आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों की खैर नहीं! जम्मू पुलिस का बड़ा एक्शन; अफवाह फैलाने वालों पर कसा शिकंजा
जम्मू पुलिस ने सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट और अफवाहें फैलाने वालों पर शिकंजा कसने के लिए एक विशेष साइबर दस्ते का गठन किया है।
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फोटो क्रेडिट: AI
HighLights
जम्मू पुलिस ने विशेष साइबर दस्ते का गठन किया
सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की होगी निगरानी
अफवाहों और भ्रामक जानकारी पर कड़ा एक्शन लिया जाएगा
जागरण संवाददाता, जम्मू। इंटरनेट मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट डालकर सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों पर शिकंजा कसने के लिए जिला पुलिस ने विशेष साइबर दस्ते का गठन किया है।
यह दस्ता विभिन्न इंटरनेट मीडिया मंचों और सामाजिक नेटवर्किंग साइटों पर सक्रिय संदिग्ध तत्वों की गतिविधियों पर नजर रखेगा। विशेष रूप से ऐसी पोस्ट, संदेश और सामग्री पर निगरानी की जाएगी, जिनके माध्यम से समाज में तनाव पैदा करने या देश विरोधी गतिविधियों को बढ़ावा देने की आशंका हो।
इंटरनेट मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच पुलिस की ओर से उठाए गए इस कदम को कानून व्यवस्था बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मौजूदा समय में इंटरनेट मीडिया सूचना के आदान-प्रदान का प्रमुख माध्यम बन चुका है।
अफवाहें लोगों की भावनाओं की करती हैं आहत
हालांकि, कुछ शरारती तत्व इसका दुरुपयोग कर भ्रामक जानकारी, आपत्तिजनक टिप्पणियां और संवेदनशील विषयों से जुड़ी सामग्री प्रसारित करते हैं। ऐसी सामग्री लोगों की भावनाओं को आहत व तनाव का कारण बन सकती है।
इससे पहले जम्मू में स्पेशल आपरेशन ग्रुप का साइबर सेल इंटरनेट मीडिया पर नजर रखता था। अब जिला पुलिस ने विशेष दस्ते का गठन कर इस दिशा में निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने का प्रयास किया है।
पुलिस ने अपनाया कड़ा रुख
पुलिस के लिए इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने वाली सामग्री की समय रहते पहचान करना महत्वपूर्ण है, ताकि किसी भी संवेदनशील मामले में स्थिति बिगड़ने से पहले आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
आपत्तिजनक पोस्ट करने वालों पर शिकंजा
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इंटरनेट मीडिया के बढ़ते प्रयोग ने लोगों के लिए सूचनाओं का आदान-प्रदान आसान बना दिया है, लेकिन कुछ शरारती तत्व इसका गलत इस्तेमाल कर समाज में भ्रम फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की फिराक में रहते हैं।
ऐसे तत्व भड़काऊ संदेश, आपत्तिजनक टिप्पणियां और बिना पुष्टि की गई जानकारी प्रसारित कर लोगों की भावनाएं भड़काने की कोशिश कर सकते हैं। कई बार पुरानी तस्वीरों और वीडियो को गलत संदर्भ में साझा कर तनाव पैदा करने का प्रयास भी किया जाता है।
ऐसे में जरूरी है कि लोग किसी भी संदेश या पोस्ट को आगे भेजने से पहले उसकी सत्यता की जांच करें। आपत्तिजनक या भड़काऊ सामग्री दिखाई देने पर उसे साझा करने के बजाय संबंधित अधिकारियों को सूचित करना चाहिए।
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