विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

जूनियर ऑफिस असिस्टेंट भर्ती में नई नीति लाने पर हिमाचल हाई कोर्ट सख्त, शिक्षा सचिव को तलब किया

By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 31 Oct 2026 04:24 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (लाइब्रेरी) पदों को नियमित भरने के बजाय मानदेय पर नियुक्त करने के राज्य सरकार के प्रस्ताव पर कड़ी नाराजगी जताई है।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने मानदेय भर्ती प्रस्ताव पर नाराजगी जताई।

  2. शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में तलब किया।

  3. नियमित भर्ती के बजाय अस्थाई नीति पर आपत्ति।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने स्कूलों में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट यानी (लाइब्रेरी) के पदों को नियमित रूप से भरने के बजाय एक अलग मानदेय योजना के तहत भरने के प्रस्ताव पर राज्य सरकार के प्रति सख्त नाराजगी जताई है। मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले में बिना कोर्ट को विश्वास में लिए भर्ती प्रक्रिया को बदलने के प्रयास पर कड़ा संज्ञान लिया है और शिक्षा सचिव को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है।

हाई कोर्ट साल 2022 से इस जनहित याचिका के जरिए पुस्तकालयों में खाली पदों को भरने की निगरानी कर रहा है। मई 2023 में कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि असिस्टेंट लाइब्रेरियन के खाली पदों को नए कैडर 'जेओए (लाइब्रेरी)' में तब्दील कर भर्ती नियम तय किए जाएं और इन्हें प्राथमिकता के आधार पर भरा जाए।

यह कोर्ट की अवमानना जैसा

कोर्ट की निगरानी के बीच, सरकार ने जुलाई 2026 में कैबिनेट से एक नई ड्राफ्ट योजना को मंजूरी दिला दी। इसके तहत 12,500 प्रति माह के नियत मानदेय पर अस्थाई नियुक्तियां करने का प्रस्ताव रखा गया, जिसमें नियमित कैडर का कोई प्रावधान नहीं था। कोर्ट ने साफ कहा कि सरकार ने बिना कोई संशोधन याचिका दायर किए यह कदम उठाया, जो कोर्ट की अवमानना जैसा है।

विभाग ने खुद की थी प्रतिकूल टिप्पणियां

अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, राज्य सरकार के वित्त नियमन विभाग ने खुद इस योजना पर प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं। विभाग ने चेतावनी दी थी कि पूर्व में लाई गई पीटीए, पैट, और एसएमसी जैसी नीतियों को अदालतों में चुनौती दी गई है, जिससे बाद में राज्य के खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है। इस मामले में पूर्व में कुल 771 पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने की बात कही गई थी। 

पहले चरण में 100 पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसमें से अब तक 82 पद हिमाचल प्रदेश राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरे जा चुके हैं। बचे हुए पदों को नियमित करने के बजाय सरकार ने भर्ती को आगे टालने और इस नई मानदेय नीति को लाने का विचार किया था। 

3 दिसंबर को सुनवाई तय

कोर्ट ने अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 दिसंबर 2026 को तय की है, जिसमें शिक्षा सचिव को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहकर यह स्पष्ट करना होगा कि आखिर इस अस्थाई भर्ती नीति की रूपरेखा कोर्ट को बताए बिना क्यों तैयार की गई।

यह भी पढ़ें: 'जमीन के मालिकाना हक का विवाद होने से मुआवजा नहीं रोक सकते', हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला; भवन बनाने वाला हकदार 

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।