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25 जनवरी की रात... जब 23 कश्मीरी हिंदुओं की हत्या से दहली थी घाटी, अब खुली वंधामा नरसंहार की फाइल; SIA की जांच तेज

Published: Mon, 24 Aug 2026 12:28 PM (IST)

कश्मीर घाटी में आतंकवाद से जुड़े दशकों पुराने मामलों की जांच तेज हो गई है, जिसमें सरला भट्ट, सर्वानंद कौल ...और पढ़ें

कश्मीर में आतंकवाद के दशकों पुराने मामलों की जांच में तेजी। (फाइल फोटो)

कश्मीर में आतंकवाद के दशकों पुराने मामलों की जांच में तेजी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. कश्मीर में दशकों पुराने आतंकवाद मामलों की जांच तेज हुई।

  2. सरला भट्ट, प्रेमी, गंजू, टपलू, वंधामा मामलों की जांच जारी।

  3. SIA ने कई आरोपियों की पहचान की, कुछ भूमिगत हुए।

राज्य ब्यूरो, जागरण, श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकवाद से जुड़े दशकों पुराने मामलों की जांच कुछ समय से तेज हुई है। सरला भट्ट हत्याकांड में आरोप पत्र दाखिल करने और कश्मीरी पंडित लेखक सर्वानंद कौल प्रेमी व उनके बेटे वीरेंद्र कौल की हत्या के मामले में छापेमारी के बाद राज्य जांच एजेंसी ने अब जज नीलकंठ गंजू, भाजपा नेता टीका लाल टपलू और वंधामा नरसंहार मामलों की जांच शुरू की है। पहले जानिए ये मामले क्या थे....

जज नीलकंठ गंजू और टीका लाल टपलू की हत्या

जज नीलकंठ गंजू ने आतंकवादी मकबूल भट्ट और उसके सहयोगी को फांसी की सजा सुनाई थी। 4 नवंबर 1989 को श्रीनगर के हरि सिंह स्ट्रीट में आतंकियों ने उनकी हत्या कर दी थी। इसी तरह तत्कालीन भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष टीका लाल टपलू की 13 सितंबर 1989 को श्रीनगर स्थित उनके घर में आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।

वंधामा में 23 कश्मीरी पंडितों की हत्या

गांदरबल जिले के वंधामा में 25 जनवरी 1998 में रात को आतंकियों ने 23 कश्मीरी पंडितों की सामूहिक हत्या कर दी थी। मृतकों में नौ महिलाएं और चार बच्चे शामिल थे। बताया जाता है कि घाटी से पलायन नहीं करने के कारण कश्मीरी हिंदुओं को निशाना बनाया गया था।

ये सभी मामले तीन से साढ़े तीन दशक पुराने हैं और इनमें से कुछ मामलों की जांच में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। राज्य जांच एजेंसी की टीमों ने कई हत्याओं में शामिल आतंकियों, ओवर ग्राउंड वर्कर्स और अन्य लोगों की पहचान कर ली है। इनमें से कुछ आरोपियों की समय के साथ मौत हो चुकी है, जबकि कुछ अब भी जीवित हैं।

हालांकि कहा जा रहा है कि एजेंसी द्वारा फिर से जांच शुरू करने के बाद इनमें से कई आरोपी भूमिगत हो गए हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।जांच से जुड़े कुछ मामले संबंधित जिलों की पुलिस को भी सौंपे गए हैं। जिला पुलिस ने भी कई पुराने मामलों में जांच फिर से शुरू कर दी है।

बिलावर का मामला, फाइल गायब

जम्मू संभाग में भी पुराने मामलों की जांच फिर से शुरू की गई है। हालांकि कठुआ जिले के बिलावर तहसील के ऊपरी मल्हार इलाके में 2003 में अल्पसंख्यक समुदाय के तीन सदस्यों की हत्या से जुड़े मामले की फाइल ही गायब बताई जा रही है। यह मामला राज्य जांच एजेंसी को सौंपा गया था, लेकिन फाइल नहीं मिलने के कारण एजेंसी अब तक जांच शुरू नहीं कर सकी है।

अधिकारियों की ओर से फाइल तलाशने के प्रयास किए जा रहे हैं। फाइल मिलने के बाद ही एजेंसी औपचारिक रूप से मामले की जांच आगे बढ़ा सकेगी।

सरला भट्ट मामले में 737 पन्नों की चार्जशीट

राज्य जांच एजेंसी ने 1990 में स्किम्स की स्टाफ नर्स सरला भट्ट के अपहरण और हत्या के मामले में श्रीनगर की विशेष अदालत के समक्ष 737 पन्नों का विस्तृत आरोप पत्र दाखिल किया है।सरला भट्ट का 18 अप्रैल 1990 को स्किम्स के पास से अपहरण किया गया था। उन्हें कथित तौर पर यातनाएं दी गईं और बाद में श्रीनगर के मलभघ स्थित ओमर कालोनी इलाके में गोली मारकर हत्या कर दी गई।

आरोप पत्र में प्रतिबंधित जेकेएलएफ के पूर्व प्रमुख मोहम्मद यासीन मलिक के अलावा खुर्शीद अहमद चाल्कू, अब्दुल हमीद शेख, मोहम्मद यूसुफ सोफी उर्फ इदरीस और गुलाम मोहम्मद टपलू को आरोपी बनाया गया है।

प्रेमी और उनके बेटे की हत्या में छापेमारी

राज्य जांच एजेंसी ने 13 अगस्त को कश्मीरी पंडित लेखक सर्वानंद कौल प्रेमी और उनके बेटे वीरेंद्र कौल की 36 साल पहले हुई हत्या के मामले में नौ स्थानों पर छापेमारी की थी।छापेमारी राजौरी जिले के गंभीर मुगलान निवासी मारे जा चुके आतंकवादी शेर खान के घर और उसके रिश्तेदारों के राजौरी, जम्मू और बारामुला स्थित परिसरों में की गई थी।हालांकि शेर खान की भी प्रेमी और उनके बेटे की हत्या के कुछ वर्ष बाद जम्मू संभाग के डोडा जिले में मौत हो गई थी। अधिकारियों का मानना है कि लंबित मामलों में जांच आगे बढ़ने से उन लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है, जो दशकों पहले हुई इन हत्याओं में कथित तौर पर शामिल थे।