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'सरकार दूसरे राज्य के वेतनमान अपनाने के लिए बाध्य नहीं', हिमाचल हाई कोर्ट का फैसला; कहा- यह नीतिगत निर्णय

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Wed, 07 Oct 2026 06:34 AM (IST)

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सीनियर लैबोरेटरी तकनीशियनों को पंजाब के समान संशोधित वेतनमान देने से इनकार कर दिया है। ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने पंजाब के समान वेतनमान की मांग खारिज की।

  2. राज्य सरकार दूसरे राज्य के वेतनमान अपनाने को बाध्य नहीं।

  3. वेतनमान का निर्धारण करना एक नीतिगत निर्णय होता है।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने राज्य के सीनियर लैबोरेटरी तकनीशियनों को पंजाब के समान संशोधित वेतनमान देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कोई भी राज्य सरकार किसी दूसरे राज्य के वेतनमान या नियमों को अपनाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने इस संबंध में दायर अपील को सुनवाई के बाद खारिज कर दिया।

यह अपील 53 कर्मचारियों द्वारा एकलपीठ के उस फैसले के खिलाफ दायर की गई थी, जिसने उनकी इस मांग को पहले ही नामंजूर कर दिया था। 

पंजाब की तर्ज पर वेतमान को लेकर दायर की थी याचिका

मूल रूप से 60 रिट याचिकाकर्ताओं में से 53 कर्मचारियों ने अपील दायर की थी। उनकी मांग थी कि उन्हें पंजाब राज्य के सीनियर लैब तकनीशियनों की तर्ज पर 1978 से संशोधित वेतनमान दिया जाए। इसके बाद समय-समय पर हुए संशोधनों और एक जनवरी 2006 से लागू सामान्य परिवर्तन तालिका के अनुसार भी लाभ मिले। उन्होंने 1978 से बकाया राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की भी मांग की थी। 

सरकार ने किया था विरोध

सरकार ने इस मांग का विरोध किया था। सरकार का रुख था कि संविधान के अनुच्छेद 309 के तहत राज्य लोक सेवाओं पर राज्य का अपना विशेष अधिकार है। हिमाचल सरकार पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पंजाब राज्य के संदर्भ में दिए फैसलों या वहां के वेतनमानों को हूबहू लागू करने के लिए उत्तरदायी नहीं है। 

सरकार ने साल 2013 में अधिसूचना के जरिए सीनियर लैब तकनीशियनों का ग्रेड पे संशोधित कर 3,600 रुपये किया था, जिसे तय तारीख से ही लागू माना जा सकता है। 

वेतनमान का निर्धारण नीतिगत निर्णय

खंडपीठ ने एकलपीठ के फैसले को सही ठहराते हुए कहा कि वेतनमान का निर्धारण करना नीतिगत निर्णय होता है। इसमें भर्ती का तरीका, योग्यता, पदोन्नति के अवसर, कर्तव्यों की प्रकृति और सबसे महत्वपूर्ण नियोक्ता (सरकार) की भुगतान करने की क्षमता जैसे कई कारक शामिल होते हैं।

अदालत ने हाल ही में सहकारी विभाग के निरीक्षकों से जुड़े अन्य समान मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि कानूनन एक राज्य दूसरे राज्य द्वारा तय किए वेतनमानों को मानने के लिए विवश नहीं है।

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