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चतरा में स्कूल ड्रेस घोटाला: 22 हजार बच्चों को नहीं मिली पोशाक, वेंडरों को कर दिया गया करोड़ों का भुगतान

Published: Thu, 02 Apr 2026 02:30 PM (IST)

चतरा जिले में सरकारी स्कूलों के बच्चों को पोशाक वितरण में बड़ी अनियमितता सामने आई है। पहली और दूसरी कक्षा ...और पढ़ें

पुरानी पोशाक पहन का स्कूल जाते बच्चे (फाइल फोटो)

पुरानी पोशाक पहन का स्कूल जाते बच्चे (फाइल फोटो)

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संक्षेप में पढ़ें

जुलकर नैन, चतरा। जिले में मार्च लूट का एक दिलचस्प मामला सामने आया है। सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत पहली और दूसरी कक्षा के बच्चों को पोशाक मिले नहीं और राशि का भुगतान विभिन्न वेंडरों के खातों में कर दिया गया है।

प्राथमिक विद्यालयों में पहली और दूसरी के बच्चों की संख्या 32,427 है। इनमें से पिछले आठ-दस दिनों में वेंडरों ने करीब दस हजार बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराया। शेष करीब 22 हजार बच्चे पोशाक से वंचित रह गए। पोशाक मद की राशि लैप्स नहीं हो जाए, इसके लिए लूट की योजना बनाई गई। चूंकि योजना मद की राशि दस-बारह दिन पूर्व आई थी। ऐसे में 31 मार्च से पूर्व खर्च करना था।

झारखंड शिक्षा परियोजना ने राशि का उपावंटन प्रखंड संसाधन केंद्रों को कर दिया था। अंतिम समय में सभी बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराना संभव नहीं था। ऐसे आठ-दस दिनों में दस हजार बच्चों को ही पोशाक मिले सका। इस प्रकार करीब 22 हजार पोशाक की राशि प्रखंड संसाधन केंद्रों ने पोशाक के लिए चिन्हित वेंडरों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।

समग्र शिक्षा अभियान के तहत प्रत्येक छात्र के लिए 600 रुपये निर्धारित हैं। इस आधार पर पोशाक मद में 1,94,56,200 रुपये का बजट था। 31 मार्च से पहले राशि खर्च दिखाने के दबाव में 30 मार्च की रात ही जल्दबाजी में पूरी योजना को अमलीजामा पहनाया गया।

प्रखंड संसाधन केंद्रों द्वारा चिन्हित वेंडरों के खातों में सीधे भुगतान कर दिया गया, जबकि वास्तविक वितरण अधूरा ही रह गया। योजना की राशि करीब 10-12 दिन पहले ही जारी हुई थी, जिससे समय की कमी का हवाला दिया जा रहा है।

लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि जब सभी बच्चों को पोशाक उपलब्ध कराना संभव नहीं था, तो फिर बिना वितरण के भुगतान कैसे कर दिया गया। यह पूरे मामले को संदेहास्पद बनाता है और संभावित घोटाले की ओर संकेत करता है। इस प्रकरण में जिला शिक्षा अधीक्षक की भूमिका भी कटघरे में है।

कमीशन का खेल

सूत्रों का कहना है कि पोशाक मामले में कमीशन का बड़ा खेल होता है। एक बच्चे की पोशाक के लिए सरकार छह सौ रुपये की राशि देती है। उस राशि में 180 रुपये कमीशन की भेंट चढ़ जाती है। कमीशन की राशि स्कूल से लेकर जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय तक पहुंचती है। संबंधित वेंडर कमीशन की राशि उपलब्ध कराते हैं।

प्रखंड स्तर पर पहली व दूसरी के बच्चों की संख्या

प्रखंड का नाम पहली कक्षा दूसरी कक्षा
हंटरगंज 3,060 3,302
चतरा 1,740 1,965
प्रतापपुर 3,055 2,561
लावालौंग 1,364 1,288
सिमरिया 1,418 1,367
टंडवा 1,323 1,422
कुंदा 1,060 1,009
इटखोरी 952 829
कान्हाचट्टी 806 808
मयूरहंड 624 689
पत्थलगडा 405 374
गिद्धौर 499 507
कुल 16,306 16,121

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मेरी जानकारी में सभी बच्चों को पोशाक उपलब्ध करा दिया गया है। यदि कहीं पर नहीं हुआ है, तो उसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएं। मामले की जांच कराई जाएगी।

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रामजी कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक, चतरा।