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CISF का बड़ा पुनर्गठन: औद्योगिक सुरक्षा में नया कमांड ढांचा लागू, कोयला सेक्टर रांची डीआइजी के कंट्रोल में

Published: Thu, 15 Oct 2026 03:34 AM (IST)

केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने स्टील, कोल और पावर सहित विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के नियंत्रण क्षेत्र में बड़ा बदलाव ...और पढ़ें

सीआइएसएफ की नई व्यवस्था से बदलेगा इकाइयों का नियंत्रण (प्रतीकात्मक फोटो)

सीआइएसएफ की नई व्यवस्था से बदलेगा इकाइयों का नियंत्रण (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. सीआईएसएफ ने औद्योगिक इकाइयों के नियंत्रण क्षेत्र बदले।

  2. स्टील, पावर, कोल सेक्टर के लिए नए महानिरीक्षक नियुक्त।

  3. यह नया सुरक्षा ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी।

जागरण संवाददाता, बोकारो। केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआइएसएफ) के दिल्ली मुख्यालय ने एक अहम फैसला लेते हुए स्टील, कोल, पावर, पोर्ट, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष संस्थान, परिवहन एवं मेट्रो, सरकारी एवं ऐतिहासिक इमारतों, तेल संयंत्रों, प्रशिक्षण केंद्रों तथा एयरपोर्ट सेक्टर की इकाइयों का विभाजन कर उनके नियंत्रण क्षेत्र की जिम्मेदारी में बड़ा बदलाव किया है।

इसके साथ ही सेल के बोकारो, बीपीएससीएल, दुर्गापुर, बर्नपुर, राउरकेला, भिलाई, सलेम सहित देश के अलग-अलग स्थानों पर संचालित स्टील सेक्टर की कुल 27 सीआइएसएफ यूनिट का नियंत्रण सेंट्रल सेक्टर, भिलाई के महानिरीक्षक पीयूष पांडेय को सौंप दिया जाएगा।

वहीं, सीटीपीएस चंद्रपुरा, बीटीपीएस बोकारो थर्मल, टीटीपीएस ललपनिया, डीवीसी पंचेत, केटीपीएस कोडरमा, पीटीपीएस पतरातू और बीटीपीपी बक्सर सहित सीआइएसएफ की लगभग 54 छोटी-बड़ी पावर इकाइयों की निगरानी अब नॉर्थ ईस्ट सेक्टर के जोन-1, कोलकाता के महानिरीक्षक एके मोहनका संभालेंगे।

कोल सेक्टर की बीसीसीएल धनबाद, एनसीएल नेवेली, सीसीएल करगली एवं मगध-आम्रपाली, एसईसीएल बिलासपुर, ईसीएल शीतलपुर, कोल माइनिंग हजारीबाग और एनसीएल सिंगरौली सहित सीआइएसएफ की कुल 22 इकाइयों की कमान अब पूर्वी खंड, रांची के महानिरीक्षक प्रबोध चंद्रा को सौंपी जाएगी।

यह योजना 15 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगी। इस संबंध में परिपत्र जारी कर दिया गया है। सीआइएसएफ मुख्यालय यह निर्णय सभी सेक्टरों की इकाइयों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अधिक केंद्रित बनाने तथा विभागीय कार्यप्रणाली में सुधार के उद्देश्य से ले रहा है।

वर्तमान में पूर्वी खंड रांची, नॉर्थ ईस्ट सेक्टर कोलकाता, सेंट्रल सेक्टर भिलाई और साउथ सेक्टर चेन्नई सहित विभिन्न सेक्टरों में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों को औद्योगिक संस्थानों से लेकर बंदरगाहों, पावर प्लांटों और अंतरिक्ष प्रतिष्ठानों तक की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालनी पड़ती है।

नई व्यवस्था के तहत बल की इकाइयों को स्टील, कोल, पावर, स्पेस, संसद भवन और एयरपोर्ट जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में विभाजित कर उनका प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित महानिरीक्षकों को सौंपा जा रहा है।

इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों और जवानों को किसी एक विशिष्ट क्षेत्र की सुरक्षा में विशेषज्ञ बनाना है, ताकि कैडर का पुनर्गठन अधिक प्रभावी हो सके।

इसके अलावा, क्षेत्रीय स्तर पर संबंधित आइजी और डीआइजी को अधिक स्वतंत्रता और प्रशासनिक अधिकार दिए जाएंगे, जिससे वे जमीनी स्तर पर निर्णय लेने में आत्मनिर्भर बन सकें।

आइजी कार्यालय की दूरी से होगी समस्या

सीआइएसएफ मुख्यालय की ओर से स्टील और पावर क्षेत्र की इकाइयों का विभाजन किए जाने के बाद बीएसएल बोकारो के लिए आइजी कार्यालय अब रांची के बजाय भिलाई में होगा।

इसी प्रकार, सेल के दुर्गापुर, बर्नपुर और राउरकेला के साथ-साथ तमिलनाडु स्थित सलेम स्टील प्लांट की इकाइयों में कार्यरत अधिकारियों और जवानों को अपनी समस्याओं के समाधान या अन्य विभागीय कार्यों के लिए भिलाई जाना होगा।

इसी तरह, पावर क्षेत्र की सीआइएसएफ इकाइयों, जैसे चंद्रपुरा, बोकारो थर्मल और ललपनिया का नियंत्रण पहले पूर्वी खंड, रांची के आइजी के पास था।

इन इकाइयों में कार्यरत अधिकारी और जवान अपने विभागीय कार्यों या समस्याओं के समाधान के लिए रांची आते-जाते थे। अब इन इकाइयों में कार्यरत कर्मियों को ऐसे कार्यों के लिए आइजी कार्यालय, कोलकाता जाना पड़ेगा।

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