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जम्मू-कश्मीर में लश्कर आतंकियों को पनाह देने वाले 'मामा गैस' की संपत्ति जब्त, एनआईए की बड़ी कार्रवाई

Published: Mon, 12 Oct 2026 03:02 PM (IST)

एनआईए ने श्रीनगर में लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों को पनाह देने वाले गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ 'मामा गैस' की संपत्ति अटैच ...और पढ़ें

आतंकियों को पनाह देने वाले पर एनआईए का शिकंजा।

आतंकियों को पनाह देने वाले पर एनआईए का शिकंजा।

HighLights

  1. एनआईए ने 'मामा गैस' की संपत्ति अटैच की

  2. लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी आतंकियों को पनाह देने का आरोप

  3. संपत्ति का उपयोग आतंकी गतिविधियों के लिए किया गया

राज्य ब्यूरो, जम्मू। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने श्रीनगर के हजरतबल क्षेत्र के डानिहामा गांव में लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी आतंकियों को कथित तौर पर पनाह देने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आरोपी गुलाम मोहम्मद मीर उर्फ मामा गैस की आवासीय संपत्ति अटैच कर दी है।

एजेंसी ने यह कार्रवाई गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 25 के तहत एनआईए महानिदेशक की पूर्व मंजूरी के बाद की। जांच एजेंसी के अनुसार, संबंधित संपत्ति का इस्तेमाल पाकिस्तानी आतंकियों को आश्रय देने और आतंकी नेटवर्क से जुड़े आपत्तिजनक साक्ष्य छिपाने के लिए किया गया था।

जांच में संपत्ति और सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश के बीच सीधा संबंध सामने आने का दावा किया गया है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए NIA को सौंपी जिम्मेदारी

एनआईए के मुताबिक, यह मामला मूल रूप से 31 मार्च 2026 को श्रीनगर के जकूरा पुलिस थाने में एफआईआर संख्या 24/2026 के तहत दर्ज किया गया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एनआईए को सौंप दी गई और एजेंसी ने इसे अपने स्तर पर पुनः दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।

जांच के दौरान कथित तौर पर ऐसे स्थानीय ओवर ग्राउंड वर्कर्स (ओजीडब्ल्यू) के नेटवर्क का पता चला, जो पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा के हैंडलरों के संपर्क में रहकर आतंकियों की घुसपैठ, आवाजाही, ठहरने और अन्य जरूरी सुविधाओं का इंतजाम कर रहे थे।

एजेंसी का आरोप है कि इस नेटवर्क का मकसद सरकारी प्रतिष्ठानों, सुरक्षा बलों और आम नागरिकों के खिलाफ आतंकी हमलों को अंजाम देने में मदद पहुंचाना था।

गुलाम मोहम्मद मीर के घर से मिले थे आतंकी

जांच के सिलसिले में एनआईए ने 6 अप्रैल 2026 को डानिहामा स्थित गुलाम मोहम्मद मीर के आवास की तलाशी ली थी। इस दौरान दो संदिग्ध पाकिस्तानी आतंकियों की पहचान अबू हुरैरा और खुबैब के रूप में की गई, जिनके लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े होने का संदेह जताया गया।

तलाशी के दौरान मिले विस्फोटक पदार्थ

तलाशी के दौरान विस्फोटक जैसा पदार्थ, डिजिटल उपकरण और अन्य आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद कर जब्त की गई। एनआईए के अनुसार, जांच में यह आरोप सामने आया कि गुलाम मोहम्मद मीर ने जानबूझकर अपने आवास को आतंकियों के सुरक्षित ठिकाने के रूप में इस्तेमाल होने दिया और उनकी गतिविधियों को सुविधाजनक बनाने में मदद की।

एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है। एनआईए अब आतंकी नेटवर्क को रसद, आश्रय और अन्य सहायता उपलब्ध कराने वाले दूसरे ओवर ग्राउंड वर्कर्स, सहयोगियों तथा पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

जांच का उद्देश्य सीमा पार से संचालित आतंकी साजिश में शामिल सभी लोगों की पहचान कर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना है।

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