चमकीली मिठाई पर चांदी का बर्क या मिलावट, जांचेगा कौन? हिमाचल में 3 महीने में 21 सैंपल फेल, गुणवत्ता पर उठे सवाल
ऊना में त्योहारों के दौरान मिठाइयों में मिलावट और चांदी के वर्क की शुद्धता पर चिंता जताई गई है। स्वास्थ्य ...और पढ़ें

हिमाचल में 3 महीने में 21 सैंपल फेल (फाइल फोटो)
HighLights
तीन माह में 120 सैंपल, 21 मिलावटी पाए गए।
सीमित स्टाफ और बंद सैंपलिंग वैन से निगरानी मुश्किल।
त्योहारी सीजन में मिठाइयों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान।
राकेश सूरज, ऊना। काम से लौटते हुए नीलाघाट ऊना के राधेशाम शाम को मिठाई की दुकान पर रुके। कांच के काउंटर के भीतर रंग-बिरंगी मिठाइयां सजी थीं। चांदी के बर्क से चमकती बर्फी देखकर डिब्बा बंधवाया और पैसे देने लगा। तभी मन में सवाल उठा, कहीं यह चमक असली चांदी की है या मिलावट का मुलम्मा?
ढाई से तीन लाख रुपये किलो तक पहुंची चांदी के बीच क्या हर मिठाई पर चढ़ा बर्क शुद्ध है? त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में मिठाइयों की बढ़ती मांग, बाहर से आने वाली खाद्य सामग्री और सीमित निगरानी व्यवस्था के बीच सवाल है कि गुणवत्ता की जांच कितनी प्रभावी है और मिलावट मिलने पर कार्रवाई कौन करेगा?
पूरे जिले के लिए पांच कर्मचारियों के सीमित स्टाफ और 50 सैंपल मासिक टार्गेट के बीच 14 दिनों में रिपोर्ट,और इन व त्योहारी दिनों में केवल एक टीम पूरे क्षेत्र में सैंपलिगं कर रही है। स्टाफ के अभाव में करीब दो वर्षों से सैंपलिंग वैन का खड़ा रहना भी व्यवस्था पर प्रश्न उठाता है।
हलांकि सफाई व्यवस्था को लेकर अधिकांश स्थानों में संतोषजनक पाई गई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा भी कारीगरों की मेडिकल जांच के लिए जागरूकता फैलाई जा जा रही है। सैंपलिंग के बाद पीएफ कोड द्वारा कई मामलों में जुर्माना भी किया गया है।
21 सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे
एक जुलाई से 30 सितंबर तक जिले में खाद्य पदार्थों के 120 सैंपल लिए गए। इनमें से 84 की रिपोर्ट मिली, जिनमें 21 सैंपल निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। शेष 36 की रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है। दूध और दूध उत्पादों के 23 सैंपलों में चार फेल हुए, जबकि तैयार खाद्य पदार्थों के चारों सैंपल पास पाए गए। बाकी नमूने कन्फेक्शनरी, अनाज, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों के थे। निर्धारित मानकों के अनुसार सैंपलों की रिपोर्ट 14 दिन के भीतर आनी चाहिए।
त्योहारी सीजन में जांच तेज करते हुए शुक्रवार को विभागीय टीम ने अंब क्षेत्र से 16 सैंपल लिए। इनमें विभिन्न मिठाइयों के साथ बेसन, काजू कतली, रसगुल्ला और रंगीन मिठाइयां शामिल रहीं। विभाग का मासिक लक्ष्य 50 सैंपल लेना है। जिन दुकानों से नमूने लिए जाते हैं, वहां पांच से छह महीने बाद दोबारा निरीक्षण भी किया जाता है।
ऊना शहर व आस-पास में करीब 150 छोटी-बड़ी मिठाई की दुकानें हैं। स्थानीय अनुमान के अनुसार, सामान्य दिनों में तीन से चार क्विंटल मिठाई बिकती है, जबकि त्योहारों में खपत 10 से 15 क्विंटल तक पहुंच सकती है। खोये की अनुमानित दैनिक खपत दो से तीन क्विंटल तक रहती है।
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यही खपत इन दिनों पांच से सात क्विंटल तक पहुंच जाती है।
मांग पूरी करने के लिए तैयार मिठाई और पनीर की खेपें दिल्ली तथा पंजाब से भी आती हैं। इसलिए दुकानों के साथ कच्चे माल, परिवहन, पैकिंग और भंडारण की जांच जरूरी है। उचित तापमान और स्वच्छता नहीं होने पर खाद्य पदार्थ दूषित हो सकते है
पूरे हिमाचल प्रदेश में खाद्य सैंपलों की जांच के लिए कंडाघाट स्थित एक सरकारी प्रयोगशाला है। इसके अलावा ऊना जिले में एनएबीएल से मान्यता प्राप्त करीब पांच निजी प्रयोगशालाओं में भी नमूने भेजे जाते हैं।
पांच कर्मचारियों के जिम्मे पूरे जिले की निगरानी
जिले में खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक जिला खाद्य गुणवत्ता अधिकारी, एक खाद्य सुरक्षा अधिकारी, दो डाटा एंट्री आपरेटर और एक पीएम सहित कुल पांच कर्मचारी हैं। सीमित स्टाफ के कारण शहरों, कस्बों और दूरदराज के गांवों में नियमित निरीक्षण चुनौतीपूर्ण है।
जिला अस्पताल परिसर में वर्ष 2024 से करीब 45 लाख रुपये की लागत वाली फूड सैंपलिंग वैन खड़ी है। स्टाफ की कमी के कारण इसका संचालन शुरू नहीं हो पाया। इसके लिए एक चालक, एक एनालिस्ट और एक अटेंडेंट की जरूरत है। -एडीएम की अदालत से कार्रवाई में लाखों रुपये का जुर्माना
| विवरण | संख्या / आंकड़ा |
| मासिक सैंपलिंग लक्ष्य | 50 |
| जुलाई-सितंबर में लिए गए कुल सैंपल | 120 |
| रिपोर्ट प्राप्त | 84 |
| मानकों पर खरे नहीं उतरे (फेल) | 21 |
| रिपोर्ट लंबित | 36 |
| दूध व दूध उत्पादों के सैंपल | 23 |
| दूध व दूध उत्पादों में फेल | 4 |
| तैयार खाद्य पदार्थों के सैंपल | 4 |
| तैयार खाद्य पदार्थों में पास | 4 |
| शुक्रवार को अंब में लिए गए सैंपल | 16 |
| सरकारी प्रयोगशाला | 1 (कंडाघाट) |
| ऊना में मान्यता प्राप्त निजी लैब | लगभग 5 |
| अगस्त का जुर्माना | ₹8.68 लाख |
| सितंबर का जुर्माना | ₹70,000 |
| अक्टूबर का जुर्माना | ₹75,000 |
जिले के शहरों, कस्बों और गांवों में लगातार सैंपलिंग हो रही है। प्रतिमाह 50 सैंपल लेने का लक्ष्य पूरा किया जा रहा है। त्योहारी सीजन में जांच और तेज की जाएगी। दुकानदार गुणवत्ता से समझौता न करें। -जगदीश धीमान, जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी
सीएमओ ऊना, संजीव वर्मा ने कहा कि खाद्य गुणवत्ता और स्वच्छता के प्रति जागरूकता जरूरी है। संबंधित विभागों के सहयोग से लोगों को जागरूक किया जा रहा है। दुकानदार खाद्य सामग्री की तैयारी और भंडारण में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
बच्चों के लिए मिठाई खरीदते समय शुद्धता की चिंता रहती है। आम ग्राहक खुद मिलावट नहीं पहचान सकता, इसलिए दुकानों और बाहर से आने वाली खेपों की नियमित जांच होनी चाहिए।- सुनीता राणा, ग्राहक
अन्य ग्राहक अर्जुन राणा कहते हैं कि रंग और चमक से मिठाई की गुणवत्ता का पता नहीं चलता। विभाग को जांच बढ़ाकर शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्राहकों का विश्वास बनाए रखने के लिए अच्छी गुणवत्ता का कच्चा माल, साफ-सफाई और उचित भंडारण जरूरी है। -शम्मी राणा, मिठाई विक्रेता
विभाग सैंपलिंग और कार्रवाई तेज करे। ग्राहक भी मिठाई की गुणवत्ता, ताजगी और साफ-सफाई देखकर ही खरीदारी करें। -सुरेश परमार, सेवानिवृत्त प्रवक्ता
मिठाई खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान:
- साफ-सुथरी दुकान से मिठाई खरीदें और खुले खाद्य पदार्थों से बचें।
- पैक मिठाई पर निर्माण तिथि और उपयोग की अवधि देखें।
- असामान्य चमक या तेज रंग को शुद्धता का प्रमाण न मानें।
- गंध, रंग या स्वाद असामान्य लगे तो सेवन न करें।
- बिल रखें और संदेह होने पर खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें।
जागरण पड़ताल में निगरानी मजबूत करना जरूरी पाया गया
तीन महीने में 120 सैंपल लेने और 21 के फेल होने के बीच लंबित 36 रिपोर्टों की स्थिति भी महत्वपूर्ण है। सीमित स्टाफ की समस्या दूर करने, फूड सैंपलिंग वैन शुरू करने और समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने की जरूरत है। नियमित निगरानी, दोषियों पर कार्रवाई और उपभोक्ताओं की सतर्कता से ही त्योहारों की खुशियों को मिलावट से सुरक्षित रखा जा सकता है।
