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क्या है संविधान की छठी अनुसूची, लद्दाख क्यों होना चाहता है इसमें शामिल; अभी तक किन राज्यों के पास है यह विशेष दर्जा?

Published: Fri, 16 Oct 2026 12:48 PM (GMT+05:30)

लद्दाख के नेता केंद्र से संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होने की मांग कर रहे हैं ताकि उनकी भूमि, ...और पढ़ें

लद्दाख क्यों चाहता है छठी अनुसूची में शामिल होना (जागरण ग्राफिक्स)

लद्दाख क्यों चाहता है छठी अनुसूची में शामिल होना (जागरण ग्राफिक्स)

HighLights

  1. लद्दाख छठी अनुसूची में शामिल होने की मांग कर रहा है

  2. यह अनुसूची स्थानीय संस्कृति और पर्यावरण की रक्षा करती है

  3. वर्तमान में मेघालय, असम, त्रिपुरा, मिजोरम को यह दर्जा प्राप्त है

डिजिटल डेस्क, जम्मू। Sonam Wangchuk Ladakh protest: गुरुवार को केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख के विभिन्न मुद्दों को लेकर स्थानीय नेताओं के साथ केंद्र की बैठक हुई। पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगचुक (sonam wangchuk) ने इस बातचीत को संतोषजनक नहीं बताया। अब 22 अक्टूबर को यह मीटिंग होनी है। लद्दाख के कई ऐसे मुद्दे हैं, जिनके समाधान के प्रयास लंबे समय से अनवरत जारी हैं।

स्थानीय संगठन लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक एलायंस (KDA) की जब भी इन मुद्दों को लेकर केंद्र के साथ बैठक होती है। उनमें एक मांग हमेशा चर्चा का विषय रहती है- 'लद्दाख को छठी अनसूची में शामिल किया जाए- (sixth schedule special status)'। स्थानीय संगठन मानते हैं कि उनके रोजगार के अवसर, नाजुक पर्यावरण की सुरक्षा और संस्कृति का रखरखाव इसी अनुसूची के तहत हो सकता है।

संविधान की छठी अनसूची क्या है, कैसे किसी प्रदेश के लोगों को यह अनुसूची संरक्षण प्रदान करती है, अब तक किन राज्यों के पास यह स्पेशल दर्जा है? इस आर्टिकल में सभी सवालों के जवाब जानेंगे।

क्या है छठी अनुसूची?

भारतीय संविधान में वर्तमान में कुल 25 भाग हैं, जिनके अंतर्गत 395 आर्टिकल्स (अनुच्छेद) हैं। भारतीय कानून व्यवस्था से लेकर अधिकारों और शासकीय कार्यप्रणाली का विवरण इन्हीं भागों और आर्टिकल्स में मिलता है। इसी के साथ हमारे संविधान में 12 अनुसूचियां भी शामिल हैं। यह संविधान के आर्टिकल्स से संबंधित अतिरिक्त और तकनीकी जानकारियों को स्पष्ट करती हैं।

भारतीय संविधान की छठी अनुसूची में पूर्वोत्तर राज्यों को कुछ विशेष प्राशसकीय अधिकार दिए गए हैं यानी कुछ विशेष मामलों में ये राज्य खुद से फैसला ले सकते हैं। इसके तहत आदिवासी संस्कृति और विरासत के संरक्षण के लिए इन राज्यों में 'राज्य स्वायत्त जिला परिषदों- Autonomous District Concils- ADCc' की स्थापना की गई है।

ADCs को अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत क्षेत्रों से जुड़े कानून बनाने का अधिकार है। इनमें जमीन, जंगल, खेती और विरासत आदि शामिल हैं। इस तरह ये परिषदें राज्य में लघु राज्य के रूप में काम करती हैं। राज्यपाल इन्हें सीधे नियंत्रित करता है।

इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

इन परिषदों की स्थापना के पीछे भी एक कारण है। दरअसल, ऐसे राज्यों को आदिवासी या जनजातीय पहचान के लिए और उससे जुड़े फैसलों के लिए यहां के लोगों को स्वायत्ता प्रदान की जाती है। ऐसा तर्क है कि यहां के स्थानीय लोग अपनी विरासत और संस्कृति को भली प्रकार समझते हैं, इसलिए इनसे जुड़े फैसले लेने का भी इन्हें ही अधिकार मिलना चाहिए।

किन राज्यों को मिला यह अधिकार?

भारतीय संविधान के छठी अनुसूची को मौजूदा समय में मेघालय, असम, त्रिपुरा और मिजोरम के लिए लागू किया गया है। भारतीय सरकार अधिनियम-1935 के तहत इन्हें बहिष्कृत क्षेत्रों के रूप में वर्गीकृत किया गया। 

लद्दाख क्यों चाहते हैं इसमें शामिल होना?

लद्दाख के लोग भी संविधान की छठी अनुसूची में शामिल होना चाहते हैं। उनका तर्क है कि अपनी जमीन, संस्कृति और संसाधनों की रक्षा को अधिकार उन्हें मिलना चाहिए। लद्दाख ने लगातार यह मांग की है कि उसे पूर्ण राज्य का दर्जा मिले और छठी अनुसूची (अनुच्छेद 244) के तहत शामिल किया जाए।

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस क्षेत्र के लोगों के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की तरह अनुच्छेद 371 (K) के तहत संवैधानिक सुरक्षा देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत लद्दाख को एक 'हाइब्रिड असेंबली मॉडल' उपलब्ध करवाया जाएगा। 

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