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चालान के पैसे अपने अकाउंट में डलवाता रहा कॉन्स्टेबल, विभाग ने किया बर्खास्त; अब हिमाचल हाई कोर्ट से भी झटका लगा

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 14 Oct 2026 11:54 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत लेने वाले बर्खास्त कॉन्स्टेबल की अपील खारिज कर दी है। ...और पढ़ें

हिमाचल हाई कोर्ट ने रिश्वत लेने के आरोपित कॉन्स्टेबल की अपील खारिज कर दी। प्रतीकात्मक फोटो

हिमाचल हाई कोर्ट ने रिश्वत लेने के आरोपित कॉन्स्टेबल की अपील खारिज कर दी। प्रतीकात्मक फोटो

HighLights

  1. कांस्टेबल ने ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत ली।

  2. निजी यूपीआई खाते में 20,000 रुपये ट्रांसफर करवाए।

  3. हाई कोर्ट ने नए सिरे से जांच का आदेश बरकरार रखा।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने ई-चालान में हेराफेरी कर रिश्वत के पैसे निजी यूपीआई अकाउंट पर लेने वाले बर्खास्त कॉन्स्टेबल की अपील खारिज कर दी है। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने मामले की नए सिरे से जांच करवाने के अपीलीय प्राधिकरण के आदेश को सही ठहराया है।
मामला बिलासपुर जिले का है, जहां कॉन्स्टेबल ट्रैफिक क्लर्क के पद पर तैनात था।

तीन मई 2023 को ट्रैफिक पुलिस ने एक वाहन का चालान ड्रिंक एंड ड्राइव के तहत काटा था। आरोपित कॉन्स्टेबल ने उच्च अधिकारियों की अनुमति के बिना ऑनलाइन ई-चालान एप में बदलाव कर दिए। उसने कोर्ट में फाइन की रकम को शून्य और 5,000 दर्शाया, जबकि वाहन चालक से उसके वकील के माध्यम से 20,000 की राशि व्यक्तिगत गूगल पे अकाउंट पर ट्रांसफर करवा ली।

जांच में पाया कि यह राशि सरकारी ट्रेजरी में जमा नहीं की थी। इसके बाद आरोपित के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी के तहत एफआइआर दर्ज की गई।

एसपी बिलासपुर ने किया था बर्खास्त

प्रारंभिक जांच के बाद दिसंबर 2023 में एसपी बिलासपुर ने कांस्टेबल को बर्खास्त कर दिया था। इस बर्खास्तगी के खिलाफ जब उसने पुलिस उपमहानिरीक्षक मंडी के समक्ष अपील की, तो डीआइजी ने पाया कि विभाग ने पंजाब पुलिस रूल्स के नियम 16.38 का पालन नहीं किया है। इसके तहत पुलिसकर्मी के खिलाफ आपराधिक मामला होने पर जिला मजिस्ट्रेट से प्रारंभिक मंजूरी या जांच का निर्देश लेना अनिवार्य होता है। 

इस पर डीआइजी ने पुरानी विभागीय जांच को रद कर दिया और नियम 16.38 के तहत नए सिरे से जांच के आदेश दे दिए। कांस्टेबल ने नए सिरे से जांच करवाने के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। उसकी दलील थी कि जब एक बार जांच रद हो गई है तो दोबारा जांच नहीं होनी चाहिए।

दलील खारिज की

खंडपीठ ने इस दलील को खारिज करते हुए कहा कि तकनीकी आधार पर पिछली जांच रद होने का मतलब यह कतई नहीं है कि आरोपित को क्लीन चिट मिल गई है। विभाग को नियम 16.38 की प्रक्रिया का पालन करते हुए नए सिरे से निष्पक्ष जांच करने का अधिकार है। नियम 16.38 का उद्देश्य ईमानदार पुलिस अधिकारियों को झूठे मामलों से बचाना है, न कि भ्रष्ट या दोषी अधिकारियों को सजा से बचाना या उन्हें संरक्षण देना।

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