हेरोइन पर शिकंजा कसा तो ‘टापाल’ ने ली जगह, जम्मू-कश्मीर में दर्द की दवाओं का खतरनाक नशा
जम्मू-कश्मीर में हेरोइन पर पुलिस की सख्ती के बाद नशेड़ियों ने दर्द निवारक दवाओं, जिन्हें स्थानीय रूप से 'टापाल' कहा जाता है, का सहारा लेना शुरू कर दिया है।

फोटो क्रेडिट: AI
HighLights
हेरोइन पर सख्ती के बाद फार्मा ड्रग्स का बढ़ा नशा
'टापाल' नाम से ट्रामाडोल, टैपेंटाडोल दवाओं का दुरुपयोग
बच्चे और किशोर भी इस खतरनाक नशे की चपेट में
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में नशे के खिलाफ पुलिस की सख्ती लगातार बढ़ रही है। हेरोइन, चरस और दूसरे नशीले पदार्थों की बड़ी खेप पकड़ी जा रही है और तस्करों पर कार्रवाई हो रही है।
लेकिन इसी सख्ती के बीच नशे की दुनिया ने अपना रास्ता बदल लिया है। अब हेरोइन की जगह दर्द और दूसरी बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का सहारा लिया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर ऐसी दवाओं के नशे को ‘टापाल’ जैसे नामों से जाना जा रहा है।
पुलिस भी इसे खुद मान रही है। जांच में सामने आया है कि नशे के लिए ट्रामाडोल और टैपेंटाडोल जैसी दवाओं का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ये दवाएं सामान्य तौर पर तेज दर्द और कुछ गंभीर स्थितियों में डॉक्टरों की सलाह पर दी जाती हैं।
लेकिन नशे के आदी लोग इन्हें बड़ी मात्रा में लेने लगे हैं। यही बदलाव अब पुलिस और डॉक्टरों के लिए नई चिंता बन गया है।
पांच एटीएफ सेंटरों में 5282 मामले, कुलगाम सबसे आगे
कश्मीर के पांच एडिक्शन ट्रीटमेंट फेसेलाइटिस (एटीएफ) सेंटरों में ही 5282 नशे से जुड़े मामले सामने आए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो हेरोइन के बजाय फार्मा ड्रग्स का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कुलगाम के एटीएफ सेंटर में अकेले 1951 मामले दर्ज किए गए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि कई मरीज पहले हेरोइन लेते थे, लेकिन अब फार्मा ड्रग्स की तरफ चले गए हैं।
नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान के तहत पुलिस अब तक 219425 नशीली टैबलेट और कैप्सूल तथा 3.830 किलो कोडीन वाला सिरप बरामद कर चुकी है। वहीं, केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार जम्मू-कश्मीर में करीब 5.4 लाख लोग ओपिओइड की लत से जूझ रहे हैं।
बच्चों तक पहुंचा दूसरा नशा
इस पूरे बदलाव का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसकी चपेट में बच्चे और किशोर भी आ रहे हैं। जांच के अनुसार एसएमएचएस के नशा मुक्ति केंद्र में 10 से 18 साल की उम्र के 1900 से अधिक बच्चे ‘दूसरे नशे’ के लिए पहुंचे हैं। डॉक्टरों के मुताबिक इनमें ट्रामाडोल, टैपेंटाडोल और प्रीगाबालिन जैसी दवाओं का इस्तेमाल सामने आया है।
विशेषज्ञों के लिए चिंता की बात यह है कि कई बच्चे इन गोलियों को नशा मानते ही नहीं। उन्हें लगता है कि जब यह दवा है तो नुकसान भी कम होगा। यही गलतफहमी उन्हें धीरे-धीरे नशे की गिरफ्त में ले जा रही है।
हेरोइन महंगी, फार्मा ड्रग्स आसान
इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरोसाइन्सेस श्रीनगर में एचओडी डॉ अरशद हुसैन ने बताया कि हेरोइन महंगी होने और पुलिस की कार्रवाई के कारण इसकी उपलब्धता प्रभावित हुई है।
इसके मुकाबले फार्मा ड्रग्स सस्ती, छोटी और छिपाकर ले जाना आसान हैं। रिपोर्ट के अनुसार 37 प्रतिशत युवा इन्हें दोस्तों के जरिए और 35 प्रतिशत सीधे केमिस्ट से हासिल कर रहे हैं।
सरकार जम्मू-कश्मीर में 21 एटीएफ और 12 एनजीओ केंद्रों के जरिए नशे के इलाज और पुनर्वास पर काम कर रही है। वहीं डीजीपी अनिल प्रभात के अनुसार 11 अप्रैल 2026 को शुरू हुए ‘नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान’ के बाद 3257 एनडीपीएस मामले दर्ज किए गए जबकि 4000 से ज्यादा गिरफ्तारियां हुईं हैं। यही नहीं 288 संपत्तियां जब्त की गईं हैं।
