'संशोधित वेतनमान का एरियर और सेवानिवृत्ति लाभ दो किस्त में जारी करे सरकार', हिमाचल हाई कोर्ट का बड़ा फैसला
हिमाचल हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को 31 दिसंबर 2021 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को संशोधित वेतनमान का एरियर और ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला स्थित परिसर। जागरण आर्काइव
HighLights
सेवानिवृत्त कर्मचारियों को दो किस्तों में मिलेगा एरियर।
1 जनवरी 2016 से देय लाभ पर 6% ब्याज।
हाई कोर्ट ने सरकार के नियमों को रद्द किया।
विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह 31 दिसंबर 2021 से पहले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक जनवरी 2016 से संशोधित वेतनमान का एरियर व संशोधित सेवानिवृत्ति लाभ दो किस्त में अदा करे। उन्हें पहली किस्त 15 दिसंबर 2026 से पहले व दूसरी 28 फरवरी 2027 से पहले अदा करने के आदेश दिए हैं।
एक साथ सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा
एक साथ विभिन्न विभागों, निगमों व बोर्डों से जुड़ी सैकड़ों याचिकाओं का निपटारा करते हुए न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा ने स्पष्ट किया कि उपरोक्त सभी सेवा लाभ पर देय तारीख से छह प्रतिशत ब्याज अदा करना होगा।
याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट में याचिकाएं दायर कर पेंशन के बकाया की ब्याज सहित अदायगी एक ही किस्त में जारी करने के आदेश की मांग की थी।
नियम व पैरा को रद किया
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा तीन जनवरी 2022 व 25 फरवरी 2022 को जारी अधिसूचना के उस नियम व पैरा को रद कर दिया जो याचिकाकर्ताओं की इन सेवा लाभ की पात्रता होने बावजूद उन्हें इन सेवा लाभ की अदायगी के आड़े आ रहे थे। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें वेतन आयोग की सिफारिशों के मुताबिक अभी तक कोई वित्तीय लाभ नहीं दिए गए हैं।
प्रदेश सरकार ने तीन जनवरी 2022 को संशोधित वेतनमान संबंधी नियम बनाए। इन नियमों के तहत सरकार ने वेतन आयोग की सिफारिशों को अपनाया और कर्मचारियों को एक जनवरी 2016 से यह लाभ देने की घोषणा की।
प्रार्थियों का कहना है कि वे भी संशोधित वेतनमान की बकाया राशि पाने के हकदार हैं क्योंकि वे एक जनवरी 2016 के पहले व बाद में सेवानिवृत्त हुए थे। 25 फरवरी 2022 को सरकार ने पेंशन नियमों में संशोधन कर एक जनवरी 2016 के बाद सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की डीसीआर ग्रैच्युटी की सीमा 10 लाख से 20 लाख रुपये कर दी थी।
17 सितंबर 2022 को सरकार ने कार्यालय ज्ञापन जारी कर वित्तीय लाभ देने के लिए किस्तें बनाईं जिसके अनुसार वित्तीय लाभ की बकाया राशि का भुगतान पांच किस्त में करने का प्रविधान बनाया। प्रार्थियों का कहना है कि उनके वित्तीय लाभ किस्त में देने का प्रविधान गलत है।
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