जंगलों में बसे रोहिंग्या, किराये पर बिजली-पानी, जम्मू में वन में बसे रोहिंग्याओं की पहचान और सत्यापन पर उठे सवाल
जम्मू के नरवाल स्थित रहीम नगर में वन भूमि पर बनी रोहिंग्या झुग्गियों को वन विभाग ने ध्वस्त कर दिया ...और पढ़ें
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रोहिंग्याओं के बिना वेरिफिकेशन के लंबे समय से रहने पर सुरक्षा चिंताएं बढ़ीं।
HighLights
वन विभाग ने नरवाल में रोहिंग्या झुग्गियां ध्वस्त कीं
बाहरी लोगों की पहचान और सत्यापन का मुद्दा उठा
वन भूमि पर अतिक्रमण और किरायेदारी की जांच होगी
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू के नरवाल के रहीम नगर में वन भूमि पर बनी झुग्गियों को हटाने की कार्रवाई के बाद जंगल और वन भूमि में लंबे समय से रह रहे बाहरी लोगों की पहचान और वेरिफिकेशन का मुद्दा फिर सामने आया है।
शनिवार को वन विभाग और वन सुरक्षा बल ने कार्रवाई कर वहां बनी झुग्गियों को ध्वस्त किया। अधिकारियों के अनुसार, इन ढांचों में रोहिंग्या परिवार भी रह रहे थे।
किराये पर रहने की भी सामने आई जानकारी
स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के अनुसार, कुछ परिवार इन झुग्गियों में कई वर्षों से रह रहे थे और कथित तौर पर किराया देकर वहां ठहरे हुए थे। झुग्गियों में बिजली और पानी जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध होने की बात सामने आई है।
रोहिंग्याओं ने कैसे वन भूमि पर डाला डेरा?
ऐसे में यह पता लगाना जरूरी होगा कि इन लोगों ने वन भूमि पर कब और कैसे डेरा डाला और लंबे समय तक वहां रहने के बावजूद संबंधित एजेंसियों की नजर इस पर क्यों नहीं पड़ी।
वहीं जंगलों और शहर से सटे वन क्षेत्रों में लंबे समय तक बिना नियमित वेरिफिकेशन के लोगों के रहने से सुरक्षा एजेंसियों के लिए पहचान संबंधी चुनौतियां पैदा हो सकती हैं।
खासकर ऐसे मामलों में यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि वहां रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पहचान, पते और दस्तावेजों का रिकार्ड संबंधित एजेंसियों के पास उपलब्ध हो।
वन विभाग की कार्रवाई के बाद अब यह भी जांच का विषय है कि वन भूमि पर झुग्गियां किसने बनाईं और इन्हें किराये पर किसने दिया। विभाग ने अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बात कही है।
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