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जम्मू-कश्मीर की सीमा पर साल भर में 9 बार घुसे ड्रोन, 237 मार गिराए; रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में खुलासा

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:43 AM (IST)

जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिशें लगातार चुनौती बनी हुई हैं।

जम्मू-कश्मीर की सीमा पर साल भर में 9 बार घुसे ड्रोन (फाइल फोटो)

जम्मू-कश्मीर की सीमा पर साल भर में 9 बार घुसे ड्रोन (फाइल फोटो)

HighLights

  1. जम्मू-कश्मीर में 9 ड्रोन घुसपैठ, कुल 863 घटनाएं दर्ज हुईं

  2. सुरक्षाबलों ने स्पूफर-जैमर से 237 ड्रोन मार गिराए

  3. हथियार, मादक पदार्थ तस्करी में ड्रोन का उपयोग बढ़ा

राज्य ब्यूरो, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन के जरिए हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी की कोशिशें सुरक्षा एजेंसियों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं।

रक्षा मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर ड्रोन घुसपैठ की नौ घटनाएं दर्ज की गईं।

इस अवधि में देश की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर कुल 863 ड्रोन घुसपैठ की घटनाएं सामने आईं, जिनमें से 854 घटनाएं पंजाब और राजस्थान के सीमावर्ती क्षेत्रों में हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन खतरे से निपटने के लिए सुरक्षा बलों ने स्पूफर और जैमर जैसी इलेक्ट्रानिक तकनीकों का प्रभावी इस्तेमाल किया। इस दौरान विभिन्न सेक्टरों में सुरक्षाबल ने 237 ड्रोन मार गिराए।

रक्षा मंत्रालय ने जारी की रिपोर्ट

इनमें से पांच ड्रोन में युद्ध जैसी सामग्री, 72 में मादक पदार्थ, जबकि 161 ड्रोन बिना किसी पेलोड के पाए गए। रक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट में बताया गया है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास सुरक्षाबल ने इस अवधि में दो एके-47 राइफल, 75 पिस्तौल और 281.41 किलोग्राम प्रतिबंधित पदार्थ बरामद किए। रिपोर्ट में आशंका जताई गई है कि इनकी आपूर्ति संभवतः ड्रोन की मदद से की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, विरोधी पक्ष द्वारा अंतरराष्ट्रीय सीमा के आसपास ड्रोन के इस्तेमाल के प्रयास बढ़ रहे हैं। निगरानी के साथ हथियार, गोला-बारूद और मादक पदार्थों की तस्करी जैसी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए भी ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है।

पंजाब सीमा पर बनी चुनौती

विशेष रूप से पंजाब के अंतरराष्ट्रीय सीमा क्षेत्र में ड्रोन आधारित गतिविधियों को गंभीर चुनौती के रूप में रेखांकित किया है। स्पूफर और जैमर के प्रभावी इस्तेमाल से ड्रोन खतरे का काफी हद तक मुकाबला किया गया है। ड्रोन को रास्ते से भटकाने, उसके संचार तंत्र को बाधित करने, सीमा सुरक्षा को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।

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