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पहली बार पर्दे पर गूंजेगी घाटी की आवाज, इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर के 5 फिल्मों का चयन

Published: Tue, 08 Sep 2026 04:11 PM (IST)

जम्मू-कश्मीर के पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए 'जेके सिलेक्ट सेक्शन' में स्थानीय निर्देशकों की पांच फिल्मों का चयन हुआ है।

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर की पांच फिल्मों का चयन किया गया है।

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में जम्मू-कश्मीर की पांच फिल्मों का चयन किया गया है।

HighLights

  1. पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2026 के लिए 5 फिल्में चयनित

  2. स्थानीय निर्देशकों की फिल्में कश्मीर की विरासत, हकीकत दर्शाएंगी

  3. यह फेस्टिवल स्थानीय प्रतिभा को बड़ा मंच प्रदान करेगा

राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के सिनेमा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। पहले इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर (आईएफएफजेके) 2026 के लिए सबसे अहम प्रतियोगी परीक्षा 'जेके सिलेक्ट सेक्शन' में जम्मू-कश्मीर के निर्देशकों की पांच फिल्मों का चयन किया गया है। ये सभी फिल्में घाटी की सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक हकीकत और मानवीय अनुभवों को बड़े पर्दे पर जीवंत करेंगी।

फेस्टिवल के लिए गठित प्रिव्यू कमेटी ने तमाम प्रविष्टियों की समीक्षा और कलात्मक गुणवत्ता के आधार पर इन फिल्मों की सिफारिश की है। चयनित फिल्मों में कहानियों, शैलियों और दृष्टिकोणों की विविधता साफ दिखती है, लेकिन सबका केंद्र एक ही है, जम्मू-कश्मीर की जड़ से जुड़ी कहानी।

इन पांच फिल्मों का हुआ चयन

इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर में जिन पांच फिल्मों को दिखा जाने की अनुमति दी गई है उनमें मोहम्मद वली द्वारा निर्देशित फिल्म सर्चिंग फॉर द ग्रैंडपा शामिल है। यह फिल्म ईद के मौके पर कश्मीरी गांव के दो छोटे भाई-बहनों की मासूम तलाश को दिखाती है।

यह बचपन, परिवार और यादों की बेहद खूबसूरत कहानी है। इसके अलावा रोहिन रवींद्रन नायर के निर्देशन में बनी फिल्म आरिफा एक महिला की अपने पुश्तैनी घर में वापसी और बचपन व पिता की यादों से टकराव की गहरी भावनात्मक यात्रा है।

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यही नहीं सिद्धार्थ कौल और अंकित वली की फिल्म बट कोच (द लॉस्ट लेन), विस्थापन के दर्द को बयां करती है। एक कश्मीरी विस्थापित परिवार की कहानी के जरिए यह फिल्म पहचान और 'घर' के स्थायी एहसास को तलाशती है। इसी तरह तसरूफदार (जिन्न्स ऑफ कश्मीर), कपिल मट्टू की फिल्म रहस्य, यादों और कश्मीर के अतीत के जख्मों को एक साथ बुनती है। यह कश्मीर को एक अलग और रोमांचक नजरिए से देखने का मौका देगी।

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यही नहीं बाबा तसद्दुक हुसैन द्वारा निर्देशित नक्श-ए-दौर (द स्टोरी ऑफ गुलाम नबी धर) फिल्म डाउनटाउन श्रीनगर के पद्मश्री सम्मानित लकड़ी कारीगर गुलाम नबी धर के जीवन और विरासत पर आधारित है। कश्मीर की शिल्पकला, विरासत और जुझारूपन का सच्चा दस्तावेज।

Film festival

ये सभी फिल्में कश्मीरी और हिंदी भाषाओं में बनी हैं और इनके विषय बचपन, परिवार, विस्थापन, पहचान, विरासत और कश्मीर के बदलते सामाजिक परिदृश्य जैसे अहम मुद्दों को छूते हैं।

10 सितंबर तक तक चलने वाले इस इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में इन फिल्मों की स्क्रीनिंग न केवल दर्शकों के लिए एक अनोखा अनुभव होगी बल्कि स्थानीय फिल्ममेकर्स को भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने का बड़ा अवसर मिलेगा। यह फेस्टिवल जम्मू-कश्मीर को सिर्फ एक लोकेशन के तौर पर नहीं, बल्कि कहानियों के एक जीवंत केंद्र के रूप में स्थापित करेगा।

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