चीनी के बाद सरसों के तेल और ड्राई फ्रूट्स की कीमत में उछाल, त्योहारी सीजन से पहले महंगाई ने बिगाड़ा बजट
रसोई का बजट चीनी के बाद अब सरसों के तेल और मेवों की बढ़ती कीमतों से प्रभावित हो रहा है, ...और पढ़ें

सरसों का तेल ओर ड्राई फ्रूट्स। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
सरसों तेल और मेवों की कीमतों में भारी उछाल आया।
त्योहारी सीजन से पहले सब्जियों के दाम भी बढ़े हैं।
गृहणियां बढ़ती महंगाई से रसोई बजट को लेकर चिंतित हैं।
संवाद सहयोगी, चिंतपूर्णी (ऊना)। रसोई का बजट अब उस गणित की तरह हो गया है, जिसे हर महीने जोड़ने के बाद भी हिसाब पूरा नहीं बैठता है। पहले चीनी की कीमतों ने रसोई का बजट प्रभावित किया और अब सरसों के तेल और मेवों के दाम में तेजी ने गृहणियों की चिंता बढ़ा दी है। राहत केवल इतनी है कि दालों और अधिकांश मसालों के दाम फिलहाल अपेक्षाकृत स्थिर हैं।
रसोई में सबसे अधिक प्रयोग होने वाली वस्तुओं में शामिल सरसों के तेल ने भी बजट का दबाव बढ़ा दिया है। ब्रांडेड कंपनियों का सरसों तेल परचून में करीब 220 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया है, जबकि अन्य कंपनियों के तेल के दाम भी करीब 200 रुपये तक हैं। रिफाइंड तेल के दामों में भी तेजी ने परिवारों की चिंता बढ़ाई है।
त्योहारों से पहले मेवों की कीमतें छू रही आसमान
त्योहारों से पहले मेवों की कीमतों ने चिंता और बढ़ा दी है। किशमिश का भाव परचून में करीब 600 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है, जबकि बादाम गिरी 1,000 रुपये प्रति किलोग्राम से ऊपर बिक रही है। गरी-गोला के दाम भी 500 रुपये से अधिक हैं। त्योहारों में मिठाई, पकवान और मेवों का प्रयोग के कारण इन कीमतों का असर सीधे घरेलू खर्च पर पड़ना तय माना जा रहा है।
सब्जियों के भाव भी बढ़े
बरसात का मौसम बीतते ही टमाटर सहित कई हरी सब्जियों के दाम भी बढ़ गए हैं। घिया और कद्दू को अपवाद मान लें तो बाजार में शायद ही कोई सब्जी ऐसी है, जो 50 रुपये प्रति किलोग्राम से कम मिल रही हो। मटर का भाव 200 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया है। शिमला मिर्च और फूलगोभी 80 रुपये प्रति किलोग्राम बिक रही हैं।
दालें और मसाले
दालों के दाम फिलहाल स्थिर जरूर हैं, लेकिन दो वर्ष पहले की तुलना में इनमें भी 10 से 15 रुपये प्रति किलोग्राम तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। चना दाल को छोड़ दें तो अधिकांश दालों के भाव 100 रुपये या उससे अधिक चल रहे हैं। मसालों में इलायची, बड़ी इलायची और काली मिर्च महंगी हैं। हालांकि जीरे के दाम में आधे से अधिक की गिरावट दर्ज हुई है, जिससे उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली है।
गृहणियां भी चिंतित
गृहणी अनुराधा, प्रियंका, रेणु, सपना और ममता का कहना था कि रसोई का खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले सब्जियों के बढ़े दाम चिंता का कारण थे, अब तेल और मेवों की कीमतों ने भी परेशानी बढ़ा दी है। त्योहारी सीजन शुरू होने में अभी करीब एक माह का समय है, लेकिन उससे पहले ही आवश्यक वस्तुओं के दामों में आया उछाल परिवारों के लिए अतिरिक्त आर्थिक दबाव पैदा कर रहा है।
क्या कहते हैं व्यापारी
चिंतपूर्णी क्षेत्र के थोक व्यापारी एवं बिजनेस होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुंदन गर्ग के अनुसार महंगाई का यह दौर अचानक तेज हुआ है। मेवा और तेल की कीमतों में पिछले कुछ सप्ताह से लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है, जिसका सीधा असर परचून बाजार में दिखाई दे रहा है।
