'फर्क 19-20 का नहीं, जमीन-आसमान का था'; लद्दाख के मुद्दों पर केंद्र के साथ हुई बैठक पर बोले सोनम वांगचुक
लद्दाख की मांगों पर गृह मंत्रालय और प्रतिनिधियों की बैठक बेनतीजा रही, जिसमें सोनम वांगचुक ने बड़े मतभेदों पर निराशा ...और पढ़ें
HighLights
लद्दाख की मांगों पर MHA संग बैठक बेनतीजा रही
सोनम वांगचुक ने कहा, 'फर्क जमीन-आसमान का था'
अगली बैठक 22 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित है
डिजिटल डेस्क, जम्मू। केंद्रशासित प्रदेश लद्दाख की मांगों को लेकर गुरुवार को एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलांयस के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ मीटिंग हुई। इस बैठक का दोनों पक्षों के बीच अंतर होने के कारण कोई निष्कर्ष नहीं निकल पाया। अगली बैठक अब 22 अक्टूबर को होगी।
बैठक के संदर्भ में पर्यावरणविद और शिक्षाविद सोनम वांगुचक ने प्रतिक्रिया दी है। एक्टिविस्ट ने कहा कि कुछ मतभेद हैं, और मैं बहुत ज्यादा डिटेल में नहीं जाऊंगा। उन्होंने कहा है कि वे कल सुबह तक एक और संशोधित ड्राफ्ट (संशोधित प्रस्ताव) पेश करेंगे। तब तक हम इसे विफलता नहीं, बल्कि बातचीत का एक और चरण मानेंगे।
हालांकि, आज का नतीजा लद्दाख के लिए संतोषजनक नहीं रहा, और हम असंतुष्ट हैं। हम उनके संशोधित ड्राफ्ट की समीक्षा करेंगे। 22 तारीख को एक और बैठक का प्रस्ताव है, और हमें उम्मीद है कि संशोधित ड्राफ्ट में कुछ बदलाव देखने को मिलेंगे। हमें कुछ छोटे-मोटे मतभेदों की उम्मीद थी, लेकिन यहां तो बहुत बड़ा अंतर है। हमारी मुख्य बातें लोकतांत्रिक ढांचे, विधानसभा और उससे जुड़े सुरक्षा उपायों को लेकर थीं। हालांकि, इन वार्ताओं में कोई खास प्रगति नहीं हुई है, और हम निराश हैं। हमें उम्मीद है कि 22 तारीख को दिल्ली में होने वाली बैठक में कोई सकारात्मक नतीजा निकलेगा। -सोनम वांगचुक, शिक्षाविद
जमीन-आसमान का फर्क था: सोनम वांगचुक
सोनम वांगचुक ने आगे का कि हम उम्मीद कर रहे थे कि रिवाइज्ड (संशोधित) ड्राफ्ट में थोड़ा बहुत यानी 19-20 का फर्क होगा। लेकिन सच्चाई यह है कि फर्क जमीन-आसमान का था। इसीलिए हम इंतजार कर रहे हैं कि अगर उनके संशोधित ड्राफ्ट में थोड़ा सकारात्मक बदलाव आता है तो ठीक है, अन्यथा यह हमारे लिए बेहद आश्चर्यजनक होगा।
मीटिंग में मुख्य रूप से किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इस सवाल का जवाब देते हुए वांगचुक ने कहा कि विधानसभा का स्वरूप कैसा हो और उसके सेफगार्ड्स कैसे तय किए जाएं। ऐसे कई मुद्दों को मीटिंग में डिसकस किया गया। लेकिन उम्मीद के अनुसार हम इस बैठक को संतोषजनक नहीं कह सकते। हालांकि, हम अभी भी उम्मीद करते हैं कि इसका कोई न कोई सार्थक निष्कर्ष जरूर निकलेगा।
दिल्ली में ही होगी अगली बैठक
इस संदर्भ में अगली बैठक 22 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित की जाएगी, जिसमें दोनों प्रस्तावों पर आगे चर्चा कर सहमति बनाने का प्रयास किया जाएगा। वांगचुक के अनुसार, सरकार के प्रस्ताव (अनुच्छेद 371 जैसी सुरक्षा) में एक व्यावहारिक पेंच है।
इसके प्रभावी ढंग से काम करने के लिए लद्दाख में एक निर्वाचित विधायी निकाय (चुनी हुई विधानसभा) का होना जरूरी है। लेकिन, फिलहाल लद्दाख के पास इतना आंतरिक राजस्व नहीं है कि वह एक पूर्ण राज्य की व्यवस्था चला सके और सरकारी कर्मचारियों को वेतन दे सके। इस कमी को दूर करने के लिए, लद्दाख के प्रतिनिधियों ने 'हाइब्रिड असेंबली मॉडल' के जरिए एक बीच का रास्ता सुझाया है। यह एक अस्थायी व्यवस्था है, जो लद्दाख को पूर्ण राज्य के भारी-भरकम वित्तीय बोझ के बिना कानून बनाने की लोकतांत्रिक शक्तियां देती है।
