कमर्शियल गाड़ियों की स्पीड होगी कंट्रोल, हर वाहन में लगेगा स्पीड लिमिटिंग डिवाइस; बिना SLD नहीं होगा रजिस्ट्रेशन
सरकार ने तेज रफ्तार वाहनों पर लगाम लगाने के लिए व्यावसायिक वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (SLD) अनिवार्य कर दिया ...और पढ़ें

कमर्शियल वाहनों की स्पीड कंट्रोल होगी। प्रतीकात्मक फोटो
HighLights
व्यावसायिक वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस अनिवार्य किया गया।
बिना SLD के वाहनों का पंजीकरण और बिक्री नहीं होगी।
पुराने वाहनों को भी फिटनेस के लिए SLD जरूरी होगा।
अनिल ठाकुर, शिमला। अब सड़क पर तेज रफ्तार से वाहन दौड़ाने के बाद चालान कटने का इंतजार नहीं चलेगा। सरकार ने रफ्तार पर लगाम लगाने के लिए ऐसा शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है, जिसमें वाहन के सड़क पर उतरने से पहले ही उसकी स्पीड कंट्रोल करने की व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। निर्धारित श्रेणी के व्यावसायिक वाहनों में स्पीड लिमिटिंग डिवाइस (एसएलडी) या स्पीड लिमिटिंग फंक्शन (एसएलएफ) नहीं हुआ तो न वाहन बिक सकेगा, न उसका पंजीकरण होगा।
पुराने वाहन भी इस जांच से बच नहीं पाएंगे। फिटनेस प्रमाणपत्र और पंजीकरण नवीनीकरण के समय स्पीड कंट्रोलर की मौजूदगी अनिवार्य होगी।
परिवहन विभाग ने जारी किए निर्देश
सुप्रीम कोर्ट के 15 सितंबर के सख्त आदेश के बाद केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने सभी राज्यों को इस संबंध में सर्कुलर जारी किया था। हिमाचल परिवहन विभाग ने सभी आरटीओ व संबंधित आधिकारियों को पत्र जारी कर इन दिशा निर्देशों की पालना के निर्देश दिए हैं।
पंजीकरण से पहले स्पीड कंट्रोलर
मंत्रालय ने 28 सितंबर को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआइसी) को वाहन पोर्टल में जरूरी तकनीकी बदलाव करने के निर्देश दिए थे। इसके तहत केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम 118 (1) के दायरे में आने वाले प्रत्येक परिवहन वाहन में पंजीकरण से पहले स्पीड कंट्रोलर लगाना जरूरी किया गया है। पोर्टल पर उपकरण की जानकारी दर्ज हुए बिना पंजीकरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी।
खराब डिवाइस भी नहीं चलेगी, बदलने पर होगा प्रमाणीकरण
वाहन में स्पीड कंट्रोलर लगा होना ही पर्याप्त नहीं होगा, उसका सही स्थिति में काम करना भी जरूरी होगा। फिटनेस जांच के दौरान उपकरण की उपलब्धता और स्थिति का सत्यापन किया जाएगा। यदि एसएलडी खराब या क्षतिग्रस्त हो जाता है तो उसे बदलने के बाद नए उपकरण के प्रमाणीकरण की व्यवस्था भी वाहन पोर्टल पर विकसित की जाएगी। यानी कागजों में स्पीड कंट्रोलर दिखाकर फिटनेस हासिल करना आसान नहीं होगा।
निर्माता से लेकर डीलर तक कसेंगे घेरे में
नई व्यवस्था में जवाबदेही केवल परिवहन विभाग की नहीं होगी। निर्धारित उपकरण लगाए बिना वाहन बेचने वाले निर्माता और डीलर भी कार्रवाई के दायरे में आएंगे।
अब यह भी पता चलेगा कि किस जिले में कितने वाहन नियमों का पालन कर रहे हैं और कितनों में स्पीड कंट्रोलर लगा है। मंत्रालय वाहन पोर्टल के आंकड़ों के आधार पर हर महीने जिलावार और राज्यवार अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी।
इस व्यवस्था का मकसद तेज रफ्तार से होने वाली दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए निगरानी को वाहन की बिक्री और पंजीकरण से ही जोड़ना है।
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