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IPS संजीव गांधी की बड़ी मुश्किलें, SIT ने कॉन्स्टेबल के बयान दर्ज किए; अधिकारी को जांच में शामिल होना होगा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sun, 01 Nov 2026 11:53 AM (IST)

शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के मामले में एसआईटी ने जांच तेज कर दी है। शिकायतकर्ता कॉन्स्टेबल के बयान दर्ज किए गए हैं।

शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी। जागरण आर्काइव

शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. पूर्व SSP संजीव गांधी के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला।

  2. SIT ने शिकायतकर्ता कॉन्स्टेबल के बयान दर्ज किए।

  3. कॉन्स्टेबल ने 1.87 लाख रुपये के भुगतान का आरोप लगाया।

जागरण संवाददाता, शिमला। पुलिस थाना सदर में शिमला के पूर्व एसएसपी संजीव गांधी के खिलाफ कॉन्स्टेबल की शिकायत पर दर्ज मामले में एसआइटी ने जांच तेज कर दी है। एसआइटी ने इस मामले में शिकायतकर्ता पुलिस कॉन्स्टेबल के बयान दर्ज कर लिए हैं। सूत्रों का कहना है कि बयान में कॉन्स्टेबल ने बताया कि कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए उसने जेल विभाग से उधार में सामान खरीदा था।

इस सामान का भुगतान करने के लिए जेल विभाग से जब तत्कालीन एसपी शिमला को पत्र आया तो कांस्टेबल को सिर्फ 25 हजार रुपये दिए। एसआइटी ने दूरभाष के माध्यम से संजीव गांधी को जांच में शामिल होने के लिए कहा है।

धोखाधड़ी का मामला

बीते दिनों संजीव गांधी के खिलाफ कथित धोखाधड़ी, सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में पुलिस थाना सदर में मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने कांस्टेबल की शिकायत और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच के आधार पर जांच शुरू कर दी है। यह मामला भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

कॉन्स्टेबल ने खर्च किए 1.87 लाख

कांस्टेबल ने शिकायत दी थी कि वर्ष 2024 और 2025 के दौरान उसे सरकारी कार्यों और व्यवस्थाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके लिए उसे अपनी जेब से खर्च करने और बाद में भुगतान किए जाने का आश्वासन दिया था। कांस्टेबल के अनुसार, उसने व्यवस्थाओं के लिए 1,87,890 रुपये खर्च किए और संबंधित बिल कार्यालय में जमा करवाए। जांच के बाद बिलों को भुगतान के लिए स्वीकृति भी मिल गई थी।

वाउचर पर हस्ताक्षर के बावजूद नहीं हुआ भुगतान

शिकायतकर्ता का आरोप है कि छह फरवरी 2026 को तत्कालीन एसपी संजीव कुमार गांधी ने उसे अपने पास बुलाया और भुगतान से संबंधित वाउचर पर हस्ताक्षर करवाए। उसे बताया कि भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के लिए हस्ताक्षर जरूरी हैं और स्वीकृत राशि उसे मिल जाएगी। हालांकि उसे राशि का भुगतान नहीं किया। 

फंड से निकल चुकी थी राशि पर नहीं पहुंची खाते में

जुलाई 2026 में शिकायत करने के बाद जब कांस्टेबल ने कार्यालय की अकाउंट ब्रांच से जानकारी हासिल की, तो उसे पता चला कि संबंधित राशि फंड से निकाली जा चुकी थी, लेकिन उसके खाते में जमा नहीं हुई थी। इसके चलते उसे अपनी देनदारियां चुकाने के लिए निजी संसाधनों से धन की व्यवस्था करनी पड़ी।

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