जम्मू में कितने रोहिंग्या रह रहे, कहां-कहां बसे हैं? सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय दावों में बड़ा अंतर
जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या को लेकर सरकारी आंकड़ों (5,000) और स्थानीय दावों (14,000) में बड़ा अंतर ...और पढ़ें

जम्मू में रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर अलग-अलग दावे। (फाइल फोटो)
HighLights
जम्मू में रोहिंग्या संख्या पर सरकारी-स्थानीय आंकड़ों में बड़ा अंतर।
अवैध कब्जे, बुनियादी सुविधाओं पर दबाव और सुरक्षा चिंताएं प्रमुख।
प्रशासन से दस्तावेजों की जांच और अवैध कब्जों पर कार्रवाई की मांग।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की मौजूदगी का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। कश्मीर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान कर उन्हें वापस भेजने की कार्रवाई के बाद जम्मू में भी ऐसे अभियान की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्षों से हो रहे अनियंत्रित बसाव से सरकारी जमीन पर कब्जों, बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं पर दबाव और जनसांख्यिकी में बदलाव की आशंकाएं बढ़ी हैं।
जम्मू में रोहिंग्या नागरिकों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आ रहे हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकारी आंकड़ों में इनकी संख्या करीब पांच हजार बताई जाती है, जबकि स्थानीय सूत्रों का दावा है कि अकेले जम्मू जिले में लगभग 14 हजार रोहिंग्या रह रहे हैं।
नरवाल, बठिंडी, चौआदी, छन्नी रामा, सुंजवां, तालाब तिल्लो और सिदड़ा सहित कई इलाकों में इनकी बस्तियां होने की बात कही जाती है। हालांकि, इन आंकड़ों की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। वर्ष 2021 में सत्यापन अभियान के दौरान 270 से अधिक रोहिंग्या नागरिकों को हिरासत में लेकर हीरानगर स्थित होल्डिंग सेंटर में रखा गया था। इसके बाद भी उनकी कानूनी स्थिति और वापसी का मामला चर्चा में रहा है।
अवैध कब्जों और दस्तावेजों की जांच जरूरी
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ बस्तियां सरकारी और वन भूमि पर बसाई गई हैं। आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और बिजली-पानी के कनेक्शन की वैधता पर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकती है। आधार कार्ड अपने आप भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है।
रोहिंग्या नागरिकों के पास यूएनएचसीआर के पहचान पत्र होने से उन्हें भारतीय नागरिकता या स्थायी निवास का स्वत अधिकार नहीं मिलता। फिर भी उनकी पहचान, कानूनी स्थिति और वापसी की प्रक्रिया लागू कानूनों के अनुसार पूरी करनी होगी।
प्रशासन को वास्तविक संख्या स्पष्ट करने, दस्तावेजों की जांच करने और अवैध कब्जों पर कार्रवाई के लिए समयबद्ध योजना बनानी चाहिए। तथ्य-आधारित कार्रवाई से ही सुरक्षा संबंधी चिंताओं और स्थानीय लोगों की शिकायतों का समाधान संभव है।
जम्मू में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों का मुद्दा
कितनी है संख्या?
- करीब 5,000: उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, रोहिंग्या नागरिकों की सरकारी आंकड़ों में बताई गई संख्या।
- करीब 14,000: स्थानीय सूत्रों का जम्मू जिले में रोहिंग्या नागरिकों की संख्या को लेकर दावा।
- 13,700 से अधिक: वर्ष 2022 में सामने आए आंकड़ों के अनुसार, जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों सहित विदेशी नागरिकों की संयुक्त संख्या। यह वर्तमान आंकड़ा नहीं है।
किन इलाकों में बस्तियां होने की बात?
नरवाल, बठिंडी, चौआदी, छन्नी रामा, सुंजवां, तालाब तिल्लो और सिदड़ा सहित जम्मू के विभिन्न क्षेत्रों में रोहिंग्या नागरिकों की बस्तियां होने की जानकारी दी गई है। प्रत्येक क्षेत्र में वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
मुख्य चुनौतियां?
- विदेशी नागरिकों की सही पहचान और नागरिकता का सत्यापन।
- सरकारी एवं वन भूमि पर अवैध कब्जों की जांच।
- फर्जी आधार कार्ड, मतदाता पहचान पत्र और अन्य दस्तावेजों के मामलों की जांच।
- बिजली, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं के उपयोग का नियमानुसार सत्यापन।
- सुरक्षा संबंधी आशंकाओं की खुफिया जानकारी और प्रमाणों के आधार पर जांच।
- लागू कानून के तहत प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया पूरी करना।
स्थायी रूप से नहीं रह सकते
वरिष्ठ वकील अंकुर शर्मा का कहना है कि रोहिंग्या नागरिकों की पहचान और उन्हें भारत से वापस भेजने के मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि प्रत्येक व्यक्ति की कानूनी स्थिति का अलग-अलग आकलन किया जाए। यूएनएचसीआर की ओर से जारी कार्ड किसी व्यक्ति की पहचान अथवा शरणार्थी पंजीकरण से संबंधित हो सकता है, लेकिन इससे उसे भारतीय नागरिकता नहीं मिलती और न ही भारत में स्थायी रूप से रहने का स्वत अधिकार प्राप्त होता है।
भारत 1951 के शरणार्थी सम्मेलन का सदस्य नहीं है। देश में विदेशी नागरिकों की स्थिति और उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए लागू कानूनों तथा केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन किया जाता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रशासन किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध बिना कानूनी प्रक्रिया अपनाए कार्रवाई कर सकता है।
विदेशी नागरिकों की पहचान और सत्यापन सुरक्षा के लिहाज से जरूरी
पूर्व पुलिस महानिदेशक एसपी वैद का कहना है कि जम्मू जैसे संवेदनशील क्षेत्र में विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके दस्तावेजों का सत्यापन सुरक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए।
प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि देश में रह रहे प्रत्येक विदेशी नागरिक का रिकार्ड उपलब्ध हो और उसकी नागरिकता तथा भारत में रहने की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो। यदि किसी व्यक्ति की गतिविधियों, दस्तावेजों या संपर्कों को लेकर संदेह है, तो संबंधित एजेंसियों को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच करनी चाहिए।
किसी व्यक्ति या पूरे समुदाय को केवल उसकी राष्ट्रीयता अथवा धार्मिक पहचान के आधार पर सुरक्षा के लिए खतरा मानना उचित नहीं है। सुरक्षा संबंधी निष्कर्ष ठोस जानकारी और जांच पर आधारित होने चाहिए।
