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कश्मीर में 14 फीट ऊंचा 626 साल पुराना शिवलिंग, अफगानी और आतंकी हमले भी नहीं डिगा सके आस्था; अब बनेगा भव्य मंदिर

By Rahul SharmaEdited By: Prince Sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 08:51 AM (IST)

बारामूला के कानलीबाग में सदियों पुराना 12 फीट ऊंचा शिवलिंग अफगान और आतंकी हमलों के बावजूद अक्षुण्ण रहा है। अब ...और पढ़ें

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. 12 फीट ऊंचा प्राचीन शिवलिंग बारामूला के कानलीबाग में स्थित

  2. अफगान हमलों और आतंकवाद के दौर में भी रहा सुरक्षित

  3. 13 लाख रुपये से मंदिर निर्माण कार्य का भूमि पूजन

राहुल शर्मा, श्रीनगर। कश्मीर की वादियों में एक ऐसा प्राचीन शिवलिंग भी है, जो सदियों के बदलाव और आतंकवाद के लंबे दौर के बाद भी आज तक अपनी मौजूदगी का अहसास करवा रहा है।

न कोई भव्य मंदिर और न नियमित पूजा-अर्चना की व्यवस्था। बावजूद इसके बारामूला के कानलीबाग में खुले में 12 फीट ऊंचा यह शिवलिंग अपनी विशालता के कारण दूर से ही ध्यान खींचता है।

स्थानीय हिंदुओं में शिवलिंग के प्रति अटूट आस्था है। बताया जाता है कि 14वीं शताब्दी में अफगान हमले में यह मंदिर क्षतिग्रस्त हो गया था पर शिवलिंग यथा स्वरूप में रहा।

लंबे समय से यह शिवलिंग एक पेड़ के नीचे था। अब पेड़ भी गिर गया है और शिवलिंग के पास की मिट्टी भी धीरे-धीरे खिसक रही है। श्रद्धालुओं के लंबे प्रयास के बाद अब यहां मंदिर का निर्माण शुरू हुआ है।

अब जल्द ही यहां शंख, घंटियां और घड़ियाल गूंजेंगे। मंदिर निर्माण के लिए पिछले 10 वर्षों से प्रयास कर रहे स्थानीय निवासी शिवानंद रोहित रैणा ने बताया कि बारामूला के उपायुक्त सईद फकरूदीन हामिद ने हाल ही में 13 लाख रुपये मंजूर किए हैं।

इसके बाद मंगलवार को यहां भूमि पूजन किया गया और मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कर दिया गया है। पहले चरण में मंदिर की दीवार और शिवलिंग के संरक्षण के लिए एक हाल का निर्माण किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु बैठकर पूजा-अर्चना कर सकें। यह काम चरणबद्ध तरीके से पूरा होगा।

उन्होंने कहा कि अगर यह कदम अब भी नहीं उठाया जाता तो शिवलिंग को नुकसान पहुंच सकता था। मंदिर के निर्माण से इस स्थल को फिर से एक धार्मिक पहचान मिल सकेगी। रैणा ने बताया कि उन्होंने शिवलिंग के संरक्षण के लिए लगातार उपराज्यपाल को पत्र लिखे। उन्होंने 13 लाख रुपये मंजूर करने पर उपराज्यपाल प्रशासन और जिला प्रशासन का आभार जताया है। वहीं भूमि पूजन में बारामूला के उपायुक्त भी मौजूद रहे।

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कश्मीरी हिंदू श्रद्धालु बारामूला कानलीबाग में मंदिर निर्माण शुरू करवाने से पहले भूमि पूजन करते हुए।

प्राचीन शैव परंपरा और अतीत की यादों से जुड़ा है पवित्र शिवलिंग

कानलीबाग का शिवलिंग केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं, बल्कि कश्मीर की प्राचीन शैव परंपरा और क्षेत्र के ऐतिहासिक अतीत की याद दिलाता है।

बारामूला की श्री सनातन धर्म सभा भी इसे कश्मीर की प्राचीन शैव परंपरा का महत्वपूर्ण अवशेष मानती है। संस्था की वेबसाइट के अनुसार, यहां कभी मंदिर हुआ करता था, अफगान शासन और 1947 की हिंसा में मंदिर नष्ट होने के बाद शिवलिंग बचा रहा। हालांकि मंदिर के निर्माण और शिवलिंग की सटीक आयु की पुष्टि के लिए इस स्थल का वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण जरूरी है।

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दैनिक जागरण ने इस मुद्दे को किया प्रकाशित

7 शिवलिंग और इसी तरह के बारामूला में है मौजूद

ऑल माइनॉरिटी इंप्लाइज एसोसिएशन कश्मीर के महासचिव शिवानंद रोहित रैणा ने बताया कि यह शिवलिंग पट्टन में स्थित बुंगस गुफाओं में विराजमान शिवलिंग से मेल खाते हैं। पूर्वज बताते हैं कि बारामूला में इस तरह के सात शिवलिंग अलग-अलग जगह पर हैं। 12 फीट ऊंचा एक अन्य शिवलिंग कानलीबाग गुरुद्वारे के भीतर विराजमान है।

सिख समुदाय उसका संरक्षण करता है। इसके अलावा एक शिवलिंग शिरी में खेत में है। उसकी हालत भी सही नहीं है। एक बोनियार में मंदिर के भीतर और टंगमर्ग में भी शिवलिंग खुले में है। दो अन्य शिवलिंग का पता नहीं चल पाया है। उनके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।

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