूंकि प्रखंड एवं पंचायत स्तर तक इसका प्रचार प्रसार नहीं हुआ है। दूसरी वजह आवेदन में मांगी गई जानकारी एवं साक्ष्य के रूप में प्रमाण पत्र, यह बहुत कठिन है। तीसरी वजह सामाजिक है। जिनको जानकारी है, तो वो लोकलाज के कारण आगे नहीं आ रही है। जबकि इसमें कोई लोकलाज नहीं है। शादी-विवाह सामाजिक परंपरा है। पति की मौत होने के बाद विधवा महिला को शादी में करने में किसी प्रकार का संकोच नहीं होना चाहिए।
-सविता बनर्जी, सामाजिक कार्यकर्ता, चतरा।
प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में कुछ आवेदन आए हैं। उन आवेदनों का सत्यापन कराया जा रहा है। सत्यापन के बाद लाभुक को योजना का लाभ मुहैया करा दिया जाएगा। पूरा प्रयास किया जा रहा है कि इस बार आवंटन वापस नहीं जाए। जिले के लिए कुल चार पुनर्विवाह का लक्ष्य मिला है।
-दिलीप कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, चतरा।
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