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केरलम के फिल्म निर्माता को बोकारो कोर्ट ने चेक बाउंस में सुनाई छह माह की कैद, ढाई करोड़ चुकाने का आदेश

Published: Sun, 20 Sep 2026 05:26 AM (IST)

बोकारो की अदालत ने केरल के फिल्म निर्माता सतीश बाबू टी.के. को ढाई करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में ...और पढ़ें

बोकारो की अदालत ने केरलम के फिल्म निर्मता को सुनाई सजा। (प्रतीकात्मक फोटो)

बोकारो की अदालत ने केरलम के फिल्म निर्मता को सुनाई सजा। (प्रतीकात्मक फोटो)

HighLights

  1. फिल्म निर्माता सतीश बाबू टी.के. को चेक बाउंस में सजा।

  2. बोकारो कोर्ट ने छह माह कैद, चार करोड़ रुपये भुगतान का आदेश।

  3. आर्थिक अपराध मानते हुए परीवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं मिला।

जागरण संवाददाता, बोकारो। झारखंड के बोकारो की अदालत ने केरलम के फिल्म निर्माता सतीश बाबू टी के को छह माह की सजा सुनाई है। यह सजा चेक बाउंस मामले में सुनाई गई है। साथ ही, ढाई करोड़ रुपये परिवादी को वापस भी करने का अदालत ने आदेश दिया है।

अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी अनुज कुमार की अदालत ने ढाई करोड़ रुपये के चेक बाउंस होने के मामले में सतीश बाबू टी के को सजा सुनाई है। सतीश, जो पेरुमारम वेस्ट नार्थ एरनाकुल्लम, केरलम के निवासी हैं, को अदालत ने छह माह के कारावास के साथ पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।

जुर्माना नहीं देने पर एक माह की अतिरिक्त सजा 

यदि जुर्माना नहीं भरा गया, तो उन्हें एक माह की अतिरिक्त कैद की सजा भुगतनी होगी। इसके साथ ही, अदालत ने ढाई करोड़ रुपये भी परिवादी को देने का आदेश दिया है। परिवादी का पक्ष अदालत में अधिवक्ता संजीव ओझा ने रखा।

लंदन क्रेज फिल्म के लिए लिए थे रुपये 

सेक्टर चार ए निवासी अविनाश बी उन्नीथन ने इस मामले में शिकायत परिवाद दर्ज कराई थी। परिवादी ने बताया कि उनके आवास पर सतीश बाबू टी के और सुरेश बाबू टी के आए थे। दोनों ने बताया कि वे आर्डिनरी फर्म के पार्टनर हैं और लंदन क्रेज नामक फिल्म बनाना चाहते हैं।

जमीन गिरवी रखकर दोनों ने दो करोड़ रुपये देने का आग्रह किया। इसके बाद, उन्होंने केरला फाइनेंसियल कारपोरेशन से जमीन गिरवी रखकर दो करोड़ रुपये का कर्ज लिया और आर्डिनरी फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दिए।

फिल्म का निर्माण हुआ और उसका वितरण भी किया गया। आरोपितों ने टीवी चैनल को फिल्म दिखाने का अधिकार दिया और लाभ कमाया। इसके बावजूद, उनके रुपये वापस नहीं किए गए।

आरोपितों ने इसके बाद मिली नामक फिल्म बनाई और काफी आग्रह के बाद सतीश बाबू टी के ने ढाई करोड़ का चेक दिया। इस मामले में एग्रिमेंट भी हुआ था। चेक 2 मार्च 2016 को बाउंस हो गया। इसके बाद, कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए परिवादी ने कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया।

बार-बार आग्रह के बाद भी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए फिल्म निर्माता  

बार-बार कोर्ट से अपेक्षिकाएं निर्गत होने के बावजूद जब आरोपित हाजिर नहीं हुए, तो अदालत ने आरोपित का पक्ष रखने के लिए एएलएडीसी की नियुक्ति की। इसके बाद, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 299(1) (झारखंड राज्य संशोधन 2020) के तहत आरोपित के बिना ही विचारण शुरू किया गया।

विचारण में सतीश बाबू टी के को अदालत ने दोषी पाया और दूसरे आरोपित को रिहा करने का आदेश दिया। दोषी पाए गए आरोपित को एएलएडीसी ने पहला अपराध होने का हवाला दे परीवीक्षा अधिनियम का लाभ देने का आग्रह किया।

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अदालत ने कहा कि मामला आर्थिक अपराध की प्रवृत्ति का है। एनआइ एक्ट की धारा विशेष अधिनियम है, ऐसे में इसे परीवीक्षा अधिनियम का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने छह माह की कैद की सजा सुनाते हुए ढाई करोड़ रुपये भी देने का आदेश दिया।

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