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Bokaro Airport के इंतजार के बीच 26 किमी दूर बनेगा नया विकल्प, छर्रा एयरफील्ड से बदल सकता है हवाई संपर्क का समीकरण

Published: Sat, 26 Sep 2026 07:10 PM (IST)

Purulia का छर्रा एयरफील्ड क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित हो रहा है, जो बोकारो से मात्र 26 किमी ...और पढ़ें

बोकारो एयरपोर्ट और पुरुलिया का छर्रा एयरफील्ड। (फाइल फोटो)

बोकारो एयरपोर्ट और पुरुलिया का छर्रा एयरफील्ड। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. छर्रा एयरफील्ड बोकारो से 26 किमी दूर, क्षेत्रीय हवाई अड्डा बन रहा।

  2. बोकारो एयरपोर्ट पर 80 करोड़ खर्च, उड़ानें अब भी शुरू नहीं।

  3. पश्चिम बंगाल सरकार छर्रा को पर्यटन, व्यापार से जोड़ रही है।

जागरण संवाददाता, बोकारो। ‍Bokaro Airport शुरू होने का इंतजार जितना लंबा होता जा रहा है, उतनी ही तेजी से पड़ोसी पश्चिम बंगाल में एक नया हवाई विकल्प बनने जा रहा है।

पुरुलिया के ऐतिहासिक छर्रा एयरफील्ड ( Charra Airport, Purulia Airport) को क्षेत्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की तैयारी अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के बीच समझौता होने वाला है।

West Bengal के चार क्षेत्रीय एयरपोर्ट ( Regional Airport) के लिए समझौता 28 सितंबर को होगा। छर्रा एयरफील्ड बोकारो से लगभग 26 किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में वहां नियमित विमान सेवा शुरू होती है तो इसका सीधा असर बोकारो के प्रस्तावित हवाई संपर्क पर पड़ सकता है।

धनबाद भी छर्रा से अपेक्षाकृत नजदीक है। यानी जिस औद्योगिक क्षेत्र के लिए बोकारो एयरपोर्ट को विकसित करने की लंबे समय से बात हो रही है, उसी क्षेत्र के आसपास अब एक दूसरा एयरपोर्ट विकल्प तैयार हो रहा है।

छर्रा एयरपोर्ट में जमीन की कोई कमी नहीं है। पूर्व के डीपीआर के मुताबिक 1700 मीटर का रनवे बनना था। अब नए प्रस्ताव में इसके बढ़ने की संभावना है। वहीं, एयरपोर्ट अथॉरिटी ने बोकारो को लेकर संभावना नहीं छोड़ी है।

एएआई की ओर से एयरपोर्ट की बाउंड्री पर खराब हो चुके कंसर्टिना कॉइल को लगाने के लिए फिर से टेंडर जारी किया जा रहा है।

विरासत को विकसित करने की हो रही पहल

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1942 में ब्रिटिश शासन ने छर्रा एयरफील्ड का निर्माण कराया था। युद्धकाल में इसका इस्तेमाल सैन्य गतिविधियों के लिए हुआ।

करीब आठ दशक तक निष्क्रिय रहने के बाद अब इसे वाणिज्यिक विमान परिचालन के लिए विकसित करने की योजना पर पश्चिम बंगाल सरकार काम कर रही है। वहीं, बोकारो हवाई अड्डे से उड़ान शुरू न हो, इसके लिए बीते पांच वर्ष से सभी स्टेकहोल्डर लगे हुए हैं।

खास बात यह है कि केंद्र सरकार के स्तर पर छर्रा को लेकर प्रक्रिया पहले से आगे बढ़ रही है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने राज्यसभा में बताया था कि पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर एएआई ने वर्ष 2023 में छर्रा एयरफील्ड के विकास के लिए पूर्व-व्यवहार्यता अध्ययन किया था और रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी।

इधर बोकारो में 80 करोड़ खर्च, फिर भी उड़ान की तारीख नहीं

दूसरी ओर, बोकारो एयरपोर्ट की कहानी अब भी पुराने सवाल पर अटकी है-उड़ान आखिर शुरू कब होगी। जवाब शायद कभी... । एएआई के अनुसार, बोकारो हवाई अड्डे के रनवे, टर्मिनल भवन और संबंधित सुविधाओं का बुनियादी ढांचा अप्रैल 2022 में पूरा हो चुका है।

बोकारो से पटना और कोलकाता के लिए उड़ान प्रस्तावित थी। इसके लिए शुरुआत में एलायंस एयर और स्पाइसजेट ने प्रस्ताव भी दिया था, लेकिन वह पुरानी बात है।

देश में 72 सीट वाले हवाई जहाज की कमी है। यही वजह है कि वर्ष 2018 में जिस एयरपोर्ट के जीर्णोद्धार का शिलान्यास हुआ और जिसे वर्ष 2020 के आसपास चालू करने की उम्मीद थी, वहां आज भी नियमित यात्री उड़ान की तारीख स्पष्ट नहीं है।

इस बीच देवघर एयरपोर्ट शुरू हो चुका है और अब बोकारो के करीब छर्रा को भी क्षेत्रीय विमानन नेटवर्क से जोड़ने की तैयारी है। ऐसे में बोकारो के भविष्य पर असर पड़ना तय माना जा रहा है। नई समस्या पर्यावरणीय स्वीकृति की भी आ चुकी है।

औद्योगिक पट्टी के लिए बदल सकता है हवाई संपर्क का समीकरण

पुरुलिया में छर्रा एयरपोर्ट का महत्व केवल यात्री उड़ान तक सीमित नहीं रहने वाला है। रघुनाथपुर क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार, अमृतसर-कोलकाता औद्योगिक गलियारे, नए स्टील प्लांट से जुड़ी योजनाओं और पुरुलिया के पर्यटन क्षेत्र के विकास के बीच एयर कनेक्टिविटी को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।

ताजा घोषणाओं में भी राज्य सरकार छर्रा एयरपोर्ट को पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक विकास से जोड़कर दिखा रही है। वहीं, वर्षों से तैयार बोकारो एयरपोर्ट को उससे पहले परिचालन में लाने के लिए केंद्र, राज्य, सेल और विमानन एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी से सपना अधूरा रह सकता है।

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