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'पाकिस्तान हमें बचा रहा', विलय दिवस से पहले फारूक अब्दुल्ला के बयान पर बवाल; मकबूल शेरवानी की शहादत भूल गए पूर्व CM?

Published: Sat, 24 Oct 2026 08:21 PM (IST)

फारूक अब्दुल्ला के पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताने वाले बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला। वीडियो से ली गई फोटो

जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला। वीडियो से ली गई फोटो

HighLights

  1. फारूक अब्दुल्ला ने पाकिस्तान को कश्मीरियों का जान बचाने वाला बताया।

  2. भाजपा ने बयान को अनुचित बताया, उमर अब्दुल्ला से जवाब मांगा।

  3. अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग तेज।

नवीन नवाज, जम्मू। अपनी विवादास्पद टिप्पणियों और दावों के लिए अक्सर चर्चा में रहने वाले नेशनल कान्फ्रेंस के अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला के एक बयान ने जम्मू-कश्मीर की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है।

बारामुला में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने पाकिस्तान को कश्मीरियों की जान बचाने वाला बताते हुए दावा किया कि भारत सरकार दुनिया के दबाव के कारण जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर खामोश है।

उनके इस बयान पर भाजपा प्रवक्ता रणबीर सिंह पठानिया ने सवाल उठाए, जबकि समाजसेवी सलीम रेशी ने 1947 के कबायली हमले और नेशनल कान्फ्रेंस के कार्यकर्ता मकबूल शेरवानी के बलिदान का हवाला देते हुए उनके दावे पर कड़ी आपत्ति जताई।

कैसे बलिदान हुए थे मकबूल शेरवानी?

संयोग यह है कि यह बयान जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय दिवस से ठीक दो दिन पहले उसी बारामूला में आया, जहां पाकिस्तानी हमलावरों को श्रीनगर की ओर बढ़ने से रोकने के प्रयास में मकबूल शेरवानी ने अपने प्राण गंवाए थे।

बारामूला में पार्टी कार्यकत्ताओं को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि पृरी दुनिया में हमारा पड़ोसी पीछे लगा है। हमारा पड़ोसी (पाकिस्तान) कई जगहों पर जाकर कश्मीर और कश्मीरियों के बारे में बात कर रहा है। इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोगों की जान बच रही है। अन्यथा, कश्मीरियों को लेकर भारत की मंशा सही नहीं है।

उन्होंने यह भी दावा किया कि केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर इसलिए 'खामोश' है, क्योंकि उस पर दुनिया का दबाव है। बता दें कि जिस डाक बंगले में रैली थी, वहां से चंद कदम की दूरी पर ही वह स्थान है, जहां मकबूल शेरवानी को बलिदान करने के बाद पाकिस्तानी हमलारों ने उसे लटकाया था।

'दिल्ली से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं?'

अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं? क्या आपको उम्मीद है कि वे आपको न्याय दिलाएंगे? संघर्ष करने का साहस रखें, वरना आपका अस्तित्व मिट जाएगा और आपकी पहचान खत्म हो जाएगी।

आज वे (भारत सरकार) दुनिया के दबाव के कारण खामोश हैं। हमारा पड़ोसी हर जगह जाकर कह रहा है कि कश्मीर का मुद्दा अभी तक हल नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान ऐसा नहीं करता, तो कश्मीरियों को लेकर भारत की मंशा सही नहीं होती।

भाजपा विधायक रणबीर सिंह पठानिया ने फारूक अब्दुल्ला के बयान को अनुचित करार देते हुए कांग्रेस और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की मजबूती पाकिस्तान की वजह से नहीं, बल्कि भारतीय संविधान, सुरक्षा बलों के सर्वोच्च बलिदान और यहां के लोगों के अदम्य साहस से सुनिश्चित हुई है।

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BJP ने सीएम उमर अब्दुल्ला से मांगा जवाब

पठानिया ने कहा कि पाकिस्तान ने 1947 में कबायली आक्रमण कराया और लंबे समय से आतंकवाद को बढ़ावा देकर जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने का काम किया है। उन्होंने कांग्रेस के नेतृत्व वाले आईएनडीआई गठबंधन और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से सवाल किया कि क्या वे फारूक अब्दुल्ला के बयान का समर्थन करते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि बयान में संविधान या कानून का उल्लंघन साबित होता है, तो नियमानुसार सख्त आपराधिक कार्रवाई की जानी चाहिए। पठानिया ने दोहराया कि जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के पूर्ण सफाये तक संघर्ष जारी रहेगा।

'शेख अब्दुल्ला की भूमिका को भी गलत मानते हैं?'

समाजसेवी सलीम रेशी ने भी फारूक अब्दुल्ला के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार की नीतियों से राजनीतिक असहमति हो सकती है, लेकिन पाकिस्तान को कश्मीरियों का रक्षक बताना ऐतिहासिक तथ्यों के विपरीत है।

उन्होंने सवाल किया कि यदि पाकिस्तान ने कश्मीरियों की जान बचाई, तो मकबूल शेरवानी के बलिदान को किस नजरिये से देखा जाएगा? क्या फारूक अब्दुल्ला अपने पिता शेख अब्दुल्ला की भारत में विलय की प्रक्रिया में निभाई गई भूमिका को भी गलत मानते हैं?

'370 को लेकर तेज करना होगा संघर्ष'

साथ ही फारूक अब्दुल्ला ने अनुच्छेद 370 और राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर संघर्ष तेज करने का एलान किया। उन्होंने केंद्र सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया।

शनिवार को बारामूला के डाक बंगले में पार्टी कार्यकर्ताओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपने अधिकारों और विशिष्ट पहचान की रक्षा के लिए एकजुट होकर लड़ना होगा। उन्होंने भरोसा जताया कि एक दिन जम्मू-कश्मीर को उसका विशेष दर्जा फिर हासिल होगा।

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'अधिकारों की मांग करना देश के खिलाफ होना नहीं'

उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने परिसीमन और चुनाव के बाद राज्य का दर्जा बहाल करने का वादा किया था, लेकिन अब तक इसे पूरा नहीं किया गया।

नेकां अध्यक्ष ने भाजपा और केंद्र सरकार पर जम्मू-कश्मीर की विशिष्ट पहचान को कमजोर करने का आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी पार्टी अनुच्छेद 370 की बहाली के लिए संघर्ष जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों की मांग करना देश के खिलाफ होना नहीं है।

'हम गांधी-नेहरू के भारत से जुड़े हैं'

फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हम गांधी-नेहरू के भारत से जुड़े हैं, फिर देशभक्ति पर सवाल क्यों?’ कश्मीरियों की देशभक्ति पर उठने वाले सवालों पर आपत्ति जताते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि हमने कभी नहीं कहा कि हम हिंदुस्तानी नहीं हैं।

हम बार-बार कहते हैं कि हम गांधी के भारत और नेहरू के भारत से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि जब लोग अपने अधिकारों की बात करते हैं, तो उनकी मांगों को देशविरोधी बताना उचित नहीं है।

उन्होंने कहा कि उनकी राजनीति का मकसद सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि लोगों की गरीबी दूर करना और उनकी समस्याओं का समाधान करना है। बिजली संकट पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में बिजली पैदा होने के बावजूद लोगों को पर्याप्त आपूर्ति नहीं मिल रही है। अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल का उल्लेख करते हुए उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं को वापस हासिल करने की बात भी कही।

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