HRTC पड़ोसी राज्यों के घाटे वाले रूट पर चलाएगा निजी बसें, कंडक्टर निगम का होगा; वैट लीज योजना लागू करने की तैयारी
एचआरटीसी 2250 करोड़ रुपये के घाटे को कम करने के लिए पड़ोसी राज्यों के घाटे वाले रूटों पर वैट लीज ...और पढ़ें

एचआरटीसी पड़ोसी राज्यों के घाटे वाले रूट पर निजी बसें चलाएगा।
HighLights
एचआरटीसी पड़ोसी राज्यों के घाटे वाले रूटों पर निजी बसें चलाएगा।
वैट लीज योजना में बस-चालक निजी, कंडक्टर एचआरटीसी का होगा।
2250 करोड़ रुपये का घाटा कम करने की है तैयारी।
राज्य ब्यूरो, शिमला। एचआरटीसी दिल्ली, चंडीगढ़, पंजाब, जम्मू व उत्तराखंड जैसे राज्यों के घाटे वाले रूट पर वैट लीज आधार पर बसें चलाने की तैयारी में है। वैट लीज योजना से घाटा घटाने की तैयारी है। एचआरटीसी 2250 करोड़ रुपये के घाटे से जूझ रहा है। वैट लीज योजना के तहत बस और चालक निजी ऑपरेटर के होंगे, जबकि कंडक्टर एचआरटीसी का रहेगा। बस मालिक को प्रति किलोमीटर के हिसाब से भुगतान किया जाएगा।
इससे एचआरटीसी को अपने खर्च पर बसें खरीदने और ड्राइवर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन अन्य राज्यों में बसें चलाने के लिए परमिट, टैक्स और संचालन से संबंधित नियम योजना की राह में रोड़ा बन रहे हैं। ऐसे में इस योजना को लागू करने से पहले कानूनी अड़चनों को दूर करना होगा।
80 प्रतिशत रूट घाटे में
एचआरटीसी अधिकारियों का कहना है कि अन्य राज्यों के 80 प्रतिशत रूट घाटे में हैं। ऐसे में अपने संसाधनों पर खर्च का बोझ बढ़ाने के बजाय निजी आपरेटर के माध्यम से बसों का संचालन करने का विकल्प तलाशा जा रहा है।
2003-07 में तैयार हुई थी योजना
वर्ष 2003 से 2007 तक कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में यह योजना तैयार की गई थी। तब यह योजना केवल हिमाचल में बसें चलाने के लिए थी। अब अन्य राज्यों के लिए बसें चलाने की योजना है तो कानूनी अड़चनें आ रही हैं।
निजी लग्जरी बसों का विकल्प
उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में बीते दिनों हुई एचआरटीसी निदेशक मंडल की बैठक में इस प्रस्ताव पर चर्चा की गई। बोर्ड ने प्रबंध निदेशक को सभी कानूनी पहलुओं की जांच कर नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। कहा गया कि अन्य राज्यों की रोजाना सैकड़ों निजी लग्जरी बसें हिमाचल आ रही हैं। इसका विकल्प तलाशें ताकि निगम बसों का संचालन कर सके। नियमों के अनुरूप व्यवस्था बनने के बाद ही योजना शुरू की जाएगी।
पहले 120 बसें चलीं, फिर बंद हुई योजना
एचआरटीसी पहले भी वैट लीज पर करीब 120 बसें चला चुका है। इनमें 63 लग्जरी बसें शामिल थीं। उस समय बसों के लिए 40 से 60 रुपये प्रति किलोमीटर की दर से भुगतान किया जाता था। कुछ बसों में डीजल का खर्च निगम उठाता था जबकि कुछ में यह जिम्मेदारी आपरेटर की थी। कर्मचारियों के विरोध और भुगतान व संचालन को लेकर उठे सवालों के बीच सत्ता परिवर्तन के बाद यह योजना बंद कर दी गई थी।
तीन साल में बंद किए 282 रूट
एचआरटीसी पिछले तीन साल में 282 रूट बंद कर चुका है। इनमें 196 ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों के रूट हैं। घाटा कम करने के लिए सरकार ने 13 सूत्रीय कार्ययोजना बनाई है। इसमें रूट का युक्तीकरण, वैट लीज पर बसें चलाना, रखरखाव खर्च घटाना और गैर किराया आय बढ़ाना शामिल है। एचआरटीसी के बेड़े में शामिल 297 नई इलेक्ट्रिक बसों से प्रतिदिन सात से आठ लाख रुपये की बचत का दावा किया गया है।
