ब्रिक्स सम्मेलन दिल्ली में ईरान के राष्ट्रपति से मिले मीरवाइज उमर फारूक, मुस्लिम उम्माह की एकता पर दिया जोर
मीरवाइज उमर फारूक ने नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री से मुलाकात ...और पढ़ें
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HighLights
मीरवाइज उमर फारूक ने ब्रिक्स में ईरानी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री से मुलाकात की।
ईरान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की, संवाद और कूटनीति पर जोर।
कश्मीर और ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक-ऐतिहासिक संबंधों को रेखांकित किया।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक ने नई दिल्ली में जारी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर ईरान के राष्ट्रपति डॉ. मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की।
मीरवाइज उमर फारूक ने मुलाकात के बाद प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ईरानी राजदूत मोहम्मद फतहली का इन बैठकों को संभव बनाने के लिए आभार जताया। उन्होंने बताया कि दो दिनों तक हुई इन मुलाकातों में उनके साथ आगा सैयद हसन और मौलवी इमरान अंसारी भी मौजूद रहे।
मीरवाइज ने कहा कि बैठक के दौरान उन्होंने मौजूदा कठिन परिस्थितियों में ईरान के लोगों के साथ एकजुटता व्यक्त की और ईरान के खिलाफ जारी युद्ध तथा आक्रामकता को समाप्त किए जाने की अपनी लगातार दोहराई जा रही मांग को सामने रखा।
मुस्लिम उम्माह की एकता पर जोर
उन्होंने कहा कि टकराव किसी समस्या का समाधान नहीं कर सकता। मतभेद कितने भी गंभीर क्यों न हों, उनका समाधान अंततः संवाद, कूटनीति और आपसी संपर्क के जरिए ही संभव है। मीरवाइज ने बढ़ती इस्लामोफोबिया और ईरान, फिलिस्तीन, लेबनान तथा अन्य क्षेत्रों में लोगों की पीड़ा का जिक्र करते हुए मुस्लिम उम्माह की एकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक विवादों और सांप्रदायिक मतभेदों को मुस्लिम समुदाय को विभाजित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
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अखरोट की लकड़ी का मॉडल किया भेंट
उन्होंने कश्मीर और ईरान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक संबंधों को भी रेखांकित किया। मीरवाइज के अनुसार फारसी विद्वता, साहित्य, कला, शिल्प और आध्यात्मिक परंपराओं ने कश्मीर की संस्कृति पर गहरी छाप छोड़ी है।
मीरवाइज ने बताया कि उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को श्रीनगर की ऐतिहासिक जामा मस्जिद का विशेष रूप से तैयार किया गया अखरोट की लकड़ी का माडल भेंट किया। उन्होंने इसे कश्मीर और ईरान के लोगों के बीच ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया।
