वित्तीय तंगी का हवाला देकर कर्मियों के लाभ नहीं रोक सकती सरकार, हिमाचल हाई कोर्ट ने एरियर रोकने वाले नियम रद किए
हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सिविल सर्विसेज (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के नियम 13 को रद्द कर दिया है, जो ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
हाई कोर्ट ने वेतन नियम 2022 का नियम 13 रद्द किया।
सरकार अब कर्मचारियों के एरियर भुगतान में देरी नहीं कर सकती।
वित्तीय तंगी का बहाना अब मान्य नहीं होगा।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को एक बड़ा झटका देते हुए सिविल सर्विसेज (संशोधित वेतन) नियम, 2022 के नियम 13 के उन प्रविधानों को रद कर दिया है। इसके तहत सरकार किस्तों या चरणों में वेतन और पेंशनरों के एरियर को रोकने का अधिकार रखती थी। अदालत ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि प्रशासनिक विवेक और वित्तीय तंगी का हवाला देकर कर्मचारियों के वैधानिक वित्तीय हक को दबाया या टाला नहीं जा सकता।
न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने 31 अक्टूबर 2026 को ''मधु देश्टा बनाम हिमाचल प्रदेश सरकार व अन्य मुख्य याचिका के साथ जुड़ी 260 से अधिक सह-याचिकाओं (रिट व एग्जीक्यूशन पिटीशन) को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया है।
संशोधित वेतन नियम 2022 का नियम 13 आंशिक रूप से अमान्य
अदालत ने 3 जनवरी 2022 को अधिसूचित संशोधित वेतन नियमों के नियम 13 को उस सीमा तक निष्प्रभावी घोषित कर दिया, जो सरकार को संशोधित वेतनमान और सेवानिवृत्ति के बकाए के भुगतान के समय और तरीके को अपनी मर्जी से तय करने का असीमित अधिकार देता था।
वित्तीय तंगी का बहाना नहीं चलेगा
आदेश के मुताबिक, कर्मचारियों को 1 जनवरी 2016 से प्रभावी नए वेतनमान के तहत देय बकाया, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट और कम्यूटेशन का लाभ समयबद्ध तरीके से मिलना जरूरी है। सरकार अपनी वित्तीय स्थिति को आधार बनाकर इसे अनिश्चितकाल के लिए नहीं टाल सकती।
निगम और बिजली बोर्ड पर भी आदेश लागू
कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम, राज्य विद्युत बोर्ड और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय जैसी सरकारी संस्थाओं को भी पूर्व में जारी राज्य सरकार के भुगतान टालने वाले तंत्र से हटकर, कर्मचारियों को देय एरियर जारी करने को कहा है।
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