‘सरला भट्ट को जानता तक नहीं था...’, 36 साल पुराने हत्याकांड में यासीन मलिक का दावा, कहा- हत्या के वक्त खुद घायल था
यासीन मलिक ने 36 साल पुराने सरला भट्ट हत्याकांड में खुद पर लगे आरोपों को खारिज किया है। मलिक का ...और पढ़ें

यासीन मलिक ने सरला भट्ट हत्याकांड में लगे आरोपों को खारिज किया। (फाइल फोटो)
HighLights
यासीन मलिक ने सरला भट्ट हत्याकांड के आरोप नकारे।
दावा किया, हत्या के समय गंभीर रूप से घायल था।
कहा, सरला भट्ट को कभी नहीं जानता था।
नवीन नवाज, श्रीनगर। कश्मीरी पंडित नर्स सरला भट्ट की हत्या के 36 साल पुराने मामले में जेकएलएफ चेयरमैन यासीन मलिक ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। श्रीनगर की अदालत में दाखिल हलफनामे में मलिक ने कहा है कि 19 अप्रैल 1990 को जब सरला भट्ट की हत्या हुई, उस समय वह खुद गंभीर रूप से घायल था और जिंदगी-मौत से जूझ रहा था। उसका दावा है कि वह सरला भट्ट को जानता तक नहीं था और पहली बार उसके बारे में फरवरी 1991 में सुना।
मलिक का यह बयान ऐसे समय आया है, जब जम्मू-कश्मीर प्रदेश जांच एजेंसी (एसआइए) ने 29 जून 2026 को श्रीनगर की विशेष टाडा अदालत में सरला भट्ट हत्याकांड में चार्जशीट दाखिल की है। चार्जशीट में तत्कालीन जेेकएलएफ चीफ कमांडर यासीन मलिक और खुर्शीद चालकू को कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया गया है।
मलिक ने हलफनामे में दावा किया कि फरवरी 1991 में हिरासत के दौरान उसे पहली बार सरला भट्ट के बारे में जानकारी मिली। उस समय उसे तिहाड़ जेल से दिल्ली के महरौली स्थित एक फार्महाउस में रखा गया था। मलिक के मुताबिक, वहां एक इंटेलीजेंस ब्यूरो अधिकारी ने उससे बातचीत के दौरान बताया कि सुरक्षा एजेंसियों को खुर्शीद चालकू पर सरला भट्ट की हत्या में शामिल होने का संदेह है।
'सरला भट्ट कौन हैं?'
सरला भट्ट को सुरक्षा एजेंसियों के लिए मुखबिर बताए जाने और उनकी सूचना पर 8 अप्रैल 1990 को श्रीनगर के नरवारा इलाके में बीएसएफ की कार्रवाई के आरोप को भी मलिक ने नकारा है। उसने कहा कि सरला भट्ट किसी सुरक्षा एजेंसी के लिए काम नहीं कर रही थीं और नरवारा में हुई कार्रवाई के लिए वह जिम्मेदार नहीं थीं।
मलिक के अनुसार, बीएसएफ को भी उस अभियान से पहले उसकी मौजूदगी की जानकारी नहीं थी। उसने दावा किया कि हाफिज बजाज के घर पर छापे के दौरान बचने के लिए उसने पांचवीं मंजिल से छलांग लगा दी थी। इस घटना में उसकी गर्दन और शरीर की कई हड्डियां टूट गईं और सिर व कान में गंभीर चोटें आईं। उसका दावा है कि वह कई दिनों तक कोमा में रहा और उसकी मौत की खबर तक फैल गई थी।
मलिक ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि 19 अप्रैल को सरला भट्ट की हत्या के दिन भी वह आठ अप्रैल की घटना में लगी चोटों से उबर नहीं पाया था। ऐसे में वह हत्या का आदेश देने या साजिश रचने की स्थिति में कैसे हो सकता था।
SIA की जांच में मिले JLF नोट पर उठाए सवाल
एसआइए की जांच में सामने आए कथित हस्तलिखित जेकएलएफ नोट पर भी मलिक ने सवाल उठाया है। बताया गया था कि घटनास्थल से मिले नोट में हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए जावेद मीर, शेख अब्दुल हमीद और यासीन मलिक के नाम लिखे थे।
मलिक ने कहा कि यदि यह नोट 1990 में बरामद हुआ था तो उसी समय उसे और उसमें नामित अन्य लोगों को मामले में आरोपी क्यों नहीं बनाया गया। उसने यह भी कहा कि अगस्त 1990 में उसकी गिरफ्तारी के समय उसके खिलाफ टाडा के तहत करीब दो दर्जन मामले दर्ज थे, लेकिन इनमें सरला भट्ट की हत्या का मामला शामिल नहीं था।
मलिक ने खुर्शीद चालकू को बताया अपना पूर्व गाइड
मलिक ने खुर्शीद चालकू को अपना पूर्व गाइड बताते हुए कहा कि उसे और कैप्टन राशिद को 1988-89 में युवाओं को सीमा पार कराने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। दोनों 1990 के शुरुआती महीनों में श्रीनगर सेंट्रल जेल से फरार हो गए थे। मलिक का दावा है कि बाद में जेेकएलएफ ने खुर्शीद चालकू के खिलाफ कार्रवाई का फैसला किया था, लेकिन वह फरार होने में सफल रहा।
मलिक के हलफनामे में किए गए दावे उसके बचाव पक्ष का हिस्सा हैं। इन्हें अदालत द्वारा स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। दूसरी ओर, एसआइए की चार्जशीट में मलिक और खुर्शीद चालकू को आरोपी बनाया गया है। अब अभियोजन और बचाव पक्ष के दावों की सच्चाई साक्ष्यों के आधार पर अदालत में परखी जाएगी और अंतिम फैसला न्यायालय ही करेगा।
