विस्थापितों के आंदोलन का असर, बोकारो स्टील प्लांट का 25 हजार करोड़ का विस्तारीकरण टलने के आसार
Bokaro Steel Plant Expansion: विस्थापितों के नियोजन की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के कारण बोकारो स्टील प्लांट के ...और पढ़ें

बोकारो स्टील प्लांट के गेट पर आंदोलन करते विस्थापित। (फोटो जागरण)
HighLights
विस्थापितों के आंदोलन से बोकारो स्टील प्लांट विस्तारीकरण प्रभावित।
25 हजार करोड़ की परियोजना पर खर्च टालने पर विचार।
कच्चे माल की आपूर्ति बाधित, उत्पादन कटौती की आशंका।
जागरण संवाददाता, बोकारो। Bokaro Steel Plant Expansion नियोजन की मांग को लेकर विस्थापितों के सात दिनों से जारी आंदोलन का असर अब बोकारो स्टील प्लांट के प्रस्तावित विस्तारीकरण पर भी पड़ने लगा है। शुक्रवार को सेल मुख्यालय में इस मुद्दे पर गहन बैठक हुई।
प्रबंधन सूत्रों के अनुसार, बोकारो स्टील प्लांट के विस्तारीकरण की योजना फिलहाल टालने और इस वर्ष परियोजना पर राशि खर्च नहीं करने पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
उल्लेखनीय है कि सेल प्रबंधन ने बोकारो स्टील प्लांट के आधुनिकीकरण एवं विस्तारीकरण के लिए लगभग 25 हजार करोड़ रुपये खर्च करने की योजना पर काम शुरू किया था। इसके तहत कुछ कार्य भी प्रारंभ हो चुके हैं।
परियोजना से संयंत्र की उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ औद्योगिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों में वृद्धि की उम्मीद थी। प्रबंधन सूत्रों के अनुसार, फिलहाल दुर्गापुर और राउरकेला स्टील प्लांट के विस्तारीकरण तथा सेल की अन्य इकाइयों में चल रहे कार्यों को पूरा करने पर प्राथमिकता देने की तैयारी है।
पिछले वर्ष तीन अप्रैल को हुए आंदोलन के अनुभव के बाद प्रबंधन मौजूदा स्थिति को लेकर विशेष सतर्कता बरत रहा है। इस बार भी विस्थापितों के आंदोलन से संयंत्र के मुख्य गेट को छोड़कर अन्य गेटों पर आवागमन बाधित होने और कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित होने से चिंता बढ़ी है।
ऐसे में गतिरोध का असर बोकारो स्टील प्लांट की विकास योजनाओं और प्रस्तावित निवेश पर पड़ने की आशंका है।
आंदोलन समाप्त कर बातचीत से समाधान निकालने की अपील
बोकारो स्टील प्लांट प्रबंधन ने विस्थापितों और बोकारो के नागरिकों से आंदोलन के कारण उत्पन्न गतिरोध समाप्त करने तथा बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की है।
प्रबंधन ने कहा कि संयंत्र केवल कर्मचारियों की आजीविका का आधार नहीं, बल्कि पूरे बोकारो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ है। ठेका श्रमिकों, आपूर्तिकर्ताओं, ट्रांसपोर्टरों, दुकानदारों और सेवा प्रदाताओं सहित बड़ी संख्या में लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से संयंत्र पर निर्भर हैं।
प्रबंधन के अनुसार, 10 अक्टूबर से विस्थापित प्रशासनिक भवन के सामने निर्धारित धरना स्थल पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। प्रबंधन ने विस्थापितों की भावनाओं का सम्मान करते हुए भूख हड़ताल कर रहे लोगों के स्वास्थ्य पर चिंता जताई और उनसे अनशन समाप्त करने का आग्रह किया।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में भर्ती भारत सरकार के निर्धारित नियमों और संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार होती है। गेट अवरुद्ध होने से कच्चे माल और अन्य आवश्यक सामग्रियों की आपूर्ति बाधित हो रही है।
प्रबंधन के अनुसार, बोकारो स्टील प्लांट ताप-संवेदी संयंत्र है। ऐसी स्थिति बनी रहने पर सुरक्षा के मद्देनजर उत्पादन में कटौती करनी पड़ सकती है और महत्वपूर्ण इकाइयों को बंद करना पड़ सकता है। इन्हें दोबारा चालू करना कठिन, समयसाध्य और खर्चीला होगा।
इससे संयंत्र, कर्मचारियों, राज्य और पूरे क्षेत्र को आर्थिक नुकसान पहुंच सकता है। प्रबंधन ने सभी से संयंत्र के सुचारु संचालन के हित में सहयोग करने की अपील की है।
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