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नेकां में बगावत के सुर तेज, डिप्टी सीएम और सलाहकार को हटाने की मांग पर अड़े विधायक; उमर सरकार पर चौतरफा दबाव

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Wed, 04 Nov 2026 01:33 PM (IST)

नेशनल कॉन्फ्रेंस में मंत्रिमंडल विस्तार में अनदेखी और सत्ता में अपेक्षित भागीदारी न मिलने से असंतोष गहरा रहा है। असंतुष्ट ...और पढ़ें

नेशनल कॉन्फ्रेंस में गहराया असंतोष, उमर-फारूक की बढ़ी मुश्किलें। (फाइल फोटो)

नेशनल कॉन्फ्रेंस में गहराया असंतोष, उमर-फारूक की बढ़ी मुश्किलें। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नेकां में मंत्रिमंडल विस्तार, पदों को लेकर असंतोष गहराया।

  2. असंतुष्ट नेताओं ने संगठनात्मक पुनर्गठन, मंत्री हटाने की मांग की।

  3. नेतृत्व मंत्रियों को हटाने पर सहमत नहीं, मनाने की कोशिश जारी।

नवीन नवाज, श्रीनगर। मंत्रिमंडल विस्तार में अनदेखी, संगठन में पदों को लेकर असमंजस और सत्ता में अपेक्षित भागीदारी न मिलने से नेशनल कान्फ्रेंस (नेकां) के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की नाराजगी अब सामूहिक दबाव का रूप लेने लगी है। असंतुष्ट नेताओं ने संगठनात्मक पुनर्गठन से लेकर मंत्रियों और मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने तक की मांग उठाकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी नेतृत्व के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इस सियासी खींचतान के बीच वरिष्ठ नेता एवं ईदगाह विधायक मुबारक गुल ने भी अपने तेवर बरकरार रखे हैं।

बुधवार को प्रस्तावित प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने अपने अगले कदम का खुलासा करने से इनकार करते हुए दो टूक कहा, 'मैं आज कोई खुलासा नहीं करूंगा। मैं फाइटर हूं और हमेशा की तरह लड़ता रहूंगा।'

गुलाम कादिर परदेसी के जनाजे में कई वरिष्ठ नेता पहुंचे

इसी सियासी उथल-पुथल के बीच नेकां के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक गुलाम कादिर परदेसी के निधन और उनके जनाजे में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी। जनाजे में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के दोनों पुत्रों के साथ मुबारक गुल, नजीर अहमद गुरेजी, हसनेन मसूदी समेत पार्टी के कई वरिष्ठ और असंतुष्ट नेता शामिल हुए।

इस दौरान इन नेताओं को आपस में बातचीत करते हुए भी देखा गया। पार्टी के भीतर बढ़ती नाराजगी के बीच वरिष्ठ नेताओं की इस सामूहिक मौजूदगी और आपसी बातचीत को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

असंतुष्ट विधायकों ने बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व को सौंपा ज्ञापन

उधर, असंतुष्ट विधायकों ने मंगलवार रात बैठक के बाद पार्टी नेतृत्व को ज्ञापन सौंपकर सरकार और संगठन में व्यापक बदलाव की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में संगठनात्मक ढांचे का पुनर्गठन, दो वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके मंत्रियों को बदलना तथा जावेद अहमद राणा और उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी को मंत्रिमंडल से हटाना शामिल है।

इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को भी पद से हटाने की मांग की गई है।

मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने की मांग पर अटका मामला

सूत्रों के अनुसार, नेतृत्व ने संगठनात्मक बदलाव, मंत्रियों के कामकाज की नियमित समीक्षा और पार्टी के राजनीतिक एजेंडे को लेकर प्रभावी अभियान चलाने जैसी कुछ मांगों पर सहमति जताई है। जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल कराने के मुद्दे पर केंद्र सरकार के साथ प्रभावी संवाद की जरूरत पर भी सहमति बनी है।

हालांकि, मंत्रियों और मुख्यमंत्री के सलाहकार को हटाने की मांग पर नेतृत्व और असंतुष्ट विधायकों के बीच सहमति नहीं बन पाई है। नेतृत्व फिलहाल मंत्रिमंडल में तत्काल फेरबदल के दबाव को स्वीकार करने के बजाय नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहा है।

उमर और फारूक अब्दुल्ला के फैसले का इंतजार

आगा रुहुल्ला के पार्टी छोड़ने के घटनाक्रम से लेकर मंत्रिमंडल विस्तार और संगठनात्मक नियुक्तियों तक, लगातार सामने आ रहे विवादों ने नेकां के भीतर नेतृत्व, प्रतिनिधित्व और सत्ता में भागीदारी के सवालों को केंद्र में ला दिया है।

अब चुनौती केवल नाराज नेताओं को मनाने की नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर कर संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की भी है। निगाहें उमर अब्दुल्ला और डॉ. फारूक अब्दुल्ला के अगले कदम पर टिकी हैं।

'मैं फाइटर हूं, लड़ता रहूंगा', मुबारक गुल के तेवर से नेकां में हड़कंप; बोले- आज कोई खुलासा नहीं करूंगा

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