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लद्दाख के लिए ऐतिहासिक दिन, सभी 8 जिलों में हिल काउंसिल्स के गठन का एलान; अब स्थानीय लोग खुद तय करेंगे भविष्य

Published: Tue, 20 Oct 2026 01:38 PM (IST)

लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (संशोधन) विनियमन, 2026' को अधिसूचित किया है, जिससे ...और पढ़ें

लद्दाख के आठ जिलों में लागू होगा LAHDC (फाइल फोटो)

लद्दाख के आठ जिलों में लागू होगा LAHDC (फाइल फोटो)

HighLights

  1. लद्दाख के सभी आठ जिलों में पहाड़ी परिषदें बनेंगी

  2. उपराज्यपाल ने संशोधन विनियमन 19 अक्टूबर से अधिसूचित किया

  3. साकूं लद्दाख का नया जिला बना, कुल आठ जिले

डिजिटल डेस्क, जम्मू। हाल ही में लद्दाख को एक नया जिला साकूं मिला है। इस तरह अब केंद्रशासित प्रदेश में जिलों की संख्या आठ हो गई है। इस सभी जिलों में अब पहाड़ी परिषदों का गठन होगा।

इस बाबत लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने मंगलवार को 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) (संशोधन) विनियमन, 2026' को अधिसूचित कर दिया है।

सक्सेना ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा 16 अक्टूबर को इसे लागू किए जाने के बाद यह विनियमन 19 अक्टूबर से प्रभावी हो गया है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर को इन संशोधनों को मंजूरी दी थी। मंजूरी मिलने के छह दिनों के भीतर ही इस विनियमन को अधिसूचित कर दिया गया।

एलजी ने एक्स पर दी जानकारी

उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया के एक्स प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट के जरिए इस संशोधित विनियमन की अधिसूचना और इसके प्रभावी होने की तारीख की घोषणा की।

उन्होंने कहा कि मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत के माननीय राष्ट्रपति द्वारा 'लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (संशोधन) विनियमन, 2026' को लागू किए जाने के बाद मैंने इसे 19 अक्टूबर 2026 से प्रभावी करने के लिए अधिसूचित कर दिया है।

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महज छह दिनों के रिकॉर्ड समय में लागू किया गया यह ऐतिहासिक विनियमन, अब लद्दाख के सभी 8 जिलों (जिसमें नया बना सांकू जिला भी शामिल है) में LAHDC के गठन का मार्ग प्रशस्त करता है। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 14 अक्टूबर को इन संशोधनों को मंजूरी दी थी, जिसके बाद 16 अक्टूबर को माननीय राष्ट्रपति ने इसे लागू किया।"

क्या होंगे बदलाव?

उपराज्यपाल ने लिखा...

इस संशोधन के तहत परिषदों की संरचना में भी बदलाव किया गया है। इससे निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या को कम किया गया है। सक्सेना ने बताया, "संशोधित विनियमन के तहत निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या को तर्कसंगत बनाया गया है। पहले प्रत्येक परिषद में 26 सीटें होती थीं, जिन्हें अब घटाकर न्यूनतम 7 और अधिकतम 24 सीटें कर दिया गया है।

इसके अलावा, स्थानीय शासन में लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए 'महिलाओं' और 'अप्रतिनिधित्व वाले समुदायों' से चार सदस्यों को नामित करने का प्रावधान भी जोड़ा गया है।

अपनी पोस्ट में लद्दाख उपराज्यपाल ने पीएम मोदी और अमित शाह का धन्यवाद किया।

बता दें कि जुलाई की शुरुआत में, लद्दाख के मुख्य सचिव आशीष कुंद्रा ने लेह में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए इसे लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण और जमीनी स्तर पर शासन की दिशा में एक बड़ा कदम बताया था।

लद्दाख स्वायत्त पहाड़ी विकास परिषद (LAHDC) अधिनियम की धारा 3(1) में पहले से ही हर जिले के लिए एक परिषद के गठन का प्रावधान है, जिसे सरकार द्वारा राजपत्र (गजट) में अधिसूचित तारीख से गठित किया जाना है।

इस अधिनियम में केवल कुछ संशोधनों की आवश्यकता थी, और निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन (delimitation) अभी भी बाकी है।

लद्दाख में अब आठ जिले

लद्दाख में जिलों की संख्या दो से बढ़कर आठ हो गई है। इसमें शाम, नुब्रा, चांगथांग, जंस्कार, द्रास और सांकू को नए जिलों के रूप में अधिसूचित किया गया। अब तक लेह और कारगिल की दो मौजूदा परिषदों के पास ही निर्वाचित प्रतिनिधित्व था।

इस घोषणा से प्रत्येक परिषद के पास LAHDC अधिनियम में निर्धारित सभी शक्तियां होंगी। नए जिलों को वही अधिकार मिलेंगे जो लेह के पास 1995 से और कारगिल के पास 2003 से हैं। ये अधिकार किसी भी तरह से कम नहीं होंगे।

परिषदों के पास होंगे ये अधिकार

पहाड़ी परिषदों के पास जिले के भीतर भूमि स्वामित्व और भूमि आवंटन पर अधिकार होता है। परिषदें जिला कैडर के पदों के लिए भर्ती और पदोन्नति को नियंत्रित करती हैं। नए जिलों में रोजगार संबंधी निर्णय जिले के भीतर मौजूद एक निर्वाचित निकाय द्वारा लिए जाएंगे।

परिषदों के पास अपना एक अलग 'परिषद कोष' (Council Fund) होता है और वे कर (टैक्स) तथा शुल्क लगा सकती हैं। प्रत्येक नए जिले का अपना राजस्व आधार होगा। परिषदें अपनी विकास योजनाएं खुद तैयार करती हैं। प्रत्येक जिला अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करेगा, न कि उन्हें लेह या कारगिल से प्राप्त करेगा।

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