पराली के धुएं से मिलेगा छुटकारा! खेतों की अब ड्रोन से होगी रियल-टाइम निगरानी; चार राज्यों में हो रही तैयारी
उत्तर भारत में पराली जलाने की निगरानी का तरीका बदल रहा है, अब सिर्फ फायर काउंट नहीं बल्कि आग की तीव्रता, जले क्षेत्रफल और धुएं को भी आधार बनाया जाएगा।

खेतों की अब ड्रोन से होगी रियल-टाइम निगरानी (जागरण फोटो)
HighLights
पराली निगरानी में अब आग की तीव्रता, धुआं मुख्य आधार
ड्रोन और उपग्रह से होगी तत्काल, प्रभावी निगरानी
हरियाणा, पंजाब में पराली जलाने की नई निगरानी व्यवस्था
प्रदीप शर्मा, करनाल। धान कटाई के साथ हर साल उत्तर भारत में बढ़ने वाले प्रदूषण से निपटने के लिए इस बार निगरानी का तरीका बदल रहा है।
अब खेत में लगी आग की सिर्फ संख्या यानी फायर काउंट को आधार बनाकर पराली जलाने की स्थिति नहीं आंकी जाएगी। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने इस बार आग की तीव्रता, जले क्षेत्रफल और उससे निकलने वाले धुएं को भी आकलन में शामिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है।
इसका मकसद यह पता लगाना है कि आग की वास्तविक गंभीरता कितनी है और उसका प्रदूषण पर कितना असर पड़ रहा है। उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों के साथ अब ड्रोन से तत्काल निगरानी निगरानी की व्यवस्था की जा रही है।
चार जिलों की होगी निगरानी
सीएक्यूएम ने पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को फसल अवशेष जलाने की निगरानी के लिए ड्रोन आधारित तंत्र अपनाने के निर्देश दिए हैं। ड्रोन खासकर उन इलाकों में प्रभावी होंगे, जहां किसान उपग्रह की नजर से बचने के लिए शाम या देर शाम खेतों में आग लगाते हैं।
ड्रोन निगरानी के लिए शाम 3 से रात 9 बजे तक का समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण रखा गया है। अब तक उपग्रह से खेतों में सक्रिय आग के स्थानों की पहचान कर उनकी संख्या तैयार की जाती थी।
समस्या यह थी कि एक छोटी और बड़ी आग कई बार आंकड़े में समान एक घटना के रूप में दर्ज हो सकती थी। इसके अलावा उपग्रह के सीमित समय पर गुजरने के कारण शाम के समय लगाई गई आग छूटने की आशंका रहती है।
हरियाणा के लिए खास चुनौती
सीपीसीबी के मुताबिक हरियाणा में करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र जैसे जिले लंबे समय से धान के अवशेष जलाने के लिहाज से संवेदनशील रहे हैं।
ऐसे जिलों में उपग्रह निगरानी के साथ ड्रोन और जमीनी टीमों की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। पिछले खरीफ सीजन में हरियाणा में 662 फायर काउंट दर्ज हुए थे, जो 2024 के 1,406 से 53 प्रतिशत कम थे। पंजाब में 2025 में 5,114 फायर काउंट दर्ज हुए, जबकि 2024 में यह संख्या 10,909 थी।
ड्रोन से मिलेगी मौके की तस्वीर
ड्रोन की खासियत यह होगी कि खेत में आग लगने के बाद टीम को अगले दिन के उपग्रह के आंकड़ों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। ड्रोन सक्रिय आग और प्रभावित खेत की तस्वीर तत्काल उपलब्ध करा सकते हैं।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के अनुसार ड्रोन, उपग्रह तस्वीरों और जमीनी निरीक्षण को पूरक बनाते हुए समयबद्ध कार्रवाई में मदद करेंगे। जुलाई में ड्रोन की उड़ान योजना, आवश्यक संख्या और निगरानी को केंद्रीय डाटाबेस तैयार करने को कहा गया था।
