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नेकां में सब ठीक नहीं, नाराज विधायकों ने उमर-फारूक के सामने रखीं ये मांगें; रुहुल्लाह के इस्तीफे के बाद गहराया संकट

By Naveen NawazEdited By: Dallu Slathia
Published: Fri, 06 Nov 2026 12:08 PM (IST)

नेकां में आंतरिक असंतोष खुलकर सामने आया है, जहां नाराज विधायकों ने फारूक और उमर अब्दुल्ला के सामने आंतरिक लोकतंत्र ...और पढ़ें

नाराज विधायकों ने फारूक-उमर के सामने रखीं बड़ी मांगें।

नाराज विधायकों ने फारूक-उमर के सामने रखीं बड़ी मांगें।

HighLights

  1. आंतरिक लोकतंत्र मजबूत करने और मंत्रिमंडल फेरबदल की मांग।

  2. मुख्यमंत्री के सलाहकारों को हटाने का प्रस्ताव भी शामिल।

  3. आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे से नेतृत्व की चुनौती बढ़ी।

नवीन नवाज, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर की सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) में अंदरूनी असंतोष अब खुलकर सामने आने लगा है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज पार्टी विधायकों ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के साथ बैठक कर अपनी मांगें दोहराईं। विधायकों ने पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत बनाने, मंत्रिमंडल में व्याक फेरबदल करने और सरकार के कामकाज में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाने पर जोर दिया है। उन्होंने अपनी मांगों और शिकायतों का विस्तृत मांगपत्र भी पार्टी नेतृत्व को सौंपा है।

मुख्यमंत्री आवास पर सुबह करीब 10:30 बजे शुरू हुई इस बैठक को पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष को दूर करने की दिशा में नेतृत्व की अहम पहल माना जा रहा है। हालिया मंत्रिमंडल विस्तार में वरिष्ठ नेताओं को जगह नहीं मिलने और कुछ नेताओं को दोबारा जिम्मेदारियां दिए जाने से पार्टी के कई विधायक नाराज हैं। उनका मानना है कि मंत्रिमंडल में जिम्मेदारियों का निर्धारण करते समय वरिष्ठता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विधायकों के राजनीतिक योगदान को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के सामने स्पष्ट किया है कि उनकी नाराजगी केवल मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी और सरकार के कामकाज में निर्वाचित प्रतिनिधियों की अनदेखी भी इसका एक प्रमुख कारण है। उन्होंने संगठनात्मक फैसलों में पारदर्शिता, जवाबदेही और आंतरिक लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाने की मांग की है।

सलाहकारों को हटाने और मंत्रिमंडल में बदलाव की मांग

नाराज विधायकों की प्रमुख मांगों में मुख्यमंत्री के मौजूदा सलाहकार को हटाने के साथ दो नए अवैतनिक सलाहकार नियुक्त करने का प्रस्ताव भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक, विधायकों ने जम्मू और कश्मीर संभाग से एक-एक सलाहकार नियुक्त करने की मांग की है, ताकि दोनों क्षेत्रों के राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों को मुख्यमंत्री तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।

उपमुख्यमंत्री के पद को लेकर भी विधायकों ने अपनी आपत्ति जताई है। सूत्रों के अनुसार, उनकी मांग है कि यदि उपमुख्यमंत्री को पद से नहीं हटाया जाता है तो उनके विभागों में व्यापक फेरबदल किया जाए। इसके अलावा मंत्रिमंडल में शामिल कुछ मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करने और लंबे समय से पद पर बने मंत्रियों को बदलकर वरिष्ठ तथा उपेक्षित विधायकों को अवसर देने की मांग भी उठाई गई है।

विधायकों ने सरकार और पार्टी संगठन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए एक प्रभावी परामर्श व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया है। उनका कहना है कि निर्वाचित प्रतिनिधियों को अपने क्षेत्रों की विकास संबंधी समस्याओं और प्रशासनिक मामलों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाने के लिए उचित मंच मिलना चाहिए।

आंतरिक लोकतंत्र और चुनावी वादों पर भी जवाबदेही मांगी

प्रतिनिधिमंडल ने पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में सुधार, वरिष्ठ नेताओं और विधायकों से नियमित विचार-विमर्श तथा पार्टी के पूर्व निर्णयों को लागू करने की मांग भी उठाई है। विधायकों का जोर है कि महत्वपूर्ण राजनीतिक और प्रशासनिक फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित रहने के बजाय सामूहिक परामर्श से लिए जाने चाहिए।

इसके साथ ही जम्मू-कश्मीर का राज्य का दर्जा बहाल करने और अनुच्छेद 370 के तहत मिले विशेष दर्जे की बहाली के लिए पार्टी के चुनावी वादों को लेकर भी नेतृत्व से जवाबदेही की मांग की गई है। विधायकों का मानना है कि इन मुद्दों पर पार्टी को अधिक सक्रिय राजनीतिक और संगठनात्मक पहल करनी चाहिए।

आगा रुहुल्लाह के इस्तीफे के बीच नेतृत्व के सामने नई चुनौती

नेकां में मौजूदा असंतोष ऐसे समय सामने आया है, जब श्रीनगर के सांसद आगा सैयद रुहुल्लाह मेहदी ने तीन नवंबर को पार्टी की प्राथमिक सदस्यता और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफे का एलान कर पार्टी नेतृत्व को बड़ा राजनीतिक झटका दिया है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे और अनुच्छेद 370 की बहाली को लेकर किए गए चुनावी वादों पर अपेक्षित कदम नहीं उठाने का आरोप लगाया था।

रुहुल्लाह और पार्टी नेतृत्व के बीच पिछले काफी समय से मतभेद चल रहे थे। आरक्षण नीति, अनुच्छेद 370 और पार्टी की राजनीतिक कार्यशैली को लेकर उनकी असहमति पहले भी सार्वजनिक हो चुकी थी। उनके इस्तीफे के बाद अब मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों की सामूहिक नाराजगी ने पार्टी नेतृत्व के सामने संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की चुनौती और बढ़ा दी है।

रुहुल्लाह का पार्टी और संसद दोनों से अलग होने का फैसला ऐसे समय आया है, जब पार्टी के भीतर विभिन्न स्तरों पर नेतृत्व की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

राजनीतिक हलकों में इन दोनों घटनाक्रमों को पार्टी के भीतर असंतोष के अलग-अलग लेकिन महत्वपूर्ण संकेतों के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, नाराज विधायकों की मांगें और रुहुल्लाह के इस्तीफे के पीछे की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन दोनों घटनाओं ने पार्टी नेतृत्व के सामने संवाद, जवाबदेही और संगठनात्मक सुधार का मुद्दा प्रमुखता से ला दिया है।

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बैठक में ये विधायक हुए शामिल

बैठक में भाग लेने वाले असंतुष्ट विधायकों में जावेद मीरचल, सज्जाद शफी उड़ी, गुलाम मोहिउद्दीन मीर, फारूक जान, बशीर अहमद वीरी, अब्दुल मजीद बट उर्फ लारमी, फारूक अहमद शाह, मुबारक गुल, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) हसनैन मसूदी, नजीर अहमद गुरेजी, एजाज अहमद जान, जावेद इकबाल चौधरी, सैफुद्दीन भट और कैसर जमशेद लोन शामिल हैं।

हालांकि, थन्नामंडी के निर्दलीय विधायक मुजफ्फर खान बैठक में शामिल नहीं हुए। सूत्रों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट किया गया था कि मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के साथ होने वाली इस बैठक में केवल नेकां के विधायक ही शामिल होंगे। बताया जाता है कि मंत्रिमंडल फेरबदल के मुद्दे पर तीन निर्दलीय विधायक असंतुष्ट विधायकों के पक्ष में हैं।

नेतृत्व के जवाब पर टिकी आगे की रणनीति

नेकां नेतृत्व के लिए यह बैठक केवल नाराज विधायकों की शिकायतें सुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों को दूर करने और संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की भी परीक्षा है। विधायकों ने जिस तरह मंत्रिमंडल में बदलाव, सलाहकारों की नियुक्ति और संगठनात्मक सुधारों को लेकर लिखित मांगपत्र सौंपा है, उससे स्पष्ट है कि वे केवल आश्वासन के बजाय ठोस कार्रवाई चाहते हैं।

अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि डॉ. फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इन मांगों पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या पार्टी नेतृत्व विधायकों को संतुष्ट करने के लिए मंत्रिमंडल तथा संगठन में बदलाव के लिए तैयार होता है।

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