किडनैप किया, गोली मारी फिर पेड़ से लटका दी लाश... कौन थे कश्मीरी हिंदू 'प्रेमी'? 36 साल पहले बेरहमी से हुई हत्या
कश्मीरी हिंदू लेखक सर्वानंद कौल 'प्रेमी' और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की 36 साल पहले हुई हत्या का मामला एसआईए ...और पढ़ें

36 साल पहले मारे गए थे सर्वानंद कौल (सोशल मीडिया)
HighLights
सर्वानंद कौल 'प्रेमी' और बेटे की हत्या का मामला फिर खुला
36 साल पहले उग्रवाद में हुई थी निर्मम हत्या
एलजी सिन्हा के निर्देश पर एसआईए कर रही जांच
डिजिटल डेस्क, जम्मू। कश्मीरी हिंदू लेखक और कवि सर्वानंद कौल 'प्रेमी' और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की 36 साल पहले उग्रवाद के दौरान हत्या कर दी गई थी।
इस मामले में फाइल एक बार फिर से खोल दी गई है और एसआईए जांच में जुटी है। उनकी हत्या की गुत्थी फिर सुलझने के संकेत मिल रहे हैं। ये कवि सर्वानंद कौल कौन थे और उनकी हत्या क्यों की गई। आइए, विस्तार से समझते हैं।
कौन थे सर्वानंद कौल प्रेमी?
सर्वानंद कौल प्रेमी एक राइटर होने के साथ-साथ सोशल एक्टिविस्ट थे। साल 1990 के दशक में उनकी और उनके बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह कश्मीर के अनंतनाग इलाके में रहते थे।
प्रेमी शिक्षा विभाग में एक टीचर के रूप में काम करते थे। साल 1979 में वह शिक्षा विभाग से रिटायर हुए थे। उनके आसपास के मुसलमानों और हिंदुओं से अच्छे संबंध थे।
साल 1990 में जब कश्मीर में उग्रवाद चरम पर था और उस समय जब कश्मीरी हिंदू घाटी छोड़कर जा रहे थे। उस वक्त उन्होंने वहीं रहने का फैसला किया। वह एकमात्र ऐसा परिवार था, जो विस्थापन के दौरान अंत तक टिका रहा।
कश्मीर नहीं छोड़ने पर मिली सजा
कश्मीर न छोड़ने की कीमत सर्वानंद कौल और उनके बेटे वीरेंद्र कौल को चुकानी पड़ी। साल 1990 के अप्रैल में कुछ लोग उनके घर आए। उनके हाथों में बंदूकें थीं। उन्होंने प्रेमी से कहा कि उनके कमांडर उनसे मिलना चाहते हैं। जिसके बाद सर्वानंद और उनके बेटे उन बंदूकधारियों पर यकीन करके उनके साथ चले गए। लेकिन बाद में दोनों लौटकर नहीं आए। कुछ समय बाद उनके शव पेड़ पर लटके मिले।
सामाजिक सौहार्द के प्रतीक रहे प्रेमी व उनके बेटे का कट्टरपंथी आतंकियों ने घर से अपहरण कर गोली मार दी थी और उनके शव पेड़ पर लटका दिए थे।
इस संबंध में अनंतनाग के डुरू थाने में मामला दर्ज भी हुआ पर जांच को फाइलों में दफन कर दिया गया। एसआइए के अधिकारियों के अनुसार, अगस्त में ऐसे लंबित मामलों की जांच जारी है। सरला भट्ट हत्याकांड और सर्वानंद कौल मर्डर केस उन मामलों में शामिल हैं, जो अभी भी पेंडिंग है। लेकिन अब इस मामले में फाइलें खुल रही हैं।
एलजी सिन्हा ने दिए निर्देश
जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के दौर में अपहरण, हत्या और दरिंदगी के अधिकतर मामले फाइलों में ही दब गए और उनकी कभी जांच ही नहीं हुई। इसके बाद उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने ऐसे सभी मामलों का संज्ञान लिया और जांच के निर्देश दिए। ऐसे मामलों की जांच के साथ पीड़ित परिवारों के सदस्यों को सरकारी नौकरी देने की पहल भी हुई है।
