'अध्यक्षता मिली, आवाज बंद रही'; BRICS में PM मोदी के भाषण पर महबूबा मुफ्ती का हमला, बोलीं- कमजोर पड़ रही विदेश नीति
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक मानवाधिकारों और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर ...और पढ़ें
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BRICS में PM मोदी के भाषण पर महबूबा मुफ्ती का हमला। फाइल फोटो
HighLights
महबूबा ने ब्रिक्स में मानवाधिकारों पर पीएम मोदी के रुख की आलोचना की।
भारत को पश्चिम एशिया के मुद्दों पर नेतृत्व करना चाहिए था।
स्वतंत्र विदेश नीति और पुराने मूल्यों से समझौता करने का आरोप।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में वैश्विक मानवाधिकारों और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर अपेक्षित मजबूती से बात नहीं करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत को ब्रिक्स के अध्यक्ष और मेजबान देश के तौर पर इन मुद्दों पर नेतृत्व करना चाहिए था।
महबूबा मुफ्ती ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने अपने शब्दों का बेहद सावधानी से इस्तेमाल किया और उस तीव्रता से अपनी बात नहीं रखी, जिसकी उनसे अपेक्षा थी। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया में मानवाधिकार, मानवता और लोकतंत्र का समर्थक होने के लिए जाना जाता है।
अध्यक्षता मिली, लेकिन आवाज बंद रही
उन्होंने कहा कि भारत ने जवाहरलाल नेहरू के समय से ही स्वतंत्र विदेश नीति और गुटनिरपेक्षता पर गर्व किया है। हालांकि, उनके अनुसार, गाजा में मारे गए हजारों बच्चों और पश्चिम एशिया में हुई घटनाओं पर भारत की ओर से अपेक्षित स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई।
महबूबा ने कहा कि भारत को ब्रिक्स जैसे महत्वपूर्ण मंच का इस्तेमाल वैश्विक मुद्दों पर मजबूती से अपनी बात रखने के लिए करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि हमें अध्यक्षता मिली, लेकिन हमारी आवाज बंद रही।
हालांकि पीडीपी अध्यक्ष ने ब्रिक्स सम्मेलन के दिल्ली घोषणा-पत्र का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इसमें पहलगाम आतंकी हमले की निंदा की गई और पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रम पर भी मजबूत बयान दिया गया।
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अपने पुराने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को इस घोषणा-पत्र की पहल खुद करनी चाहिए थी और वैश्विक मुद्दों पर भारत को सबसे आगे रहकर नेतृत्व करना चाहिए था। महबूबा के मुताबिक, भारत कहीं न कहीं अपने पुराने मूल्यों और सिद्धांतों से समझौता कर रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति में बदलाव आया है और आतंकवादी हमलों की निंदा करने में भी चयनात्मक रवैया अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारत को किसी भी महाशक्ति का साइडकिक बनने के बजाय अपनी स्वतंत्र विदेश नीति को बनाए रखना चाहिए।
महबूबा मुफ्ती ने यह भी कहा कि दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जबकि भारत अभी भी सुपरपावर सिंड्रोम में फंसा हुआ है। उन्होंने चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है।
